डेंगू के मामलों में अचानक आया बड़ा उछाल
देशभर में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही मौसमी बीमारियों ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक ही दिन में डेंगू के 13 नए मामलों की पुष्टि की गई है। इन नए मामलों के सामने आने के बाद शहर में डेंगू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 154 पर पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के लिए यह आंकड़े चिंता का विषय बनते जा रहे हैं क्योंकि संक्रमण फैलने की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है।
अधिकारियों का कहना है कि सभी नए मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और किसी भी मरीज की हालत गंभीर होने की सूचना नहीं है। हालांकि, जिस तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल जरूर बन गया है। अस्पताल परिसरों में भी बुखार और डेंगू के लक्षणों वाले मरीजों की कतारें लंबी होने लगी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के बाद का यह समय मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है। रुके हुए पानी और साफ-सफाई की कमी के कारण डेंगू का लार्वा तेजी से विकसित होता है। यही वजह है कि सितंबर के महीने की शुरुआत से ही मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और अपने आसपास पानी बिल्कुल न जमा होने दें।
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पिछले 12 दिनों में सामने आए रिकॉर्ड मामले
आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा पिछले कुछ दिनों की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। सितंबर महीने के तीसरे हफ्ते से डेंगू के मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। पिछले महज 12 दिनों के भीतर ही शहर में 79 नए डेंगू मरीज मिल चुके हैं। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है और यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इन मामलों में कई ऐसे मरीज भी शामिल हैं जो मूल रूप से दूसरे जिलों के रहने वाले हैं। ये लोग इलाज कराने के लिए यहां आए थे और स्थानीय अस्पतालों में उनका इलाज चला। सरकारी पोर्टल पर नियमों के तहत अस्पतालों द्वारा इन मरीजों को भी स्थानीय आंकड़ों में दर्ज कर लिया गया है, जिससे कुल संख्या में इजाफा हुआ है। हालांकि, मलेरिया विभाग अब ऐसे सभी बाहरी मरीजों की एक अलग सूची तैयार कर रहा है ताकि उनके गृह जिलों के स्वास्थ्य विभागों को समय पर इसकी सूचना दी जा सके।
इस बीच, रैपिड किट से की गई जांच में पॉजिटिव पाए गए कई मामलों को भी आधिकारिक डेंगू मरीजों की सूची में जोड़ा गया है। इस साल अब तक डेंगू के अलावा मलेरिया के भी 41 मरीज मिल चुके हैं, जो यह बताता है कि केवल डेंगू ही नहीं बल्कि अन्य मच्छरजनित बीमारियां भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। जिला प्रशासन ने सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे बुखार के हर मरीज की अनिवार्य रूप से डेंगू और मलेरिया की जांच करें ताकि समय रहते बीमारी की पहचान हो सके।
स्वास्थ्य विभाग का विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान
बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। मच्छरजनित बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए आगामी एक अक्टूबर से एक व्यापक 'संचारी रोग नियंत्रण अभियान' शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और लार्वा नष्ट करने के लिए विशेष टीमें उतारी जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि जनसहयोग के बिना इस तरह की बीमारियों पर पूरी तरह काबू पाना मुमकिन नहीं है।
जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने इस पूरी स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा,
"डेंगू के मरीजों के घरों और उनके आसपास के इलाकों में युद्धस्तर पर दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके साथ ही, संक्रमित मरीजों के परिवार के अन्य सदस्यों से भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी अन्य व्यक्ति में भी बीमारी के शुरुआती लक्षण तो मौजूद नहीं हैं। जलभराव वाले स्थानों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है और एंटी लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।" — श्रुति कीर्ति वर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग की ये टीमें शहर के विभिन्न वार्डों और कॉलोनियों में जाकर कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों की जांच कर रही हैं। जहां कहीं भी पानी जमा मिलता है, उसे तुरंत खाली कराया जा रहा है और वहां एंटी लार्वा केमिकल डाला जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी घर या संस्थान में बार-बार कहने पर भी लार्वा मिलता है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां और बचाव के उपाय
डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आम लोग खुद सतर्क रहें। डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार यह सलाह दे रहे हैं कि जरा सी सावधानी से इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। घरों में पानी को लंबे समय तक इकट्ठा न होने दें और कूलर, फ्रिज की ट्रे तथा गमलों का पानी हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर बदलें।
इसके अलावा, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें। बाजार में मिलने वाले मच्छर भगाने वाले लोशन या क्रीम का इस्तेमाल करें ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके। यदि किसी को तेज बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें। किसी भी तरह की घरेलू दवा लेने से बचें और डॉक्टर की सलाह पर ही खून की जांच करवाएं।
प्रशासन की ओर से यह भी अपील की गई है कि लोग अपने आसपास के पार्कों और खुली जगहों पर पानी जमा न होने दें। नगर निगम की टीमों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नालियों की सफाई नियमित रूप से करें और फॉगिंग करवाएं। यदि जनता और प्रशासन मिलकर इन उपायों का सख्ती से पालन करें, तो इस खतरनाक बीमारी के प्रकोप को समय रहते रोका जा सकता है।





