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सावधान! सरकारी योजनाओं का झांसा देकर बैंक खाते हथिया रहा साइबर गिरोह, ऐसे हुआ बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

साइबर अपराधियों ने गरीब ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देकर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद इस बड़े सिंडिकेट के कई गहरे राज सामने आए हैं।
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26 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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सावधान! सरकारी योजनाओं का झांसा देकर बैंक खाते हथिया रहा साइबर गिरोह, ऐसे हुआ बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश
📷 सावधान! सरकारी योजनाओं का झांसा देकर बैंक खाते हथिया रहा साइबर गिरोह, ऐसे हुआ बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा और राशन जैसी योजनाओं का झांसा देकर गांवों में लगाए जाते थे फर्जी कैंप।
  • पीओएस एजेंटों और बैंक मित्रों की मिलीभगत से गरीबों के नाम पर निकाले जाते थे सिम कार्ड और खुलवाए जाते थे बैंक खाते।
  • मुख्य आरोपी महिला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई ठिकानों पर की छापेमारी।
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ग्रामीण इलाकों में फैलाया गया था ठगी का बड़ा जाल

देशभर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और अपराधी अब ठगी के नए-नए और शातिर तरीके अपना रहे हैं। आम और सीधे-साधे ग्रामीण लोगों को निशाना बनाने के लिए एक ऐसा ही खतरनाक सिंडिकेट सक्रिय था, जिसका अब पुलिस ने बड़ा भंडाफोड़ किया है। आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने गांव-गांव जाकर विशेष कैंप लगाने शुरू कर दिए थे। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाना और सिम कार्ड हासिल करना था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। गिरोह के सदस्य गांव की महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि कैंप के माध्यम से उनका सरकारी योजनाओं से जुड़ा हर रुका हुआ काम चुटकियों में पूरा हो जाएगा। इस झांसे में आकर ग्रामीण आसानी से इनके बहकावे में आ जाते थे और अनजाने में ही साइबर अपराधियों के इस बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बन जाते थे।

जब पुलिस ने इस मामले की परतों को टटोला, तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। शुरुआती जांच में पता चला कि इस प्रकार के कैंप सिर्फ एक या दो गांवों तक सीमित नहीं थे, बल्कि कई जिलों के दूर-दराज इलाकों में सुनियोजित ढंग से आयोजित किए जा रहे थे। अपराधियों ने गरीब जनता के भरोसे का फायदा उठाते हुए उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और आपराधिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रास्ते तैयार कर लिए।

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सरकारी योजनाओं का लालच देकर बुना जाता था जाल

आम जनता के बीच पैठ बनाने के लिए इन साइबर ठगों ने बेहद लुभावने हथकंडे अपनाए। किसी को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन का भरोसा दिया जाता था, तो किसी को मनरेगा जॉब कार्ड दिलवाने का वादा किया जाता था। इसके अलावा, शौचालय निर्माण के नाम पर मिलने वाली अनुदान राशि का लालच देकर भी लोगों को शिविरों में बुलाया जाता था। इन लोकलुभावन वादों के चक्कर में ग्रामीण महिलाएं और मजदूर वर्ग के लोग आसानी से इनके शिविरों तक पहुंच जाते थे।

शिविरों में पहुंचने वाले लोगों से सबसे पहले उनके जरूरी दस्तावेज लिए जाते थे। इसके बाद गिरोह में शामिल शातिर पीओएस एजेंट मौके पर ही नए सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे। इन सिम कार्ड्स को ग्रामीणों के नाम पर ही जारी कराया जाता था ताकि किसी को शक न हो। दस्तावेजों की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बैंक मित्रों की मदद से इन भोले-भाले लोगों को विभिन्न राष्ट्रीयकृत और अन्य बैंकों की स्थानीय शाखाओं में ले जाया जाता था, जहां उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।

इन खातों के खुलते ही खाताधारक को तो यह लगता था कि उनका काम हो गया है, लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता था। बैंक खातों के एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की डिटेल्स सीधे तौर पर साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती थीं। इन खातों का इस्तेमाल अवैध रूप से आने वाली ठगी की रकम को इधर-उزار ट्रांसफर करने और खपाने के लिए किया जाता था, जिससे असली सरगना आसानी से कानून की पकड़ से दूर रह सकें।

किन बैंकों का होता था इस्तेमाल और कैसे हुआ खुलासा

पुलिस की तकनीकी जांच और फील्ड सर्विलांस में यह बात साफ हो गई है कि इस सिंडिकेट ने कई बड़े बैंकों की शाखाओं को अपने इस काले कारोबार का जरिया बनाया था। अपराधियों द्वारा मुख्य रूप से केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक की विभिन्न स्थानीय शाखाओं में ये संदिग्ध खाते खुलवाए गए थे। इन बैंकों में खोले गए 500 से अधिक खातों की सूची मिलने के बाद जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

इस पूरे मामले की सुई तब घूमी जब सुरक्षा इकाइयों ने साइबर अपराध के मामलों की गहराई से पड़ताल शुरू की। साइबर थाना पुलिस द्वारा इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज किया गया और साक्ष्यों के आधार पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की गई। इसी कड़ी में पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसके आधार पर बाढ़ के सलेमपुर इलाके से सीता कुमारी नामक एक महिला को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी ने इस पूरे आपराधिक नेटवर्क के दरवाजे खोल दिए।

गिरफ्तार महिला से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस गिरोह के संचालन से जुड़े कई अहम राज उगले। उसने स्वीकार किया कि उसने और उसके सहयोगियों ने मिलकर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाए हैं। महिला के खुलासे के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमों ने अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया और अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई।

छापेमारी में मिले डिजिटल सबूत और फरार आरोपियों की तलाश

महिला आरोपी से मिली पुख्ता जानकारियों के आधार पर पुलिस ने पड़ोसी जिलों में भी दबिश देना शुरू कर दिया। इसी क्रम में एक स्थानीय जनप्रतिनिधि यानी सरपंच और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर पुलिस ने औचक छापेमारी की। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से कुछ ही समय पहले शातिर आरोपी वहां से फरार होने में कामयाब हो गए, लेकिन उनके ठिकानों से जो बरामदगी हुई, उसने पुलिस को हैरान कर दिया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामान और डिजिटल उपकरण जब्त किए। इनमें 12 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, एक बायोमेट्रिक डिवाइस, दो बैंक पासबुक, दो एटीएम कार्ड, एक चेकबुक और कैलकुलेटर जैसी सामग्रियां शामिल थीं। ये सभी चीजें इस बात का पुख्ता सबूत थीं कि वहां बैठकर किस बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का संचालन किया जा रहा था।

"साइबर ठगी के इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हमारी प्राथमिकता था। ग्रामीण इलाकों में शिविर लगाकर इस तरह गरीबों के नाम पर खाते खुलवाना एक गंभीर अपराध है। इस मामले में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।" — साइबर थाना अधिकारी, पटना पुलिस

वर्तमान में पुलिस इन बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन खातों के जरिए अब तक कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ है और देश के किन-किन हिस्सों में बैठे साइबर ठगों तक यह पैसा पहुंचाया गया था। इसके साथ ही, उन बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में फर्जी और संदिग्ध खाते खुल पाना असंभव था।

आम नागरिकों के लिए बड़ी सीख और सुरक्षा के उपाय

यह घटना देश के हर आम नागरिक के लिए एक बड़ी चेतावनी और सीख है। आज के समय में साइबर अपराधी आम लोगों की सरलता और लाचारी का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसा रहे हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था द्वारा यदि आपको सरकारी योजनाओं का लालच देकर बैंक खाता खुलवाने या अपना सिम कार्ड देने के लिए कहा जाए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को दें।

विशेषज्ञों का कहना है कि अपने बैंक खाते, एटीएम पिन, ओटीपी या आधार कार्ड जैसी गोपनीय जानकारियां कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। थोड़ा सा लालच या लापरवाही आपको किसी बहुत बड़े कानूनी पचड़े में फंसा सकती है। पुलिस और प्रशासन भी लगातार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे इस तरह के अवैध कैंपों और प्रलोभनों से पूरी तरह दूर रहें।

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