उत्तराखंड में नारी शक्ति का अनूठा सम्मान, धामी सरकार का बड़ा फैसला
देवभूमि उत्तराखंड में मातृशक्ति के सम्मान और उनके अदम्य साहस को एक नई पहचान देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के तहत आने वाले शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर प्रदेश के कोने-कोने में महिलाओं की उपलब्धियों को सराहा जाएगा। सरकार का यह कदम राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण का एक नया मानक स्थापित करने जा रहा है।
पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाते हुए, धामी सरकार ने यह तय किया है कि हर प्रखंड स्तर पर नौ ऐसी महिलाओं को चुना जाएगा जिन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत और लगन से एक अलग मुकाम हासिल किया है। यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि नारी ही सृजन और सफलता की असली आधारशिला है।
शासन स्तर पर इस योजना की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए जिला प्रशासन को भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार की मंशा है कि इस आयोजन के माध्यम से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में छुपी हुई प्रतिभाओं को भी मुख्यधारा में लाया जाए और उनकी सफल कहानियों को दुनिया के सामने रखा जाए।
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चयन के कड़े मानक: शिक्षा, खेल, चिकित्सा और समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्य
इस विशेष सम्मान के लिए महिलाओं के चयन की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और क्षेत्र-आधारित रखा गया है। इसके दायरे में चिकित्सा, शिक्षा, खेल, समाजसेवा और ग्रामीण आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। वे महिलाएं जिन्होंने अपने बलबूते पर समाज में बदलाव की बयार लाई है या जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई है, उन्हें इस सम्मान के लिए चुना जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, दूरदराज के পাহारी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाली एएनएम, शिक्षिकाएं जिन्होंने बच्चों के भविष्य को संवारने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, और ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली स्वयं सहायता समूह की लीडर्स को इस सम्मान के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, खेल के मैदान में राज्य और देश का नाम रोशन करने वाली युवा बेटियों को भी इस सूची में विशेष स्थान दिया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के सम्मान से न केवल उन महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की युवा लड़कियों को भी अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी। यह कदम महिलाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में भी मददगार साबित होगा।
चंपावत कैबिनेट बैठक में मुहर और ऐतिहासिक प्रस्ताव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रस्ताव को आधिकारिक जामा पहनाने के लिए आगामी चार अक्टूबर को चंपावत में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
चंपावत में इस कैबिनेट बैठक का होना भी अपने आप में एक रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है। मुख्यमंत्री धामी लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों को केवल राजधानी तक सीमित न रखकर जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। नवरात्र के पवित्र दिनों में इस प्रकार का निर्णय यह साबित करता है कि सरकार संस्कृति और प्रगति को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी राज्य की सरकार नीतिगत स्तर पर इस तरह के सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों को प्रोत्साहन देती है, तो इससे जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की गति तेज हो जाती है। यह प्रस्ताव उत्तराखंड को देश का पहला ऐसा राज्य बना सकता है जो प्रखंड स्तर पर इस वृहद पैमाने पर मातृशक्ति का अभिनंदन करेगा।
महिला उत्थान के लिए धामी सरकार की अन्य प्रमुख योजनाएं
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं के कल्याण के लिए कोई बड़ा कदम उठाया हो। इससे पहले भी उत्तराखंड सरकार द्वारा कई ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं जिनके केंद्र में महिलाएं और उनका आर्थिक स्वावलंबन है। राज्य में नंदा गौरा योजना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना जैसी योजनाएं पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा और विवाह तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर ऋण और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को केवल लाभार्थी तक सीमित न रखकर उन्हें अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक बनाना है।
इन तमाम पहलों के बीच नवरात्र के दौरान नौ देवियों के रूप में महिलाओं का यह सम्मान उस सोच को और अधिक मजबूती देता है, जिसमें महिलाओं को समाज का सबसे सशक्त स्तंभ माना गया है। उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास निश्चित रूप से अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर रहा है।
वन्यजीव संघर्ष और मानवीय साहस का सम्मान: देहरादून में सीएम धामी का संबोधन
नारी सशक्तिकरण के साथ-साथ हाल ही में देहरादून के एफ.आर.आई. कैंपस में आयोजित वन्यजीव सप्ताह-2026 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानवीय साहस का भी अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संघर्ष के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की रक्षा करने वाले कुल 18 साहसी नागरिकों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रत्येक सम्मानित व्यक्ति को 51-51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण हमेशा से एक अहम हिस्सा रहा है। सनातन परंपरा ने हमें मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दिया जाए जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
"हमारी सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर काम कर रही है। वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित रहें और उनके रास्ते खुले रहें, इसके लिए हम हरसंभव कदम उठा रहे हैं। नारी शक्ति का सम्मान और समाज के हर वर्ग की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।" — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड








