होम/देश/सेंसेक्स में 600 अंकों का उछाल: आठ हफ्तों की मंदी के बाद क्या शेयर बाजार में लौट रहा है दम?
देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

सेंसेक्स में 600 अंकों का उछाल: आठ हफ्तों की मंदी के बाद क्या शेयर बाजार में लौट रहा है दम?

लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी देखने को मिली है। सेंसेक्स 600 अंक से अधिक उछला है, जिसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आगामी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदें मुख्य वजह रही हैं।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•5 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•28
🌐Read in English →
शेयर करें:
सेंसेक्स में 600 अंकों का उछाल: आठ हफ्तों की मंदी के बाद क्या शेयर बाजार में लौट रहा है दम?
📷 सेंसेक्स में 600 अंकों का उछाल: आठ हफ्तों की मंदी के बाद क्या शेयर बाजार में लौट रहा है दम? — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी देखने को मिली है। सेंसेक्स 600 अंक से अधिक उछला है, जिसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आगामी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदें मुख्य वजह रही हैं।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन डेस्क: राजधानी के दलाल स्ट्रीट पर पिछले कुछ हफ्तों से पसरा सन्नाटा आखिरकार टूटता नजर आ रहा है। लगातार आठ हफ्तों तक मंदी और बिकवाली के दौर से गुजरने के बाद, भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत और हैरान करने वाली वापसी की है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स खुलते ही रॉकेट की तरह भागा और देखते-देखते 600 अंकों की छलांग लगा गया। इस अचानक आए उछाल ने न सिर्फ निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, बल्कि बाजार के विश्लेषकों को भी नए सिरे से समीकरण साधने पर मजबूर कर दिया है।

कच्चे तेल में नरमी और सरकारी बैंकों का जोरदार प्रदर्शन

हमारी फील्ड पड़ताल के मुताबिक, इस ताजा तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी एक बड़ा कारक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसके साथ ही, निवेशकों का रुझान एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर, खासकर सरकारी बैंकों की तरफ तेजी से बढ़ा है। शुरुआती घंटों में ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में लिवाली का भारी दौर देखा गया, जिससे बाजार को नीचे गिरने से मजबूत सहारा मिला।

संबंधित खबरें

चुनावी रण से सांगठनिक फेरबदल तक: उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर तक भाजपा की बिछ रही नई चालें

चुनावी रण से सांगठनिक फेरबदल तक: उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर तक भाजपा की बिछ रही नई चालें

उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों और सियासी हलचल के बीच बिहार की राजनीति में उबाल

उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों और सियासी हलचल के बीच बिहार की राजनीति में उबाल

सिस्टम के दीमक: देश के अलग-अलग कोनों से रिश्वतखोरी के मामलों पर एक जमीनी पड़ताल

सिस्टम के दीमक: देश के अलग-अलग कोनों से रिश्वतखोरी के मामलों पर एक जमीनी पड़ताल

हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में भुवनेश्वर कुमार संभालेंगे टीम इंडिया की कमान, क्रुणाल पांड्या भी करेंगे वापसी

हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में भुवनेश्वर कुमार संभालेंगे टीम इंडिया की कमान, क्रुणाल पांड्या भी करेंगे वापसी

सख्त फैसले और सियासी संग्राम के घेरे में सरकार: भ्रष्टाचार जांच से लेकर नीतिगत बदलावों तक की पड़ताल

सख्त फैसले और सियासी संग्राम के घेरे में सरकार: भ्रष्टाचार जांच से लेकर नीतिगत बदलावों तक की पड़ताल

सऊदी-हूती जंग की वापसी: पर्दे के पीछे ट्रंप की रणनीति और अमेरिकी सेना की बढ़ती बेचैनी

सऊदी-हूती जंग की वापसी: पर्दे के पीछे ट्रंप की रणनीति और अमेरिकी सेना की बढ़ती बेचैनी

रूस की एंटी-प्लेग लैब में रहस्यमयी मौत और क्वारंटीन: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है नया जैविक खतरा?

रूस की एंटी-प्लेग लैब में रहस्यमयी मौत और क्वारंटीन: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है नया जैविक खतरा?

वेस्टइंडीज़ की आक्रामक जीत और ज़िम्बाब्वे की जुझारू चुनौती: क्रिकेट गलियारों की जमीनी हकीकत

वेस्टइंडीज़ की आक्रामक जीत और ज़िम्बाब्वे की जुझारू चुनौती: क्रिकेट गलियारों की जमीनी हकीकत

मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले बाजार की नब्ज

आगामी रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से ठीक पहले बाजार में यह हलचल अपने आप में कई संकेत देती है। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई सकारात्मक रुख अपना सकता है। हालांकि, कुछ सत्रों में हमने यह भी देखा कि बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते सुस्ती आई और सेंसेक्स 72,480 के स्तर के आसपास बंद हुआ, जिसमें हेल्थकेयर, मेटल और फार्मा सेक्टर का मिला-जुला रुख देखने को मिला। लेकिन कुल मिलाकर धारणा अब नकारात्मक से बदलकर सतर्क सकारात्मक हो चुकी है।

विदेशी निवेशकों की चाल और घरेलू मोर्चे पर स्थिति

द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब हमने बाजार के दिग्गजों से बात की, तो उनका कहना था कि लगातार आठ हफ्ते की गिरावट ने वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया था। जब बाजार सस्ता होता है, तो स्मार्ट मनी (Smart Money) की एंट्री शुरू हो जाती है। इसके अलावा, भारतीय रुपये में आई मजबूती ने भी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा थोड़ा बहाल करने में मदद की है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए अभी भी पूरी तरह से 'बुल रन' (Bull Run) का दावा करना जल्दबाजी होगी।

क्या कहते हैं मार्केट एक्सपर्ट्स?

विशेषज्ञों की राय इस बात पर एकमत है कि बाजार फिलहाल वोलेटाइल (अस्थिर) रहेगा, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह करेक्शन एक अवसर साबित हो रहा है। जानकारों का सुझाव है कि निवेशकों को अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल्स वाले शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए।

  • लगातार 8 हफ्तों की मंदी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत वापसी।
  • कच्चे तेल के दामों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला मनोवैज्ञानिक समर्थन।
  • सरकारी बैंकों और चुनिंदा चुस्त शेयरों में भारी खरीदारी का रुझान।
  • आरबीआई की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी पर टिकी हैं निवेशकों की निगाहें।

हमारी यह पड़ताल यही दर्शाती है कि भारतीय शेयर बाजार अभी भी ग्लोबल और घरेलू संकेतों के बीच एक नाजुक संतुलन बना रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह तेजी महज एक 'डेड कैट बाउंस' है या फिर एक नए स्थायी रुझान की शुरुआत।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

चुनावी रण से सांगठनिक फेरबदल तक: उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर तक भाजपा की बिछ रही नई चालेंPOLITICS

चुनावी रण से सांगठनिक फेरबदल तक: उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर तक भाजपा की बिछ रही नई चालें

5 अक्टू॰41
उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों और सियासी हलचल के बीच बिहार की राजनीति में उबालPOLITICS

उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों और सियासी हलचल के बीच बिहार की राजनीति में उबाल

5 अक्टू॰47
सिस्टम के दीमक: देश के अलग-अलग कोनों से रिश्वतखोरी के मामलों पर एक जमीनी पड़तालNATIONAL

सिस्टम के दीमक: देश के अलग-अलग कोनों से रिश्वतखोरी के मामलों पर एक जमीनी पड़ताल

5 अक्टू॰26
हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में भुवनेश्वर कुमार संभालेंगे टीम इंडिया की कमान, क्रुणाल पांड्या भी करेंगे वापसीNATIONAL

हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में भुवनेश्वर कुमार संभालेंगे टीम इंडिया की कमान, क्रुणाल पांड्या भी करेंगे वापसी

5 अक्टू॰25
सख्त फैसले और सियासी संग्राम के घेरे में सरकार: भ्रष्टाचार जांच से लेकर नीतिगत बदलावों तक की पड़तालPOLITICS

सख्त फैसले और सियासी संग्राम के घेरे में सरकार: भ्रष्टाचार जांच से लेकर नीतिगत बदलावों तक की पड़ताल

5 अक्टू॰27
सऊदी-हूती जंग की वापसी: पर्दे के पीछे ट्रंप की रणनीति और अमेरिकी सेना की बढ़ती बेचैनीNATIONAL

सऊदी-हूती जंग की वापसी: पर्दे के पीछे ट्रंप की रणनीति और अमेरिकी सेना की बढ़ती बेचैनी

5 अक्टू॰50
रूस की एंटी-प्लेग लैब में रहस्यमयी मौत और क्वारंटीन: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है नया जैविक खतरा?NATIONAL

रूस की एंटी-प्लेग लैब में रहस्यमयी मौत और क्वारंटीन: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है नया जैविक खतरा?

5 अक्टू॰51
वेस्टइंडीज़ की आक्रामक जीत और ज़िम्बाब्वे की जुझारू चुनौती: क्रिकेट गलियारों की जमीनी हकीकतNATIONAL

वेस्टइंडीज़ की आक्रामक जीत और ज़िम्बाब्वे की जुझारू चुनौती: क्रिकेट गलियारों की जमीनी हकीकत

5 अक्टू॰34