नई दिल्ली/चंडीगढ़ — केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की कार्रवाई को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी सहयोगियों और उनके ओएसडी राजवीर घुम्मन के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच सीबीआई से कराने का बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस कानूनी कदम के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है और दोनों तरफ से तीखे बयानों का दौर शुरू हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने अपनी शुरुआती पड़ताल तेज कर दी है और सीएम के ओएसडी राजवीर घुम्मन को पूछताछ के लिए आधिकारिक समन जारी किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि प्रशासनिक पदों के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं में कुछ बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। अदालत के इस आदेश से राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि विपक्षी दल लगातार मुख्यमंत्री के करीबियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे। कानून के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
इस पूरी कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी ने कड़ी नाराजगी जताई है और केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि पंजाब के सीएम कार्यालय पर सीबीआई की यह छापेमारी और जांच केवल बीजेपी की भारी झुंझलाहट का नतीजा है। 'आप' नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार देश भर में अपनी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की सरकारों को अस्थिर करने की लगातार कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि पंजाब की लोकप्रिय सरकार के कामों से विरोधी दल घबरा गए हैं और इसी बौखलाहट में केंद्रीय एजेंसियों का खुलेआम राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों ने आम आदमी पार्टी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विरोधी दलों का कहना है कि न्यायपालिका ने सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर यह स्वतंत्र फैसला लिया है और इसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। उनका तर्क है कि अगर सरकार या उसके अधिकारी पूरी तरह से ईमानदार हैं, तो उन्हें सीबीआई की इस खुली जांच से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद अब जनता की नजरें भी इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट में क्या और कौन से नए तथ्य सामने लाती है।
अदालती आदेश और दो महीने की सख्त समयसीमा
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने सख्त आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह पूरी मुस्तैदी से काम करे और ठीक दो महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे। इस तय समयसीमा के कारण जांच एजेंसी पर भी दबाव है कि वह जल्द से जल्द सभी साक्ष्यों को इकट्ठा करे और पूछताछ की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए। ओएसडी राजवीर घुम्मन से होने वाली पूछताछ इस जांच की दिशा तय करने में सबसे अहम कड़ी साबित होने वाली है।
स्थानीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम को लेकर आम लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राज्य के लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कौन सी खामियां रहीं जिनकी वजह से अदालत को सीधे केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपनी पड़ी। आने वाले दिनों में यह मामला देश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है क्योंकि पंजाब का राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी संवेदनशील चल रहा है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और जैसे ही कोई नया अपडेट सामने आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।




