नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और सड़कों पर सुरक्षा बलों के लिए हालात इन दिनों बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। संसद और अन्य प्रमुख स्थानों पर विपक्षी दलों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला उस वक्त सामने आया जब एक ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवान को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद उस जवान ने अपनी आपबीती साझा की है, जिसने वर्दी पहनने वाले हर कर्मचारी की मानवीय स्थिति को उजागर कर दिया है।
जवान ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जब ड्यूटी के दौरान उस पर हमला हुआ और बाद में उसकी पत्नी का फोन आया, तो उसका दिल टूट गया। उसने कहा कि जब परिवार को उसकी चोटों के बारे में पता चलता है, तो उनका सेल्फ रेस्पेक्ट हर्ट होता है क्योंकि वे सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच होने वाली झड़पें कई बार इतनी हिंसक हो जाती हैं कि सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान जोखिम में डालकर स्थिति संभालनी पड़ती है।
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के उत्पीड़न पर एनएचआरसी सख्त
इस बीच राजधानी में ही जंतर-मंतर पर हुए एक अन्य विवाद ने मानवाधिकार आयोग का ध्यान खींचा है। हाल ही में जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनएचआरसी ने इस गंभीर घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले में पुलिस प्रशासन से दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता पर मंडराते इन खतरों को लेकर प्रेस संगठनों में भी भारी रोष देखा जा रहा है। जंतर-मंतर जैसी संवेदनशील जगहों पर जहां आए दिन प्रदर्शन और धरने होते हैं, वहां महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। एनएचआरसी के इस नोटिस के बाद अब दिल्ली पुलिस पर दबाव बढ़ गया है कि वह आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कानूनी कार्रवाई करे और अपनी जांच की रिपोर्ट समय पर सौंपे।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत-जापान के मजबूत रिश्ते
एक तरफ जहां देश की राजधानी में कानून व्यवस्था और प्रदर्शनों से जुड़े मामले सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिवंगत जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच पुराने और गहरे रिश्तों की यादें ताजा की गईं। शिंजो आबे को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे उनके प्रिय मित्र और एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने भारत और जापान के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था।
दूसरी ओर, कूटनीति के जानकारों के बीच भारत और अमेरिका के आगामी रणनीतिक प्लान को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ रक्षा और आर्थिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों देशों के इस साझा प्लान को लेकर पहले भी कुछ मोर्चों पर पूरी सफलता नहीं मिली थी, इसलिए इस बार रणनीतिक कदमों को बहुत सावधानी से उठाने की जरूरत है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और जापान जैसे भरोसेमंद सहयोगियों के साथ मजबूत रिश्ते देश के रणनीतिक हितों को साधने में बेहद मददगार साबित होंगे।




