नई दिल्ली और अहमदाबाद से ग्राउंड जीरो पर मिली रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिनों देश भर में ईंधन की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर ईंधन की कालाबाजारी और चोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। अहमदाबाद के वटवा इलाके में औद्योगिक वसाहत के भीतर से डीजल चोरी करने वाली एक शातिर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह के पास से भारी मात्रा में डीजल बरामद किया गया है, जो इस बात का सुबूत है कि महंगे होते ईंधन के इस दौर में अवैध गतिविधियों के जरिए मुनाफा कमाने वाले सक्रिय हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रहे तनाव और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचने से ऊर्जा आयात महंगा हो गया है। जानकारों का मानना है कि इस मंहगाई का सीधा असर देश के परिवहन क्षेत्र और आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। वटवा जीआईडीसी में हुई इस कार्रवाई के बाद स्थानीय पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह चोरी किया गया डीजल आगे कहां बेचा जाता था। इस अवैध धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी गहराई से जांच की जा रही है ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
ईंधन की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी का असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए विदेशी तेल खरीदना और भी ज्यादा महंगा साबित हो रहा है। ऐसे हालात में सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आम जनता को ईंधन की कीमतों के बड़े झटकों से बचाया जा सके। हालांकि, बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
देश के भीतर ऊर्जा के नए विकल्पों पर भी तेजी से काम चल रहा है। एक तरफ जहां सरकार हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक ट्रेनों जैसी हरित तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के प्रयास भी जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ऊर्जा बचत करने और संयम बरतने की अपील की है ताकि देश इस वैश्विक आर्थिक दबाव से आसानी से पार पा सके। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर डीजल की कालाबाजारी जैसी घटनाएं प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
वटवा जीआईडीसी में कैसे चल रहा था चोरी का खेल
अहमदाबाद के औद्योगिक क्षेत्र वटवा में पकड़ी गई डीजल चोरी की यह घटना कोई अकेली मिसाल नहीं है। ट्रांसपोर्ट और कारखानों में इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों से डीजल चुराने वाले गिरोह रात के वक्त सक्रिय रहते हैं। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि ये आरोपी खड़े ट्रकों और कंपनियों के जेनरेटर से पाइप के जरिए तेल निकालकर बड़े ड्रमों में भरते थे। इसके बाद इस चोरी के तेल को बाजार से कम कीमत पर खुलेआम बेच दिया जाता था। इस तरह की वारदतों से ट्रांसपोर्टरों को तो आर्थिक नुकसान हो ही रहा है, साथ ही बाजार में ईंधन की अवैध आपूर्ति भी बढ़ रही है।
स्थानीय व्यापार संगठनों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर डीजल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे और चोरी की ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं, तो माल भाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा। माल भाड़ा बढ़ने से हर रोज इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों के दाम भी अपने आप ऊपर चले जाएंगे। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस चोरी के पीछे किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है जो वटवा के अलावा दूसरे औद्योगिक इलाकों में भी इस तरह के काले कारोबार को अंजाम दे रहा है।
प्रशासन की सख्ती और आगे की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गुजरात पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने औद्योगिक इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। रात के समय खड़े होने वाले माल वाहक वाहनों की सुरक्षा के लिए खास निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, अवैध रूप से तेल का भंडारण करने वाले गोदामों और कबाड़ की दुकानों पर भी छापे मारे जा रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम को स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि ऐसे आपराधिक तत्वों के खिलाफ बहुत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।






