बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर से महाराष्ट्र की सियासत और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में हाल ही में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है, जब वकीलों की तरफ से पुलिस कस्टडी के दौरान सीसीटीवी फुटेज के गायब या डिलीट होने के गंभीर दावे किए गए हैं। इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, और मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
कस्टडी से सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने का गंभीर आरोप
मामले की पैरवी कर रहे वकीलों ने दावा किया है कि दिशा सालियान की मौत से जुड़े कुछ अहम दस्तावेजों और पुलिस कस्टडी के दौरान के सीसीटीवी फुटेज को सهवृद्ध तरीके से डिलीट किया गया है। वकीलों का कहना है कि यदि यह फुटेज सुरक्षित रहता, तो मामले की सच्चाई तक पहुंचना बहुत आसान हो जाता। फुटेज के गायब होने से इस पूरे प्रकरण में कई तरह के अनसुलझे सवाल खड़े हो गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज जैसे डिजिटल सबूत किसी भी आपराधिक मामले की जांच की रीढ़ होते हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण साक्ष्यों का इस तरह से गायब होना जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। पीड़ित पक्ष और वकीलों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फुटेज किसने और किसके इशारे पर डिलीट किया।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से जुड़े गवाही के दावे
इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब वकीलों ने महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने सारे तथ्य रखे गए हैं और वे इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाएंगे। वकीलों के दावों के मुताबिक, इस मामले से जुड़े कुछ पहलुओं पर फडणवीस के पास महत्वपूर्ण जानकारियां हैं और वे इस मामले में गवाह के रूप में सामने आ सकते हैं। इस दावे के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी बड़े नेता का नाम इस तरह के मामले में जुड़ता है, तो इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है।
दिशा सालियान मामला: शुरुआत से अब तक का सफर
आपको बता दें कि दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मालाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने से हुई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद यह मामला भी सुर्खियों में आ गया। दोनों मामलों के आपस में जुड़े होने की आशंकाओं ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में तहलका मचा दिया था।
विभिन्न राजनीतिक दलों और परिजनों की मांग के बाद इस मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच की गई। कई बार एसआईटी (SIT) गठन की बातें भी सामने आईं। हालांकि, इतने साल बीत जाने के बाद भी इस बात से पर्दा नहीं उठ पाया है कि वह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी। ताजा खुलासों ने एक बार फिर से इस अनसुलझी पहेली को जनता के सामने ला खड़ा किया है।
"न्याय पाने की इस लड़ाई में सबूतों का इस तरह गायब होना बेहद चिंताजनक है। हम अदालत से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की नए सिरे से गहन जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।" — संबंधित पक्ष के कानूनी सलाहकार
वकीलों के इन दावों के बाद आगे क्या होगी कानूनी कार्रवाई?
वकीलों द्वारा किए गए इन ताजा दावों के बाद अब सबकी नजरें न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। क्या अदालत इस मामले में स्वतः संज्ञान लेगी या फिर एक नई एसआईटी का गठन किया जाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। डिजिटल साक्ष्यों के डिलीट होने के आरोपों पर पुलिस विभाग को भी अपनी सफाई देनी पड़ सकती है।
आम जनता और सुशांत-दिशा के प्रशंसक आज भी सोशल मीडिया के जरिए लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक इस मामले के सभी पहलुओं की पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।
संक्षेप में कहें तो, दिशा सालियान की मौत का यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और राजनीतिक गलियारों की सरगर्मी का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। जैसे-जैसे नए खुलासे हो रहे हैं, इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीदें एक बार फिर जग गई हैं।






