देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जिसके साथ ही मौसमी बीमारियों ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर डेंगू और मलेरिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियां एक बार फिर से आम जनता की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों में इन दिनों बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जैसे-जैसे तापमान में उतार-चढ़ाव आ रहा है, वैसे-वैसे अस्पतालों की इमर्जेंसी और ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा लगातार ऊपर जा रहा है।
अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी, एक ही वार्ड में भर्ती हो रहे अलग-अलग मरीज
एक तरफ जहां डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं इस बढ़ते दबाव के आगे दम तोड़ती नजर आ रही हैं। कई प्रमुख सरकारी अस्पतालों के मेडिकल वार्डों में गंभीर लापरवाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। हालात यह हैं कि टीबी जैसी संक्रामक बीमारियों के मरीजों के साथ ही सामान्य वायरल और डेंगू के मरीजों को एक ही बड़े वार्ड में एक साथ भर्ती किया जा रहा है। इससे संक्रमण के और अधिक फैलने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
अस्पतालों में बिस्तरों (बेड्स) की भारी कमी होने के कारण मरीजों को उचित इलाज मिलने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि डॉक्टरों के पास मरीजों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है। आपातकालीन कक्ष यानी इमर्जेंसी वार्ड में आने वाले डेंगू संभावित मरीजों के लिए अलग से विशेष व्यवस्था का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है, जिससे परिजनों में भारी रोष व्याप्त है।
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बदलते मौसम और जलभराव से पनप रहा मच्छरों का प्रकोप
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में डेंगू और मलेरिया के फैलने का मुख्य कारण मच्छरों का तेजी से पनपना है। बारिश के बाद घरों के आसपास जमा होने वाला पानी, कूलरों, गमलों और पुराने टायरों में इकट्ठा हुआ साफ पानी एडीज मच्छर के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी कॉलोनियों तक हर तरफ डेंगू के संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद कई इलाकों में फॉगिंग और एंटी-larva का छिड़काव उस स्तर पर नहीं हो पा रहा है, जिसकी वर्तमान समय में सख्त जरूरत है। लोगों को खुद भी अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके आसपास पानी बिल्कुल भी न जमा हो पाए। थोड़ी सी भी लापरवाही पूरे परिवार को भारी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी: बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न खाएं दवा
बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय आने वाला हर साधारण बुखार भी डेंगू या मलेरिया का रूप ले सकता है, इसलिए किसी भी प्रकार के बुखार को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अस्पतालो में आने वाले प्रत्येक संदिग्ध मरीज के रक्त के नमूने की अनिवार्य रूप से जांच कराई जा रही है ताकि बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही पहचान की जा सके।
"मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण संक्रमण का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। कोई भी बुखार डेंगू या मलेरिया हो सकता है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें और बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी दवा खाने से पूरी तरह बचें। स्वस्थ होने के बाद ही मरीजों को घर भेजा जा रहा है।" — डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं मरीज, जेब पर पड़ रहा भारी असर
सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं की बदहाली और लंबी वेटिंग लिस्ट के चलते अधिकांश लोग मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का रुख करने के लिए विवश हैं। प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू के इलाज का खर्च आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। प्लेटलेट्स गिरने और बार-बार ब्लड टेस्ट कराने के चक्कर में मध्यम वर्ग और गरीब परिवार कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि हर नागरिक को समय पर मुफ्त और बेहतर इलाज मिल सके। केवल आंकड़ों को जारी कर देने से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कसावट लाना बेहद जरूरी है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय: आम जनता को बरतनी होगी विशेष सावधानी
जब तक मौसम पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता और सर्दियों की शुरुआत नहीं होती, तब तक डेंगू और मलेरिया का यह खतरा बना रहेगा। आम जनता को चाहिए कि वे पूरी बाजू के कपड़े पहनें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और अपने घरों के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए, तो इस जानलेवा बीमारी के प्रकोप से आसानी से बचा जा सकता है।




