चेन्नई/धारापुरम — द फ्रीलान्स की जमीनी रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सरगर्मी अपने चरम पर है। राज्य की बहुचर्चित धारापुरम और मदुरांतकम विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम चुनाव की तरह इस उपचुनाव में भी मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया है और मतदान का यह आंकड़ा अस्सी प्रतिशत के पार पहुंच गया है। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं जहां युवा और महिला मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस उपचुनाव को केवल एक साधारण विधायक चुनने की प्रक्रिया नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों की बड़ी सुगबुगाहट कहा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दक्षिण भारत की राजनीति में हाल ही में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले अभिनेता थलपति विजय के संगठन के लिए यह किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। विजय के मैदान में उतरने के बाद से ही राज्य की पारंपरिक पार्टियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। मतदाताओं का यह भारी रुझान यह साफ बयां करता है कि जनता बदलाव के मूड में है या फिर पारंपरिक दलों पर ही भरोसा जता रही है।
धारापुरम सीट पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें
धारापुरम विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। द्रविड़ पार्टियों के गढ़ में सेंध लगाने उतरी नई ताकतों के लिए यह सीट एक लिटमस टेस्ट की तरह है। क्षेत्र के गांवों और शहरी इलाकों में घूमकर हमने पाया कि आम लोग महंगाई, स्थानीय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर खुलकर बात कर रहे हैं। हालांकि हर कोई इस बात को लेकर उत्सुक है कि नए राजनीतिक दल का जमीनी संगठन कितना मजबूत साबित हुआ है। मतदान के दौरान पोलिंग बूथों के बाहर अलग-अलग दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हल्की-फुल्की बयानबाजी भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में रही और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरा पालन किया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बार का चुनाव पिछले चुनावों से काफी अलग है क्योंकि इसमें नए चेहरों और नए वादों की भरमार है। मदुरांतकम और धारापुरम दोनों ही जगहों पर महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों का रुख किया। महिला सुरक्षा और मुफ्त योजनाओं के वादों ने इस बार भी मतदाताओं के मन को काफी हद तक प्रभावित किया है। धरातल पर काम करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं का मानना है कि नतीजे इस बात का फैसला करेंगे कि आने वाले विधानसभा चुनावों में राज्य की जनता किस दिशा में आगे बढ़ने का मन बना रही है।
नतीजों से तय होगी राज्य की नई राजनीतिक दिशा
मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दलों के भीतर हार-जीत के समीकरणों पर मंथन शुरू हो चुका है। सभी दल अपने-अपने हिसाब से जीत के दावे कर रहे हैं लेकिन असली तस्वीर मतपेटियां खुलने के बाद ही सामने आएगी। जिला प्रशासन ने स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा कड़ी कर दी है और केंद्रीय बलों की निगरानी में ईवीएम मशीनों को सुरक्षित रखा गया है। नियत समय पर होने वाली मतगणना के दिन धारापुरम और मदुरांतकम के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि किसी भी प्रकार के जश्न या विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनी रहे।
द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। जैसे ही मतगणना का काम शुरू होगा और शुरुआती रुझान सामने आएंगे, हम आप तक सबसे सटीक और निष्पक्ष खबरें पहुंचाएंगे। तब तक के लिए राजनीतिक दलों के दिग्गजों की सांसे अटकी हुई हैं और हर कोई बस यही जानना चाहता है कि इस चुनावी महासमर में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा। जनता का फैसला क्या होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि इन नतीजों के बाद तमिलनाडु की सियासत में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।






