सफर की खुशियां अचानक मातम में बदलीं
भारतीय रेल की पटरियों पर दौड़ती गाड़ियां हर रोज लाखों सपनों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती हैं। कोई अपने परिवार के पास लौटने की जल्दी में होता है, तो कोई आजीविका की तलाश में अनजान शहर की ओर निकल पड़ता है। बोगी के भीतर यात्रियों का यह सफर तमाम उम्मीदों और बातचीत के साथ आगे बढ़ता है। लेकिन कभी-कभी यही सफर जिंदगी का आखिरी सफर साबित हो जाता है, जिसकी कल्पना किसी ने कभी नहीं की होती। ऐसा ही एक खौफनाक वाकया हाल ही में सामने आया, जिसने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की हिफाजत को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
रोजगार की तलाश में घर से दूर रहने वाले युवा जब त्योहारों या छुट्टियों में अपने आशियाने की तरफ लौटते हैं, तो उनके परिजनों की आंखें दरवाजे पर टिकी होती हैं। लेकिन जब अपनों की जगह सिर्फ दुखद समाचार पहुंचे, तो पूरा परिवार अंदर से टूट जाता है। इस घटना में भी एक ऐसा ही नौजवान शिकार बना, जो अपनों के बीच लौटने का सपना देख रहा था, लेकिन रास्ते में ही शातिर दरिंदों ने उसकी सांसें हमेशा के लिए थाम दीं।
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हैदराबाद से शुरू हुआ था खौफनाक सफर
पीड़ित युवक नितिन कुमार वैशाली जिले का रहने वाला था और परिवार का पेट पालने के लिए हैदराबाद में रहकर मेहनत-मजदूरी करता था। जिंदगी की जद्दोजहद के बीच जब उसे कुछ दिनों का अवकाश मिला, तो उसने अपने घर लौटने का फैसला किया। वह निर्धारित ट्रेन पकड़कर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुआ। परिजनों को भी इस बात की पूरी उम्मीद थी कि उनका बेटा तय समय पर घर की दहलीज पर पहुंच जाएगा और साथ बैठकर वक्त गुजरेगा।
लेकिन वक्त के मन में कुछ और ही चल रहा था। तय वक्त बीत जाने के बाद भी जब नितिन घर नहीं पहुंचा और उसका मोबाइल भी लगातार स्विच ऑफ मिलने लगा, तो घरिकों की बेचैनी बढ़ती चली गई। आखिरकार घबराए परिजनों ने रेल पुलिस से संपर्क किया और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जब इस मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की, तो परत-दर-परत एक ऐसे सनसनीखेज खुलासे सामने आए, जिसने कानून के रखवालों को भी हैरान कर दिया।
खाकी का रौब और ठगी का खतरनाक जाल
इस पूरे मामले की तफ्तीश में जुटी रेल पुलिस की टीम के सामने एक ऐसा किरदार उभरकर आया, जो सामान्य अपराधियों से बिल्कुल अलग था। जांच में पता चला कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से ट्रेन में सफर करने वाले अकेले या सीधे-साधे यात्रियों को अपना निशाना बनाता था। वह खुद को कभी स्थानीय पुलिस का कर्मी, तो कभी रेलवे सुरक्षा बल यानी जीआरपी का सिपाही और कभी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का अधिकारी बताता था।
उसकी बातों के झांसे में आकर सामने वाला शख्स यह समझ ही नहीं पाता था कि वह किसी साधारण मु मुसाफिर से नहीं, बल्कि वर्दी की धमक दिखाने वाले किसी जालसाज से उलझ रहा है। आरोपी इसी झूठे रुतबे का इस्तेमाल करके लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाता था और फिर उनसे अवैध वसूली का खेल शुरू करता था। नितिन भी कथित तौर पर इसी शातिर जाल में उलझ गया, जिसके बाद उसे प्रताड़ित करने का सिलसिला शुरू हुआ।
पैसे ऐंठने के बाद भी नहीं पसीजा दिल
आरंभिक जानकारियों के मुताबिक, जालसाज ने पहले नितिन को अपने भरोसे में लिया और फिर छोटी-छोटी बातों को लेकर उसे परेशान करना शुरू कर दिया। कभी सिगरेट पीने जैसी मामूली बात को तूल देकर उसे धमकाया गया और उसके परिजनों से फिरौती के रूप में पैसों की मांग की जाने लगी। परिवार के लोगों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार पैसे देने की कोशिश भी की, लेकिन उस शातिर अपराधी की नीयत में खोट था।
पैसे मिलने या न मिलने के बावजूद आरोपी की दरिंदगी कम नहीं हुई। उसने अपनी पहचान उजागर होने के डर से या फिर आपराधिक प्रवृत्ति के चलते बेहद खौफनाक कदम उठाया। आरोप है कि उसने नितिन के हाथ-पैर मजबूती से बांध दिए और जब ट्रेन गति में थी, तब उसे चलती हुई बोगी से बाहर नीचे फेंक दिया। इस बेरहम कृत्य के कारण युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो सामने आया बड़ा सच
जब पुलिस ने इस हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास सामने आते ही अधिकारी भी दंग रह गए। जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि इसी तरह की वारदातें पहले भी घटित हो चुकी हैं। दो साल पहले भी इसी इलाके के आसपास दो अन्य युवकों को चलती ट्रेन से नीचे फेंकने की घटनाएं सामने आई थीं। हालांकि, उन दोनों मामलों में गनीमत यह रही थी कि पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब हो गए थे।
उस पुराने मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया था और उसने कानून के मुताबिक अपनी सजा भी काटी थी। लेकिन जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद भी उसकी फितरत में कोई सुधार नहीं आया। उसने एक बार फिर उसी पुराने और खतरनाक तरीके को अपनाया, इस बार फर्क सिर्फ इतना था कि नया शिकार अपनी जान नहीं बचा सका।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
"आरोपी आदतन अपराधी है और उसने बेहद शातिर अंदाज में इस अपराध को अंजाम दिया था। हमने पुराने मामलों और मौजूदा साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पुख्ता सबूत जुटाए हैं। इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर मु मुजरिम को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी, ताकि आगे से कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।" — कंचन कुमारी, रेल डीएसपी
इस पूरी घटना ने देश की लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले आम मुसाफिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को सरकारी नुमाइंदा बताकर किसी मुसाफिर को धमकाता है, तो आसपास बैठे अन्य यात्री भी डर के मारे कुछ नहीं बोल पाते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां ट्रेनों के भीतर गश्त को और अधिक प्रभावी बनाएं।
फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी रोहित तिवारी को वाराणसी और बक्सर के बीच स्थित मोहनसराय क्षेत्र से धर दबोचा है। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अकेले इस वारदात को अंजाम दिया था या उसके साथ इस सिंडिकेट में कुछ और लोग भी शामिल थे। नितिन के परिजनों के लिए यह घाव कभी न भरने वाला बन गया है, जो बस यही सोचकर आहत हैं कि उनका बेटा घर लौटने के बजाय हमेशा के लिए दूर चला गया।





