कोलकाता/द फ्रीलान्स ब्यूरो — कोलकाता से लेकर दिल्ली तक इस हफ्ते कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसलों की चर्चा जोरों पर है। देश के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में शुमार कलकत्ता हाईकोर्ट ने पिछले कुछ दिनों में राजनीति, नागरिकता और जनहित से जुड़े कई बेहद संवेदनशील मामलों पर अपनी सख्त और स्पष्ट राय रखी है। एक तरफ जहां कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने का निर्देश दिया है, वहीं दूसरी तरफ राजनीति से जुड़े मामलों में भी बड़ी राहत और सख्त टिप्पणियां सामने आई हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने इन सभी बड़े कानूनी घटनाक्रमों की जमीनी और कागजी पड़ताल की है।
ताजा मामलों में सबसे चर्चित मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है जिसका नाम एसआईआर सूची से हटा दिया गया था। अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित व्यक्ति को यह साबित करने को कहा है कि वह वास्तव में भारत का नागरिक है या नहीं। इस तरह के मामलों में न्यायपालिका की यह सख्ती देश की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। अदालत ने साफ कर दिया है कि नागरिकता जैसे गंभीर मामलों में पुख्ता दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही होगा। सरकारी मशीनरी और प्रभावित पक्षों के बीच इस आदेश के बाद कानूनी हलचल तेज हो गई है।
महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
राजनीतिक गलियारों में हलचल तब बढ़ गई जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी। यह पूरा मामला एक कथित हेट स्पीच यानी भड़काऊ भाषण से जुड़ा हुआ था, जिसमें निचली अदालत से सांसद की मुश्किलें बढ़ गई थीं। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से महुआ मोइत्रा और उनकी पार्टी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी जैसी किसी भी कड़ी कार्रवाई पर रोक लगाई है। इस आदेश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है और विपक्षी खेमे में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है।
दूसरी ओर, राज्य में कानून और व्यवस्था के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी अदालत का कड़ा पहरा देखने को मिला है। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी ऐसे भवन या इमारत को बिजली का नया कनेक्शन नहीं दिया जा सकता जिसे स्थानीय प्रशासन या नगर निगम ने पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया है। अदालत ने माना कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा देने के नाम पर लोगों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। इस फैसले से उन मकान मालिकों और बिल्डरों को तगड़ा झटका लगा है जो गैरकानूनी या जर्जर इमारतों में निर्माण कार्य जारी रखे हुए थे।
पश्चिम बंगाल में नीट परीक्षा का मामला भी पहुंचा अदालत
इन तमाम बड़े फैसलों के बीच पश्चिम बंगाल से मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यानी एनईईटी से जुड़ा पहला मामला भी अब कलकत्ता हाईकोर्ट की देहरी तक पहुंच गया है। परीक्षा में गड़बड़ी और परिणामों से जुड़े इस ताजा विवाद ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और शिक्षा विभाग या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को क्या निर्देश देती है, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं। वकीलों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार से जुड़े अन्य कानूनी विवादों पर भी अदालत की नजर बनी हुई है। देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के ये फैसले राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। द फ्रीलान्स लगातार इन सभी मामलों की अंदरूनी पड़ताल कर रहा है ताकि हमारे पाठकों तक हर एक कानूनी पहलू बिल्कुल साफ और सटीक रूप में पहुंच सके।
आम जनता के लिए क्या मायने रखते हैं ये फैसले
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के ये सभी आदेश इस बात का संकेत हैं कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों और जनसुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है। चाहे वह अवैध निर्माण में बिजली काटने का मामला हो, नागरिकता की पड़ताल का सवाल हो या फिर राजनीतिक हस्तियों को राहत देने का विषय हो, अदालत हर मामले में कानून के दायरे को सर्वोपरि रख रही है। आम जनता भी इन फैसलों को बहुत बारीकी से देख रही है क्योंकि इनका असर सीधे तौर पर आम आदमी की जिंदगी और राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। द फ्रीलान्स आगे भी इन सभी मामलों की हर एक सुनवाई पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।




