नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने देश के तमाम विपक्षी दलों के नेताओं को पूरी तरह सतर्क रहने को कह दिया है। उन्होंने अपने संदेश में साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर सभी नेता चौबीस घंटे के भीतर दिल्ली में आकर इकट्ठा हो जाएं। इस अचानक आए संदेश से राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। सभी दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में किसी बड़े प्रदर्शन या साझा रणनीति का ऐलान हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी के खिलाफ विपक्ष की नाराजगी सबसे बड़ी वजह बनी हुई है। विपक्षी दल अब चुनाव आयोग के रवैये के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आर-पार की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। जंतर-मंतर पर एक बड़ा साझा आंदोलन खड़ा करने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें देश भर के तमाम छोटे-बड़े विपक्षी दल एक मंच पर नजर आएंगे। इसी साझा अभियान को धार देने के लिए राहुल गांधी ने सभी दलों के नेताओं से अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर तुरंत एक्शन मोड में आने को कहा है।
जंतर-मंतर पर साझा आंदोलन की बन रही है पुख्ता रणनीति
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जल्द ही एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। विपक्ष के तमाम नेता मिलकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ हुंकार भरने की तैयारी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ समन्वय बनाने के लिए कांग्रेस लगातार बैकचैनल बातचीत कर रही है। हालांकि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अंदरखाने कुछ दलों के तेवर अभी भी अलग हैं। आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देकर कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधा है। इसके बावजूद साझा मोर्चे के नेता आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक संयुक्त कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हुए हैं।
दूसरी तरफ सत्ताधारी दल ने इस पूरे विपक्ष के जमावड़े पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से चौदह विपक्षी पार्टियों के गठबंधन पर बड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा कि महज आठ हजार लोगों की भीड़ जुटाकर राहुल गांधी देश की असली आवाज नहीं बन सकते हैं। भाजपा का साफ कहना है कि जनता देश में स्थिरता और विकास चाहती है, जबकि विपक्ष केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए बयानबाजी कर रहा है। सत्ता पक्ष के इस पलटवार के बाद राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है और दोनों तरफ से जुबानी जंग तेज हो गई है।
सीईसी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाहट की तैयारी
सड़क की लड़ाई के साथ-साथ विपक्षी दल कानूनी विकल्पों पर भी बहुत बारीकी से काम कर रहे हैं। नागरिक अधिकार संगठनों और विपक्षी वकीलों की टीम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अदालत में मजबूत याचिका दायर करने की रूपरेखा बना रही है। दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर भी प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। अधिकार समूहों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति जल्द से जल्द दें। यदि प्रशासन ने अनुमति देने में देरी की, तो मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।
मैदान पर स्थिति यह है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह मुस्तैद हो चुकी हैं। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। राहुल गांधी का यह ताजा निर्देश इस बात का संकेत है कि विपक्ष अब किसी भी तरह की सुस्ती के मूड में नहीं है। आने वाले चौबीस से अड़तालीस घंटे देश की राजनीति के लिहाज से बहुत अहम साबित होने वाले हैं। जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई सभी विपक्षी दल मिलकर कोई ठोस और बड़ा राजनीतिक कदम उठा पाते हैं या यह सिर्फ कागजी बैठकों तक ही सीमित रह जाता है।
सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बढ़ती जा रही है तकरार
देश की सियासत में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। एक तरफ जहां कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सरकार को घेरने के लिए सड़क पर उतरने की जिद पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी इसे जनता का अपमान बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के बाहर और भीतर दोनों जगहों पर जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है। राहुल गांधी का यह चौबीस घंटे का अल्टीमेटम इस बात का सबूत है कि विपक्षी खेमा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुका है और केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।




