नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के भीतर अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए एक औपचारिक याचिका दायर की गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। खास बात यह है कि इस याचिका में देश के दो बड़े विपक्षी नेताओं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम भी शामिल किया गया है, जिसके बाद से इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक टिप्पणी को आधार बनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखा हमला बोला गया था। केरल कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से किए गए उस पोस्ट में सीजेआई से इस्तीफे तक की मांग कर डाली गई थी और उनके खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इस पोस्ट के सामने आने के बाद कानूनी जानकारों और वकीलों के एक वर्ग ने इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई, जिसके परिणामस्वरूप अब यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच चुकी है।
केरल कांग्रेस के पोस्ट और इस्तीफे की मांग पर गरमाई सियासत
केरल कांग्रेस के उस विवादित पोस्ट के बाद से ही देश की राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई थी। कांग्रेस इकाई ने सीजेआई की एक टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा था कि इस तरह की बातें लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय प्रणाली के अनुकूल नहीं हैं। राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के बयानों ने इस मामले को तूल दे दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में इसकी चर्चा होने लगी। अब चूंकि याचिका में विपक्षी दलों के शीर्ष चेहरों के नाम भी जोड़े गए हैं, इसलिए मामला केवल एक कानूनी अवमानना तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह पूरी तरह से एक बड़े राजनीतिक घमासान का रूप ले चुका है।
याचिकाकर्ताओं का यह तर्क है कि देश के मुख्य न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाजी और सोशल मीडिया कैंपेन चलाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने की एक सुनियोजित कोशिश है। उनका मानना है कि जब राजनीतिक दल या उनके नेता अदालती फैसलों या न्यायाधीशों की टिप्पणियों पर व्यक्तिगत हमले करने लगते हैं, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठने का खतरा पैदा हो जाता है। इसी को आधार बनाकर अदालत से सख्त कदम उठाने और अवमानना कानून के तहत दोषियों पर शिकंजा कसने की गुहार लगाई गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
शीर्ष अदालत के समक्ष अब क्या हैं कानूनी विकल्प
सुप्रीम कोर्ट के नियम और भारत के संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अदालत के पास अपनी अवमानना करने वालों को सजा देने का असीमित अधिकार है। अब जबकि यह याचिका आधिकारिक रूप से दायर कर दी गई है, तो अदालत को यह तय करना होगा कि इस मामले में शुरुआती सुनवाई की जाए या नहीं। यदि कोर्ट याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करता है, तो जिन नेताओं और राजनीतिक इकाइयों के नाम इसमें शामिल हैं, उन्हें अदालत के सामने अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, इस मामले पर देश भर के कानूनी विशेषज्ञों की नजर टिकी हुई है कि अदालत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की गरिमा के बीच संतुलन बनाते हुए क्या रुख अपनाती है। एक तरफ जहां विपक्षी दल इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यायपालिका के सम्मान को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की वकालत करने वाले लोग इस याचिका को पूरी तरह से उचित ठहरा रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में इस याचिका पर होने वाली सुनवाई देश की राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति
इस ताजा कानूनी घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों के खेमे में भी मंथन का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार यह आंकलन करने में जुटे हैं कि इस याचिका का राजनीतिक रूप से क्या असर पड़ सकता है और इसे किस प्रकार कानूनी मंच पर चुनौती दी जाए। हालांकि अभी तक दोनों ही दलों की तरफ से कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे कानूनी रूप से इसका सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जनता के बीच भी इस बात की चर्चा है कि क्या अदालतों और न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों पर अब लगाम लग पाएगी।




