नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में इन दिनों राजनीतिक हलचल काफी तेज है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत बड़ा और अहम बयान सामने आया है। सीजेआई सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के हर वकील को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा कानूनी अधिकार है। अदालत ने माना है कि अपनी बात शांति से रखना हर नागरिक का मौलिक हक है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब हाल ही में कई राजनीतिक दलों के नेताओं और वकीलों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलकर अपनी बात रखी। राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं का कहना है कि सरकार और पुलिस मिलकर आम लोगों और वकीलों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
वकीलों और छात्रों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात उठी कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दे रही है। पुलिस का तर्क कानून व्यवस्था बनाए रखने का है, लेकिन वकीलों का पक्ष है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकना उनके अधिकारों का हनन है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करने की पूरी तैयारी दिखाई है। अदालत का यह मानना है कि लोकतंत्र में विरोध जताने का रास्ता बंद नहीं किया जा सकता है, बशर्ते वह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण हो।
इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन ने भी भारत में हो रही पुलिस कार्रवाई और नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाए हैं। यूएन ने चिंता जताई है कि लोकतांत्रिक देशों में विरोध करने वालों को इस तरह रोकना सही नहीं है। इन सब सवालों के बीच सीजेआई का यह बयान बहुत मायने रखता है, क्योंकि इसने प्रदर्शनकारियों को एक नई कानूनी ताकत दे दी है।
सुरक्षा और न्यायपालिका की भूमिका पर बड़ा भरोसा
दैनिक भास्कर और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीजेआई ने यह भी साफ कर दिया है कि सिर्फ वकील ही नहीं, बल्कि देश के छात्रों को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है। अगर प्रशासन या कोई अन्य एजेंसी उनके अधिकारों को कुचलने की कोशिश करेगी, तो न्यायपालिका उनकी सुरक्षा के लिए आगे आएगी। सीजेआई ने कहा कि देश के संविधान ने हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी दी है, और अदालत इसकी रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार खड़ी है।
जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस बल जगह-जगह तैनात है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए कड़ी चौकसी बरती जा रही है। राजनीतिक दलों का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम जनता भी इस बात पर नजर गड़ाए बैठी है कि सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में दिल्ली पुलिस और प्रशासन क्या जवाब देता है।
आगे की कानूनी लड़ाई और राजनीतिक सरगर्मी
आने वाले दिनों में इस मामले पर अदालत में तीखी बहस होने की पूरी उम्मीद है। एक तरफ सरकार और पुलिस अपनी सुरक्षा दलीलों के साथ खड़ी है, तो दूसरी तरफ वकील और विपक्षी दल अपने मौलिक अधिकारों की मांग पर अड़े हैं। सीजेआई के इस बयान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन की अनुमति देने के नियमों में कुछ ढील देती है या नहीं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की हर बड़ी अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है।






