नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीती रात राजनीति का पारा अचानक चढ़ गया। महिला कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों के मामले में पुलिस द्वारा तुरंत एफआईआर दर्ज न करने से नाराज छात्र संगठन एनएसयूआई के सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाया। विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग थाने को घेर लिया और न्याय की मांग को लेकर नारे लगाए। यह पूरा मामला रात के अंधेरे में शुरू हुआ और सुबह तक एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया।
घटना की शुरुआत तब हुई जब एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपनी महिला साथियों पर हुए हमलों के दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों की तरफ से संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते संसद मार्ग थाने के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारी थाने के गेट पर ही धरने पर बैठ गए और रातभर नारेबाजी करते रहे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई।
संसद मार्ग थाने के बाहर आधी रात का हाई-वोल्टेज ड्रामा
रात के सन्नाटे में थाने के बाहर चल रहे इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को भी व्यस्त कर दिया। छात्र नेताओं का साफ कहना था कि जब तक पुलिस हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करती, तब तक उनका धरना खत्म नहीं होगा। कड़कड़ाती ठंड और रात के समय में भी सैकड़ों की संख्या में छात्र नेता और कार्यकर्ता थाने के बाहर डटे रहे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए युवा लगातार पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए थे।
तड़के सुबह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का फैसला किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और युवा कांग्रेस के नेता उदयभानु चिब समेत कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और रात के समय थाने के कामकाज में बाधा न आए, इसलिए यह कदम उठाना जरूरी था। हिरासत में लिए गए सभी लोगों को बसों में भरकर नजदीकी पुलिस ठिकानों पर ले जाया गया।
महिला कार्यकर्ताओं पर हमले और न्याय की मांग पर अड़े छात्र
हिरासत में लिए जाने के बाद भी छात्रों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एनएसयूआई के नेताओं का आरोप है कि दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रही महिलाओं को निशाना बनाया गया, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए अभी तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की है। संगठन का यह भी कहना है कि पुलिस का यह रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है और वे अपनी आवाज को दबाने नहीं देंगे। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस पूरी घटना के बाद से दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने भी छात्रों के समर्थन में बयान जारी किए हैं और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे पूरे मामले की कानूनी पहलुओं से जांच कर रहे हैं और नियमों के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और पुलिस अधिकारियों तथा छात्र नेताओं की प्रतिक्रियाओं की पुष्टि कर रही है।
अगला राजनीतिक कदम और प्रशासन की सतर्कता
इस ताजा विवाद के बाद राजधानी के प्रमुख राजनीतिक ठिकानों और छात्र संघ कार्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। छात्र संगठन आज दिन में एक बार फिर से बैठक कर सकते हैं ताकि अपनी आगे की रणनीति तय की जा सके। पुलिस और प्रशासन की यह कोशिश है कि स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रण में लाया जाए, ताकि शहर की सामान्य व्यवस्था पर कोई बुरा असर न पड़े।



