पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुआ मर्मस्पर्शी हादसा
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी कल्पना किसी ने कभी सपने में भी नहीं की होगी। चंद घंटों के भीतर एक ही घर से एक के बाद एक कई अर्थियां उठने की इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मामला देवरिया जिले के गहिला-दुधैला गांव का है, जहां के निवासी और भारतीय सेना के सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह का चंडीगढ़ के पंचकूला में इलाज के दौरान निधन हो गया था। परिवार अपने वीर सैनिक को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा था और उनके पार्थिव शरीर के घर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, और फौजी को घर लाने निकले उनके अपने भी रास्ते में ही मौत के आगोश में समा गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेना में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात सत्यवान सिंह पिछले कुछ समय से गंभीर किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज चंडीगढ़ के एक चिकित्सा संस्थान में चल रहा था। परिवार के लोग लगातार उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन शनिवार को अचानक उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली। एक सैनिक की शहादत या सेवाकाल में निधन के बाद उसके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव लाकर अंतिम संस्कार किया जाना था। इस दुख की घड़ी में बड़े भाई रामसमुझ सिंह और परिवार के अन्य सदस्य चंडीगढ़ पहुंच गए थे ताकि वे अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर को सुरक्षित घर ला सकें।
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भाई को अकेला नहीं छोड़ना चाहा, पर खुद भी सफर से लौट आए
परिवार के करीबी सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, रामसमुझ सिंह और उनके छोटे भाई सत्यवान सिंह के बीच अगाध स्नेह था। डाक विभाग में पोस्टमास्टर के पद से जुड़े रामसमुझ अपने छोटे भाई से बेहद प्रेम करते थे। जब सत्यवान का निधन हुआ, तो बड़े भाई ने बिना एक पल गंवाए यह तय किया कि वे भाई के अंतिम सफर में अकेले नहीं रहेंगे। उन्होंने एंबुलेंस में ही बैठने का निर्णय लिया ताकि वे अपने छोटे भाई के पार्थिव शरीर की देखरेख करते हुए उसे सुरक्षित घर पहुंचा सकें। उनके साथ परिवार का 18 वर्षीय युवा बेटा गौरव सिंह भी मौजूद था, जो अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए साथ चल रहा था।
रविवार की सुबह जब यह एंबुलेंस चंडीगढ़ से देवरिया की तरफ बढ़ रही थी, तब किसी को यह आभास तक नहीं था कि यह सफर केवल एक पार्थिव शरीर को लाने का नहीं, बल्कि पूरे परिवार को उजाड़ने का माध्यम बन जाएगा। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की सीमा के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर यह दर्दनाक हादसा हुआ। गति तेज होने के कारण एंबुलेंस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े एक भारी-भरकम ट्रक में पीछे से जोरदार तरीके से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि एंबुलेंस के आगे का हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और परखच्चे उड़ गए।
पुलिस और प्रशासन की मशक्कत, चारों तरफ बिछ गईं लाशें
हाइवे पर हुए इस भयानक हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। अयोध्या और सुल्तानपुर जिले की सीमा पर हलियापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई इस दुर्घटना की खबर मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एंबुलेंस का चालक जसपाल बुरी तरह स्टेयरिंग में फंस गया था। आगे की सीट पर बैठे अन्य लोग भी लोहे के मलबे में बुरी तरह उलझ चुके थे। पुलिस को गैस कटर और अन्य उपकरणों की मदद से एंबुलेंस के हिस्सों को काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।
पीछे बैठे लोगों को गंभीर हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के तमाम प्रयास के बावजूद मृत घोषित कर दिया। इस सड़क हादसे में सूबेदार मेजर के इकलौते 18 वर्षीय बेटे गौरव सिंह, उनके बड़े भाई रामसमुझ सिंह, रिश्ते के भतीजे राजन चौधरी (जो स्थानीय स्तर पर सभासद थे) और एंबुलेंस चालक जसपाल—चारों की मौके पर ही या इलाज के दौरान मौत हो गई। एक ही एंबुलेंस में सवार पांच में से चार लोगों की जान चले जाने से पूरा प्रशासनिक अमला भी स्तब्ध रह गया।
देवरिया पहुंचते ही चीख-पुकार से गूंज उठा पूरा गांव
सोमवार की सुबह जब चारों शव देवरिया स्थित उनके पैतृक आवास और संबंधित मोहल्लों में पहुंचे, तो वहां का दृश्य बेहद मर्मस्पर्शी था। महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों का रोना-बिलखना देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। गांव की गलियों में भारी भीड़ जमा हो गई थी और हर किसी की जुबान पर बस यही चर्चा थी कि आखिर एक ही परिवार के साथ इतनी बड़ी ट्रेजेडी कैसे हो गई। महज 48 घंटे के भीतर एक ही घर से तीन-तीन अर्थियां उठने की बात सुनकर आसपास के गांवों के लोग भी सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच गए।
"यह हादसा केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए अपूरणीय घाटा है। सरकार और प्रशासन इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है।" — सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
प्रशासनिक अधिकारियों ने बंधाया ढांढस, एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भी तुरंत हरकत में आए। देवरिया के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान जब मृतक का एक अन्य परिजन प्रशासनिक अधिकारियों से मिला, तो उसका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और सरकार की तरफ से हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने भी शोक संतप्त परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की।
सोमवार को जब फौजी सत्यवान सिंह, उनके भाई रामसमुझ सिंह और बेटे गौरव सिंह का एक साथ अंतिम संस्कार किया जाने लगा, तो पूरा क्षेत्र गमगीन माहौल में डूब गया। नम आंखों से ग्रामीणों ने तीनों को अंतिम विदाई दी। एक सैनिक के सम्मान के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों की अर्थियां एक साथ उठते देख वहां मौजूद हर व्यक्ति का कलेजा फट गया। यह सड़क हादसा सड़क सुरक्षा के उन तमाम पहलुओं पर भी सवाल खड़े करता है, जहां जरा सी लापरवाही या एक्सप्रेसवे पर खड़े वाहन किस तरह से जानलेवा साबित हो जाते हैं।









