राजनीतिक दबाव समूह के रूप में CJP की अनूठी कार्यशैली और भविष्य के विकल्प
देश के राजनीतिक गलियारों में हाल ही में चर्चा का केंद्र बनी कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने अपनी भविष्य की रणनीतियों को लेकर साफ रुख स्पष्ट किया है। संगठन के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि चुनावी राजनीति से बाहर रहकर सरकारों पर वैचारिक और जमीनी दबाव बनाने का उनका मौजूदा तरीका काफी असरदार साबित हुआ है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आने वाले समय में परिस्थितियों के अनुसार पार्टी चुनावी मैदान में उतरने का विकल्प भी खुला रख रही है।
रांका का मानना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और हारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं और बुनियादी अधिकारों की रक्षा से भी जुड़ा है। हवा, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं सीधे तौर पर शासन की नीतियों से जुड़ी होती हैं। इसलिए CJP का मुख्य उद्देश्य इन व्यवस्थाओं में सुधार लाने के लिए सत्ता में बैठे लोगों को निरंतर जवाबदेह बनाना है।
संगठन के नेताओं का यह भी कहना है कि वे किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते हैं। आज की तारीख में स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में उनकी पहचान मजबूत हुई है, लेकिन साल-दो साल बाद राजनीतिक परिस्थितियां क्या रुख लेंगी, इस बारे में जनता के सामने स्पष्टता रखना और किसी भी संभावना पर पूर्ण विराम न लगाना ही उनकी रणनीति का हिस्सा है।
संबंधित खबरें
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन और SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
शिक्षा सुधार और 'स्कूल ठीक करो' अभियान के बाद CJP ने अब अपना पूरा ध्यान चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर केंद्रित कर दिया है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आगामी दो अक्टूबर से देश भर में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
CJP ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR अभियान पर भी तीखा विरोध जताया है। संगठन का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे योग्य नागरिकों की है जो वास्तव में वैध मतदाता हैं। रांका ने आरोप लगाया कि पात्रता साबित करने का बोझ गरीब और आम वर्ग के लोगों पर भारी पड़ रहा है, जिन्हें अपने अधिकार बचाने के लिए बार-बार ट्रिब्यूनल के चक्कर काटने और अपनी रोजी-रोटी गंवानी पड़ती है।
संगठन का तर्क है कि यदि चुनाव प्रक्रिया और सूचियों की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े हो जाएं और चुनावी नतीजे जनता के वास्तविक असंतोष को प्रतिबिंबित न कर सकें, तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव की हर उम्मीद बेमानी हो जाती है.
लखनऊ पहुंचीं लीगल अफेयर्स हेड रतना सिंह, वकीलों को जोड़ने की तैयारी
CJP के अभियानों को कानूनी संबल देने के लिए संगठन ने देशव्यापी स्तर पर लीगल एड नेटवर्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसी सिलसिले में संगठन की लीगल अफेयर्स हेड रतना सिंह ने हाल ही में लखनऊ का दौरा किया और वहां स्थानीय वकीलों तथा बुद्धिजीवियों से संवाद किया। राजधानी के एक गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार आम नागरिक कानूनी कार्रवाई या परेशानियों के डर से अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पाते हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए CJP ने एक डिजिटल लीगल एड प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और पीड़ितों को मुफ्त या सुलभ कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के वकीलों से इस मुहिम में जुड़ने की अपील की गई है ताकि आंदोलनों के दौरान कानूनी मोर्चे पर किसी भी कार्यकर्ता को कठिनाई का सामना न करना पड़े।
आम आदमी पार्टी से पुराने रिश्तों और निष्पक्षता पर खुलकर बोले नेता
CJP के कई प्रमुख सदस्यों का अतीत में आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ाव रहा है, जिसको लेकर अक्सर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठाए जाते हैं। सह-संयोजक आशुतोष रांका और संस्थापक अभिजीत दिपके के AAP से पुराने संबंध रहे हैं। इन सवालों का जवाब देते हुए रांका ने पूरी पारदर्शिता बरती और कहा कि उन्होंने कभी भी अपने पुराने राजनीतिक सफर या विचारों को छिपाया नहीं है।
रांका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी पुरानी भूमिकाओं और पार्टी के लिए किए गए कार्यों को लेकर पूरी तरह खुले रहे हैं, लेकिन वर्तमान में CJP एक पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष राजनीतिक ताकत के रूप में काम कर रही है। उनका यह भी कहना था कि किसी व्यक्ति का अतीत में किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना उसे आज शिक्षा, स्वास्थ्य या जनहित के मुद्दों पर काम करने से अयोग्य नहीं ठहरा सकता। CJP ने अपनी कार्यशैली से यह साबित करने का प्रयास किया है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त होकर स्वतंत्र एजेंडे पर आगे बढ़ रही है।
"हम एक स्वतंत्र दबाव बनाने वाले समूह के तौर पर देश में कई चीजें बदलने में सफल रहे हैं। इसलिए अभी हम इसी तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं। लेकिन मुझे नहीं पता कि एक साल बाद या दो साल बाद परिस्थितियां क्या होंगी, इसलिए हमारे लिए कभी भी पूरी तरह ‘नहीं’ नहीं है।" — आशुतोष रांका, सह-संयोजक, कॉकरोच जनता पार्टी
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक राह
कॉकरोच जनता पार्टी का यह उभरता हुआ मॉडल पारंपरिक राजनीति से हटकर दबाव समूह की राजनीति का एक नया प्रयोग माना जा रहा है। एक तरफ जहां वे नीतिगत मुद्दों जैसे शिक्षा और चुनाव सुधारों पर सीधे सरकार को घेर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वकीलों का नेटवर्क तैयार कर कानूनी सुरक्षा कवच भी मजबूत कर रहे हैं। आने वाले समय में यह दबाव समूह चुनावी राजनीति की मुख्य धारा में प्रवेश करता है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल उनके तेवर यह बता रहे हैं कि वे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।




