बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आज राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के बैनर तले भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। इस प्रदर्शन की अगुवाई पार्टी के नेता अभिजीत दीपके कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश में लोकतंत्र की हत्या करने के गंभीर आरोप लगाए। कार्यक्रम का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष मतदाता पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ आवाज उठाना था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान मंच से बोलते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और भीड़ से 'वोट चोर' के नारे भी लगवाए। दीपके ने देश में वन नेशन जैसी अवधारणाओं पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह आम जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
इस विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा और अहम एजेंडा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगना था। सीजेपी नेताओं का आरोप है कि देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता खतरे में पड़ गई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती बन चुका है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना बेहद जरूरी है।
इस विरोध प्रदर्शन में उस समय और ज्यादा भीड़ जुट गई जब जाने-माने यूट्यूबर ध्रुव राठी और प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज मंच पर पहुंचे। ध्रुव राठी ने अपने संबोधन में साफ किया कि वे इस लड़ाई में केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं बल्कि देश की व्यवस्था को सुधारने आए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हुए देश की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए। ध्रुव राठी ने कहा कि युवाओं को आगे आकर लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
प्रकाश राज और ध्रुव राठी के तीखे तेवर
दक्षिण भारतीय फिल्मों के मशहूर अभिनेता और बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले प्रकाश राज ने भी इस मंच से केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कलाकारों और बुद्धिजीवियों को अब चुप बैठने का कोई अधिकार नहीं है। प्रकाश राज ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि जब देश के संविधान पर आंच आती है, तो हर नागरिक का यह फर्ज बनता है कि वह सरकार से सीधे सवाल पूछे। उनके इस बयान पर वहां मौजूद समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं और सरकार विरोधी नारे लगाए।
बेंगलुरु पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। फ्रीडम पार्क के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। हालांकि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच किसी बड़ी झड़प की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन नेताओं के तीखे बयानों ने राज्य की राजनीति का पारा जरूर चढ़ा दिया है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां विपक्षी दल इस तरह के आयोजनों को जनता की आवाज बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे केवल राजनीतिक स्टंट करार दिया है। बेंगलुरु में हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने के पूरे संकेत दे दिए हैं। देश के तमाम मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी यह मुद्दा शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल बना हुआ है।







