नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्ट। देश की सर्वोच्च अदालत के बाहर इन दिनों राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और वकीलों के हंगामे को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी एससीबीए की तरफ से इस मामले को तुरंत मुख्य न्यायाधीश के सामने उठाया गया। स्थिति यह बन गई थी कि पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कुछ वकीलों को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद वकीलों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी जिसे लेकर अदालत में तुरंत सुनवाई की मांग की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया और खुली अदालत में इस बात पर जोर दिया। सीजेआई ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत किसी भी तरह के राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों या बाहरी दबावों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वकीलों के हितों की रक्षा और कानून के दायरे में रहकर न्याय सुनिश्चित करना अदालत की प्राथमिकता है। अदालत ने साफ किया कि लोकतांत्रिक देश में विरोध का अधिकार है लेकिन अदालती कामकाज और रास्तों को बंद करना गंभीर चिंता का विषय है।
हिरासत में लिए गए वकीलों की जल्द रिहाई के निर्देश
पुलिस द्वारा वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर जैसे ही सुप्रीम कोर्ट पहुँची, वकीलों में खलबली मच गई। एससीबीए के सदस्यों ने तुरंत मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने इस ज्यादती का जिक्र किया और आपातकालीन सुनवाई की गुहार लगाई। इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। उन्होंने निर्देश दिए कि हिरासत में लिए गए सभी वकीलों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द रिहा किया जाए।
अदालत की इस सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस प्रशासन जल्द ही सभी वकीलों को रिहा कर देगा। वकीलों के संगठनों ने सीजेआई के इस कदम की सराहना की है और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रतीक बताया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना था कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था क्योंकि प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद होने पर भी जताई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट के पास स्थित मेट्रो स्टेशन को बंद किए जाने का मुद्दा भी गरमाया रहा। वकीलों और आम नागरिकों को हो रही भारी परेशानियों को देखते हुए एससीबीए ने कोर्ट को बताया कि मेट्रो स्टेशन बंद होने से लोगों को आने-जाने में बहुत दिक्कत हो रही है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगर दोपहर तक मेट्रो स्टेशन नहीं खोला गया तो गंभीर परिणाम होंगे और कोर्ट इस पर सख्त रुख अपनाएगा।
मुख्य न्यायाधीश के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और मेट्रो स्टेशन को दोबारा खोलने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अब अदालत के निर्देशों का पालन कराने में जुट गए हैं ताकि राजधानी में सामान्य स्थिति बहाल की जा सके और वकीलों का गुस्सा शांत हो सके।
बेंगलुरु दीक्षांत समारोह और छात्रों के विरोध का मामला
दूसरी तरफ, इसी से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल का दीक्षांत समारोह रद्द करना पड़ा है। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीजेआई सूर्यकांत को शामिल होना था, लेकिन छात्रों द्वारा किए जा रहे कड़े विरोध के चलते कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। देश भर के शिक्षण संस्थानों और अदालतों के बाहर इन दिनों लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन न्यायपालिका और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं।
'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस की कार्यप्रणाली, वकीलों के प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से जुड़े हर एक अपडेट को हम ग्राउंड जीरो से आप तक पहुँचाते रहेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों और वकीलों के बीच बातचीत के बाद अब हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।









