द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन डेस्क: राजधानी के दलाल स्ट्रीट पर पिछले कुछ हफ्तों से पसरा सन्नाटा आखिरकार टूटता नजर आ रहा है। लगातार आठ हफ्तों तक मंदी और बिकवाली के दौर से गुजरने के बाद, भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत और हैरान करने वाली वापसी की है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स खुलते ही रॉकेट की तरह भागा और देखते-देखते 600 अंकों की छलांग लगा गया। इस अचानक आए उछाल ने न सिर्फ निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, बल्कि बाजार के विश्लेषकों को भी नए सिरे से समीकरण साधने पर मजबूर कर दिया है।
कच्चे तेल में नरमी और सरकारी बैंकों का जोरदार प्रदर्शन
हमारी फील्ड पड़ताल के मुताबिक, इस ताजा तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी एक बड़ा कारक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसके साथ ही, निवेशकों का रुझान एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर, खासकर सरकारी बैंकों की तरफ तेजी से बढ़ा है। शुरुआती घंटों में ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में लिवाली का भारी दौर देखा गया, जिससे बाजार को नीचे गिरने से मजबूत सहारा मिला।
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मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले बाजार की नब्ज
आगामी रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से ठीक पहले बाजार में यह हलचल अपने आप में कई संकेत देती है। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई सकारात्मक रुख अपना सकता है। हालांकि, कुछ सत्रों में हमने यह भी देखा कि बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते सुस्ती आई और सेंसेक्स 72,480 के स्तर के आसपास बंद हुआ, जिसमें हेल्थकेयर, मेटल और फार्मा सेक्टर का मिला-जुला रुख देखने को मिला। लेकिन कुल मिलाकर धारणा अब नकारात्मक से बदलकर सतर्क सकारात्मक हो चुकी है।
विदेशी निवेशकों की चाल और घरेलू मोर्चे पर स्थिति
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब हमने बाजार के दिग्गजों से बात की, तो उनका कहना था कि लगातार आठ हफ्ते की गिरावट ने वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया था। जब बाजार सस्ता होता है, तो स्मार्ट मनी (Smart Money) की एंट्री शुरू हो जाती है। इसके अलावा, भारतीय रुपये में आई मजबूती ने भी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा थोड़ा बहाल करने में मदद की है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए अभी भी पूरी तरह से 'बुल रन' (Bull Run) का दावा करना जल्दबाजी होगी।
क्या कहते हैं मार्केट एक्सपर्ट्स?
विशेषज्ञों की राय इस बात पर एकमत है कि बाजार फिलहाल वोलेटाइल (अस्थिर) रहेगा, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह करेक्शन एक अवसर साबित हो रहा है। जानकारों का सुझाव है कि निवेशकों को अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल्स वाले शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए।
- लगातार 8 हफ्तों की मंदी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत वापसी।
- कच्चे तेल के दामों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला मनोवैज्ञानिक समर्थन।
- सरकारी बैंकों और चुनिंदा चुस्त शेयरों में भारी खरीदारी का रुझान।
- आरबीआई की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी पर टिकी हैं निवेशकों की निगाहें।
हमारी यह पड़ताल यही दर्शाती है कि भारतीय शेयर बाजार अभी भी ग्लोबल और घरेलू संकेतों के बीच एक नाजुक संतुलन बना रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह तेजी महज एक 'डेड कैट बाउंस' है या फिर एक नए स्थायी रुझान की शुरुआत।








