अपना खुद का मकान खरीदना हर मध्यमवर्गीय परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है। जीवनभर की गाढ़ी कमाई जोड़ने के बाद भी कई बार लोग बड़े महानगरों या अपने शहर में घर खरीदने के लिए बैंक कर्ज का सहारा लेते हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि लोन की ब्याज दरें कितनी कम हैं, क्योंकि ब्याज दरों का सीधा असर आपकी मासिक किस्त यानी ईएमआई पर पड़ता है। वर्तमान समय में बैंकिंग सेक्टर में कड़ा मुकाबला चल रहा है, जिसके चलते कई प्रमुख वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों को बेहद आकर्षक और किफायती दरों पर होम लोन उपलब्ध करा रहे हैं। यदि आप भी आने वाले दिनों में जमीन खरीदने या नया फ्लैट बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो यह सही समय है जब आपको बाजार में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की तुलना कर लेनी चाहिए।
सस्ते होम लोन की तलाश में हैं तो जानें क्या हैं विकल्प
आमतौर पर होम लोन लंबी अवधि के लिए लिया जाने वाला कर्ज होता है, जो 15 से 30 साल तक चल सकता है। ऐसे में यदि ब्याज दर में 0.5 प्रतिशत का भी अंतर आ जाए, तो कुल भुगतान के दौरान लाखों रुपये की बचत हो सकती है। आज के समय में कई बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर दे रहे हैं। कुछ बैंक महिलाओं के लिए विशेष रियायतें भी दे रहे हैं, जिससे लोन की कुल लागत और कम हो जाती है। इसके अलावा, जिन लोगों का सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर बेहतरीन होता है, उन्हें बैंक सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज देने को तैयार रहते हैं।
वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि लोन के लिए आवेदन करने से पहले केवल ब्याज दर को ही पैमाना नहीं बनाना चाहिए। बैंक द्वारा ली जाने वाली प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, वैल्यूएशन फीस और प्री-पेमेंट पेनल्टी जैसे छुपे हुए शुल्कों की भी पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है। कई बार बैंक शुरुआती विज्ञापन में बहुत कम ब्याज दर दिखाते हैं, लेकिन अन्य चार्जेस जोड़कर कुल खर्च बढ़ जाता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करने के बाद ही किसी बैंक का चुनाव किया जाए।
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क्रेडिट स्कोर का होम लोन पर पड़ता है सीधा असर
यदि आपका सिबिल स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो आपके लिए बैंकों के दरवाजे सबसे कम ब्याज दरों के साथ खुल जाते हैं। बैंक उन ग्राहकों को प्राथमिकता देते हैं जिनका पुराना वित्तीय इतिहास साफ-सुथरा रहा है और जिन्होंने कभी समय पर लोन चुकाने में चूक नहीं की है। कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को या तो लोन मिलने में दिक्कत आती है या फिर उन्हें अधिक ब्याज दर चुकानी पड़ती है। इसलिए घर खरीदने का मन बनाने से कम से कम छह महीने पहले अपने सिबिल स्कोर को सुधारने पर काम शुरू कर देना चाहिए। समय पर क्रेडिट कार्ड के बिल भरना और पुराने कर्जों को समय पर चुकाना इस दिशा में पहला कदम है।
इसके अलावा, आपकी आय का स्तर और नौकरी की स्थिरता भी बहुत मायने रखती है। सरकारी नौकरीपेशा लोगों या प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को बैंक आसानी से और कम कागजी कार्रवाई के साथ होम लोन दे देते हैं। वहीं, स्वरोजगार या फ्रीलांसिंग करने वाले लोगों को अपने आईटीआर और बिजनेस टर्नओवर के दस्तावेज मजबूत दिखाने पड़ते हैं। बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोन लेने वाला व्यक्ति भविष्य में बिना किसी परेशानी के नियमित रूप से ईएमआई चुका सके।
ब्याज दरों की तुलना करना क्यों है बेहद जरूरी
बाजार में उपलब्ध सभी बैंकों की होम लोन नीतियों का बारीकी से अध्ययन करना हर समझदार खरीदार का पहला कर्तव्य होना चाहिए। फ्लोटिंग रेट और फिक्स्ड रेट ब्याज दरों के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। आजकल ज्यादातर लोग फ्लोटिंग रेट चुनते हैं क्योंकि इसमें रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के अनुसार दरों में बदलाव का लाभ मिल सकता है। जब बाजार में ब्याज दरें घटती हैं, तो फ्लोटिंग रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई स्वतः कम हो जाती है। इसके विपरीत, फिक्स्ड रेट में पूरी अवधि के दौरान ब्याज दर एक समान बनी रहती है, चाहे बाजार में कितनी भी उतार-चढ़ाव क्यों न आ जाए।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोन लेते समय हमेशा मार्जिन मनी यानी डाउन पेमेंट की तैयारी भी ठोस तरीके से रखनी चाहिए। बैंक अमूल्य संपत्ति के कुल मूल्य का 75 से 85 प्रतिशत हिस्सा ही कर्ज के रूप में देते हैं, बाकी का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा आपको अपनी जेब से लगाना होता है। यदि आपके पास पर्याप्त डाउन पेमेंट है, तो आपको कम राशि के लिए लोन लेना होगा और परिणामस्वरूप ब्याज का बोझ भी कम रहेगा।
"होम लोन का चयन करते समय केवल शुरुआती विज्ञापनों पर भरोसा न करें। छुपे हुए शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और रीपेमेंट के नियमों को अच्छी तरह समझ लें, तभी लंबी अवधि में आपकी जेब पर कम असर पड़ेगा।" — वित्तीय सलाहकार, पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट
लोन चुकाने की योजना और समय से पहले भुगतान के लाभ
एक बार होम लोन पास हो जाने और ईएमआई शुरू होने के बाद, आपको अपने बजट को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहिए। हर महीने समय पर किस्त चुकाने से आपका सिबिल स्कोर मजबूत होता है, जो भविष्य में किसी अन्य वित्तीय जरूरत के समय काम आता है। इसके अलावा, जब भी आपके पास अतिरिक्त धन आए जैसे कि सालाना बोनस, इंसेंटिव या निवेश से मिला रिटर्न, तो आपको उसका एक हिस्सा होम लोन के प्री-पेमेंट के रूप में उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से मूलधन तेजी से कम होता है और लोन की कुल अवधि काफी घट जाती है, जिससे बैंक को जाने वाले ब्याज के रूप में हजारों-लाखों रुपये की बचत होती है।
अंत में, घर खरीदना केवल एक वित्तीय निवेश नहीं है, बल्कि यह परिवार की मानसिक शांति और सुरक्षा से जुड़ा हुआ फैसला है। बाजार में उपलब्ध विभिन्न बैंकिंग ऑफर्स की तुलना करें, अपनी वित्तीय क्षमता का सही आकलन करें और फिर एक ठोस निर्णय लें ताकि आपका आशियाना खुशी का जरिया बने, न कि किसी वित्तीय तनाव का कारण।





