ऑनलाइन बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा था खतरनाक कृषि रसायन
देश के डिजिटल बाजार और ई-कॉमर्स सेक्टर पर सरकार की नजरें इन दिनों बेहद सख्त हो चुकी हैं। आए दिन ग्राहकों के अधिकारों और नियमों के उल्लंघन को लेकर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी सीसीपीए ने देश के तीन सबसे बड़े ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया है। इन तीनों प्रमुख कंपनियों पर नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित या गैर-अनुमोदित कृषि-रसायन बेचने के आरोप में दस-दस लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई से ऑनलाइन मार्केटप्लेस चलाने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले सामानों की गुणवत्ता और वैधता पर अब एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राधिकरण की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन ई-कॉमर्स दिग्गजों के ऑनलाइन स्टोर पर 'साइक्लोसिनोन' (Cyclosynon) नामक हर्बीसाइड यानी खरपतवारनाशक की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही थी। सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि इस उत्पाद की ऑनलाइन लिस्टिंग करते समय इसके सक्रिय रासायनिक तत्वों और सटीक घटकों के बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी ग्राहकों के साथ साझा नहीं की जा रही थी। ऑनलाइन सामान खरीदने वाले आम उपभोक्ता बिना यह जाने इन विज्ञापनों और उत्पादों के झांसे में आ रहे थे कि असल में यह रसायन उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
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कृषि मंत्रालय और उद्योग निकाय की शिकायत पर हुई बड़ी कार्रवाई
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पास देश के एक प्रमुख कृषि संघ की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। यह शिकायत 'क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया' द्वारा उठाई गई थी, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से बिक रहे खतरनाक कृषि-रसायनों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। फेडरेशन की आपत्ति के बाद जब सरकारी विभागों ने मामले की फाइलें खंगालीं तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच के दौरान जब कृषि मंत्रालय से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया, तब एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से बताया कि 'साइक्लोसिनोन' नाम का कोई भी रसायन कीटनाशक अधिनियम, 1968 की आधिकारिक अनुसूची में दर्ज ही नहीं है। इसका सीधा मतलब यह था कि भारत में इस विशेष रसायन की व्यावसायिक बिक्री, वितरण या मार्केटिंग के लिए कोई कानूनी मंजूरी या वैधानिक ढांचा मौजूद नहीं है। बिना किसी सरकारी अनुमति या परीक्षण के इस तरह के रसायनों का खुलेआम ऑनलाइन बिकना न केवल मौजूदा कानूनों की खुली अवहेलना थी, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ भी था।
हजारों की संख्या में बिक चुकी थीं खतरनाक उत्पाद की यूनिट्स
जांच के दौरान इस बात के भी आंकड़े जुटाए गए कि इन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने इस गैरकानूनी खरपतवारनाशक के जरिए कितना मुनाफा कमाया और इसकी कितनी बड़ी मात्रा ग्राहकों तक पहुंच चुकी है। सीसीपीए के रिकॉर्ड और दस्तावेजों के मुताबिक, अकेले अमेरिकी दिग्गज कंपनी अमेजन के प्लेटफॉर्म पर इस खतरनाक हर्बीसाइड के कुल 38,410 ऑर्डर दर्ज किए गए थे। इन ऑर्डर्स के माध्यम से प्लेटफॉर्म पर कुल 43,634 यूनिट्स की भारी-भरकम बिक्री की जा चुकी थी।
दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि केवल एक ही प्लेटफॉर्म पर इन उत्पादों की कुल बिक्री का आंकड़ा लगभग 96.42 लाख रुपये तक पहुंच गया था। कल्पना कीजिए कि जिस रसायन के बारे में देश का कृषि मंत्रालय भी यह कह रहा है कि वह कानूनी सूची में ही नहीं है, उसे किस तरह से खुलेआम आम किसानों और ग्राहकों को परोसा जा रहा था। जब इतने बड़े पैमाने पर बिना मान्यता के कोई उत्पाद बिकता है, तो उसके पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अधिकारियों के निर्देश और कंपनियों को दी गई सख्त चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने तुरंत प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। सीसीपीए ने अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से 'साइक्लोसिनोन' हर्बीसाइड की बिक्री और उससे जुड़े सभी विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से हटा लें। इसके साथ ही प्राधिकरण ने तीनों कंपनियों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने पूरे स्टॉक और लिस्टिंग का अनिवार्य रूप से स्व-ऑडिट (Self-Audit) करें।
स्व-ऑडिट का यह आदेश इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है ताकि ई-कॉमर्स कंपनियां खुद यह पहचान सकें कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसे कौन-कौन से उत्पाद बिक रहे हैं जो देश के मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करते हैं या जिनसे सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। प्राधिकरण ने इन सभी कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे इस आदेश के मिलने के मात्र पंद्रह दिनों के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) हर हाल में जमा करें। यदि तय समयसीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो भविष्य में और भी ज्यादा कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना इन कंपनियों को करना पड़ सकता है।
आम उपभोक्ताओं और किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी
यह पूरा मामला देश के उन लाखों आम उपभोक्ताओं और किसानों के लिए भी एक बड़ी सीख है जो आज के समय में आंख मूंदकर ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर भरोसा कर लेते हैं। इंटरनेट के दौर में घर बैठे सामान मंगाना जितना आसान हो गया है, उतनी ही बड़ी चुनौतियां डिजिटल सुरक्षा और उत्पादों की प्रमाणिकता को लेकर खड़ी हो रही हैं। कई बार थर्ड-पार्टी सेलर्स नियमों को ताक पर रखकर ऐसे सामान ऑनलाइन बेच देते हैं, जिनका इस्तेमाल करना कानूनन अपराध या खतरनाक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि-रसायनों और कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर सरकार का यह कड़ा रुख आने वाले दिनों में ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक मजबूत नजीर बनेगा। जब तक सरकार और नियामक संस्थाएं इस तरह की मनमानी पर लगाम नहीं कसतीं, तब तक आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने की गुंजाइश बनी रहती है। अब देखना यह होगा कि ये बड़ी तकनीकी और ई-कॉमर्स कंपनियां सीसीपीए के इस निर्देश के बाद अपने प्लेटफॉर्म्स पर किस तरह की सुरक्षा नीतियां लागू करती हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या पुख्ता कदम उठाए जाते हैं।
"ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिना वैधानिक अनुमति और सक्रिय रासायनिक तत्वों की पूरी जानकारी के बिना कृषि-रसायनों की बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपभोक्ता सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ा जुर्माना और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।" — केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)








