नई दिल्ली और अहमदाबाद के औद्योगिक गलियारों में इन दिनों ईंधन की कीमतें और आपूर्ति सबसे बड़ा मुद्दा बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के साए के बीच भारत में डीजल के दाम बढ़ने की आशंकाओं ने जोर पकड़ लिया है। आम आदमी से लेकर ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक हर कोई इस बात से डरा हुआ है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही रहे तो देश की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर दबाव पड़ सकता है।
इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। ऊर्जा के बढ़ते जोखिमों के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। आयातित कच्चे तेल और डीजल के लिए देश को अब अधिक भुगतान करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार और महंगाई दर पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है और देशहित में आर्थिक मोर्चे पर कड़े फैसले लेने के संकेत दिए हैं ताकि इस वैश्विक उथल-पुथल से निपटा जा सके।
अहमदाबाद के वटवा में डीजल चोरी का पर्दाफाश
ईंधन की बढ़ती कीमतों और महंगे होते डीजल के बीच स्थानीय स्तर पर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। अहमदाबाद के औद्योगिक क्षेत्र वटवा जीआईडीसी से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने डीजल चोरी करने वाली एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह औद्योगिक इकाइयों और खड़े वाहनों से बड़े पैमाने पर डीजल चुराकर काले बाजार में बेचता था। पुलिस ने छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध डीजल बरामद किया है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस तरह की घटनाएं इस बात का साफ प्रमाण हैं कि जैसे-जैसे डीजल महंगा हो रहा है, वैसे-वैसे काले बाजार में इसकी मांग और अवैध धंधे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और चालकों का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से उनका रोज का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। एक तरफ जहां सरकार ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर नए विकल्प तलाश रही है, वहीं दूसरी तरफ चोरों और जमाखोरों की सक्रियता ने आम जनता और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
हाइड्रोजन ट्रेनों की ओर बढ़ती भारत की कदमताल
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रेलवे अब भविष्य की तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण और उसके आंतरिक हिस्सों की झलक सामने आ चुकी है, जो यह दर्शाती है कि भारत पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली की तरफ बढ़ रहा है। डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता को खत्म करने के लिए हाइड्रोजन ऊर्जा को एक बेहतरीन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। रेलवे का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में ऐसी ट्रेनें पटरियों पर दौड़ेंगी जिससे प्रदूषण और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।
हालांकि, इन अत्याधुनिक तकनीकों को आम जनता तक पूरी तरह पहुंचने में अभी समय लगेगा। तब तक देश के करोड़ों वाहन चालकों और उद्योगों को डीजल और पेट्रोल की मौजूदा कीमतों के उतार-चढ़ाव का सामना करना ही होगा। सरकार भी यह समझती है कि ऊर्जा के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बने बिना देश को सुरक्षित रखना कठिन होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे बदलाव पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है, और आने वाले हफ्तों में ईंधन के मोर्चे पर बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।
आम नागरिक और ट्रांसपोर्टर्स पर मंडराता आर्थिक संकट
सड़क परिवहन से लेकर कृषि क्षेत्र तक, डीजल का उपयोग देश की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। यदि डीजल के दाम में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो सब्जियों और रोजाना इस्तेमाल होने वाली हर चीज के दाम अचानक बढ़ जाएंगे। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि ईंधन महंगा हुआ तो उन्हें मजबूरी में ढुलाई के दाम बढ़ाने पड़ेंगे, जिससे महंगाई की एक नई लहर आ सकती है।
देश के नागरिक इस समय बड़ी दुविधा में हैं कि आने वाले महीनों में अपने बजट को कैसे संभालें। एक तरफ वैश्विक युद्ध और ऊर्जा संकट के बादल मंडरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरेलू बाजार में महंगाई का डर सता रहा है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए जल्द ही पारंपरिक ईंधनों के विकल्प खोजने होंगे, वरना आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ असहनीय हो जाएगा।





