नई दिल्ली और पुणे से हमारे फील्ड ब्यूरो की खास ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, देश का चुनाव आयोग इस समय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही मोर्चों पर सुर्खियों में बना हुआ है। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके साथी चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के कामकाज को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने महाराष्ट्र के पुणे शहर में चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर भारतीय चुनाव प्रणाली को एक नया सम्मान मिला है। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सियासत में एक बार फिर से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है, जिस पर हर राजनीतिक दल की पैनी नजर बनी हुई है।
पुणे शहर में बीते दिन कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला और उनके इस्तीफे की मांग तक कर डाली। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ खास राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाया जा रहा है और आम नागरिकों के मतदान अधिकारों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और स्थानीय पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए कड़े बंदोबस्त किए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों और हालिया राजनीतिक बयानों के चलते देश की सियासत का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र संवैधानिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर पड़ता दिख रहा है.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बड़ी जिम्मेदारी
एक तरफ जहां देश के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राजनीतिक दलों की तरफ से विरोध के स्वर उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक मंच पर भारत की साख को मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। आधिकारिकू सूत्रों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को वर्ष 2026 के लिए 'अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन सहायता संस्थान' यानी इंटरनेशनल IDEA के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने के लिए चुना गया है। आकाशवाणी न्यूज़ और डीडी न्यूज़ से मिली जानकारी के मुताबिक, यह नियुक्ति पूरी दुनिया में भारतीय चुनाव प्रणाली के विशाल अनुभव और लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को स्वीकार करती है। इस अंतरराष्ट्रीय संगठन का मुख्य काम दुनिया भर में लोकतंत्र को मजबूत करना और पारदर्शी चुनाव कराने में देशों की मदद करना होता है, ऐसे में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का इस पद पर चुना जाना देश के लिए एक गर्व का विषय माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप जैसे वैश्विक नेताओं और विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में भी हाल के दिनों में भारतीय चुनाव प्रणाली की विशालता और इसके प्रबंधन की तारीफ की गई है कि कैसे भारत इतने बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न कराता है। हालांकि, इन अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के बीच घरेलू मोर्चों पर विपक्षी दलों के तीखे तेवर और विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। स्थानीय स्तर पर हो रहे इन प्रदर्शनों से यह साफ जाहिर होता है कि चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज को लेकर राजनीतिक दलों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है, जिसे शांत करने के लिए आयोग लगातार अपनी पारदर्शी कार्यशैली को जनता के सामने रख रहा है।
संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और आगे की राह
भारतीय लोकतंत्र की मजबूती में चुनाव आयोग की भूमिका हमेशा से रीढ़ की हड्डी जैसी रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम यह बताते हैं कि इस स्वतंत्र संस्था को देश के भीतर किस तरह के राजनीतिक दबावों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। पुणे में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही इस रस्साकशी में संवैधानिक संस्थाओं को केंद्र में लाना लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है। आयोग के शीर्ष अधिकारियों का यह दायित्व बनता है कि वे सभी राजनीतिक दलों की शिकायतों को सुनें और अपनी निष्पक्षता को लेकर जनता के मन में बैठे किसी भी तरह के संदेह को पूरी तरह से दूर करें, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता हमेशा बरकरार रहे।
दूसरी तरफ, वर्ष 2026 के लिए इंटरनेशनल IDEA के अध्यक्ष के रूप में ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल भारत को वैश्विक मंच पर लोकतांत्रिक मूल्यों का नेतृत्व करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। देश की आम जनता और राजनीतिक जानकारों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग घरेलू राजनीतिक विरोधों से कैसे निपटता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम किस प्रकार ऊंचा करता है। द फ्रीलान्स की इस जमीनी पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के फैसले और प्रशासनिक कदम देश की राजनीति की दिशा तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे, जिन पर हमारी टीम की लगातार पैनी नजर बनी रहेगी।




