ओटीटी पर छाया 'दुपहिया' का जादू, पहले सीजन की सफलता के बाद धमाकेदार हुई वापसी
भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों ग्रामीण पृष्ठभूमि और कॉमेडी-ड्रामा जॉनर की कहानियों का बोलबाला है। इसी कड़ी में अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की गई बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज 'दुपहिया 2' ने रिलीज होते ही दर्शकों के दिलों पर कब्जा जमा लिया है। सीरीज के आठ एपिसोड दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं और यही वजह है कि यह शो ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर नंबर-1 की पोजीशन पर ट्रेंड कर रहा है। पहले सीजन की अपार सफलता के बाद मेकर्स इस बार दोगुने ट्विस्ट, टर्न्स और ग्रामीण हास्य के साथ लौटे हैं, जिसे जनता का बेशुमार प्यार मिल रहा है।
बिहार के काल्पनिक और शांत गांव धड़कपुर की पृष्ठभूमि पर रची गई यह कहानी इस बार और भी ज्यादा उलझनों और मनोरंजक मोड़ों से भरी हुई है। इस सीरीज में न सिर्फ ग्रामीण परिवेश की सादगी देखने को मिलती है, बल्कि आज के सामाजिक और डिजिटल दौर के रंग भी बखूबी उकेरे गए हैं। शो के प्रीमियर से पहले ही इसकी स्टार कास्ट ने इसके निर्माण और शूटिंग से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए हैं, जिन्होंने दर्शकों की उत्सुकता को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
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भूगोल झा के किरदार के पीछे का दिलचस्प और अनोखा सच
वेब सीरीज 'दुपहिया 2' में अभिनेता स्पर्श श्रीवास्तव 'भूगोल झा' की भूमिका में नजर आ रहे हैं। उनका यह किरदार एक ऐसे महत्वाकांक्षी लड़के का है जो अभिनेता बनने का सपना देखता है और सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए अजीबो-गरीब हथकंडे अपनाता है। फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिए वह कैमरे के सामने लड़की का रूप धरकर रील्स बनाता है। इन सीन्स में स्पर्श का बदला हुआ रूप इतना सटीक होता है कि पहली नजर में उन्हें पहचान पाना भी असंभव सा लगता है।
जब दर्शकों और मीडिया ने स्पर्श से इस बात का जिक्र किया कि महिला के किरदार में उन्हें पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है, तो अभिनेता ने हंसते हुए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी बयां की। उन्होंने खुलासा किया कि इस तरह के चुनौतीपूर्ण रोल को पर्दे पर उतारने के लिए उन्हें अपने अतीत के कुछ बेहद निजी अनुभवों का बहुत फायदा मिला। स्पर्श के मुताबिक, अभिनय की यह कला उनके भीतर अनजाने में ही बहुत पहले से ही बस चुकी थी।
बचपन की कथक ट्रेनिंग और फ्रॉक पहनकर डांस करने के अनसुने किस्से
अपने किरदार की तैयारी को लेकर बात करते हुए स्पर्श श्रीवास्तव ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही नृत्य कला से रूबरू करा दिया था। स्पर्श ने करीब तीन साल तक औपचारिक रूप से कथक की विधिवत ट्रेनिंग ली थी। उनके अनुसार, उसी शास्त्रीय नृत्य अभ्यास ने उनके भीतर हाथों के हाव-भाव और शारीरिक ग्रेस को हमेशा के लिए जिंदा रखा, जो आज पर्दे पर उनके काम आ रहा है।
अभिनेता ने मुस्कुराते हुए एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया, "मुझे लगता है कि वो चीजें मेरे अंदर पहले से थीं। जब मैं बहुत छोटा था, तब मेरी मां ने मुझे कथक सिखाया था। मैंने लगभग तीन साल तक इसकी ट्रेनिंग ली थी, इसलिए वो ग्रेस और हाथों के एक्सप्रेशन मेरे अंदर रचे-बसे हैं। बचपन के दिनों में मैं आगरा के स्थानीय मंचों पर फ्रॉक पहनकर भी डांस किया करता था। हालांकि, उस कला को दोबारा अभ्यास में लाने में एक लंबा अंतराल आ गया था, लेकिन जड़ें वही थीं।"
भारी भरकम और टाइट कपड़ों में शूटिंग करना रहा सबसे बड़ा टास्क
भले ही बचपन का कथक अभ्यास स्पर्श के लिए मददगार साबित हुआ हो, लेकिन कैमरे के सामने एक महिला के रूप में पूरी तरह ढलना आसान नहीं था। पहले सीजन की तरह ही इस बार भी उन्हें इस विशेष गेटअप में आने के लिए काफी रिहर्सल करनी पड़ी। स्पर्श ने स्वीकार किया कि इस गेटअप का सबसे कठिन हिस्सा महिलाओं के पारंपरिक वस्त्रों को संभालना और उनमें असहजता के बावजूद सहज दिखना था।
"जब मैंने इस बार रिहर्सल शुरू की और पिछले सीजन में भी जब हमने ये सब किया था, तो शुरुआत में काफी परेशानी हुई थी। हालांकि धीरे-धीरे मैं ढल गया। लेकिन सबसे बड़ा चैलेंज सही ड्रेस पहनना होता है। वो घाघरा, चोली और ब्लाउज इतने ज्यादा टाइट होते हैं कि उसमें सांस लेना और सामान्य रूप से रहना बहुत मुश्किल काम है। इन कपड़ों में शूटिंग करने के बाद मैं कह सकता हूं कि इसके लिए सचमुच सभी महिलाओं और लड़कियों को सलाम है।" — स्पर्श श्रीवास्तव, अभिनेता
सरपंच पुष्पलता यादव के रूप में रेणुका शहाणे का कड़ा भाषाई संघर्ष
इस सीरीज में सिर्फ युवा कलाकार ही नहीं, बल्कि दिग्गज अभिनेत्री रेणुका शहाणे की मौजूदगी भी चार चांद लगा रही है। रेणुका ने गांव की कड़क और दबंग सरपंच 'पुष्पलता यादव' का किरदार निभाया है। महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली रेणुका के लिए धड़कपुर के ठेठ बिहारी लहजे और ग्रामीण बोली को अपनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने इस भाषा पर पकड़ बनाने के लिए पर्दे के पीछे जमकर पसीना बहाया है।
अपने अनुभव को साझा करते हुए रेणुका शहाणे ने बताया कि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने कहा, "हमारे साथ भाषा के एक विशेष एक्सपर्ट रवि जी थे, जिन्होंने मुझे इस स्थानीय बोली की बारीकियां सिखाईं। चूंकि मैं इस लहजे से सबसे दूर थी, इसलिए मुझे सबसे ज्यादा ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में इस भाषा के साथ सहज होने में मुझे काफी लंबा वक्त लगा, लेकिन अब यह मेरे भीतर इस कदर बस चुकी है कि कई बार मैं अनजाने में सामान्य हिंदी बोलते वक्त भी उसी बिहारी टोन का इस्तेमाल करने लगती हूँ।"
अपराध, हास्य और ग्रामीण कशमकश का बेहतरीन मिश्रण है 'दुपहिया 2'
निर्देशक सोनम नायर और उनकी पूरी टीम ने इस सीजन में कहानी को और अधिक परतदार और रोमांचक बनाया है। पहले सीजन की मासूमियत के मुकाबले इस बार सीरीज में अपराध, प्यार, जुगाड़, अंधविश्वास और पेपर लीक जैसे समकालीन मुद्दों को भी बहुत ही सधे हुए तरीके से पिरोया गया है। यही वजह है कि दर्शक इस सीरीज से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण भारत की राजनीति, पारिवारिक कलह और हास्य का यह अनोखा कॉकटेल दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह कामयाब रहा है।
आने वाले दिनों में 'दुपहिया' का यह सफर ओटीटी जगत में और कितने नए रिकॉर्ड कायम करता है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल स्पर्श श्रीवास्तव और रेणुका शहाणे के शानदार अभिनय ने इस सीरीज को इस हफ्ते की सबसे बड़ी और अनिवार्य रूप से देखने वाली पेशकश बना दिया है। ग्रामीण परिवेश की इस अनोखी दास्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतरीन पटकथा और मजबूत अभिनय के दम पर कोई भी कहानी दर्शकों के दिलों पर आसानी से राज कर सकती है।







