राजनीति से इतर क्या होता दीया कुमारी का दूसरा पेशा?
देश के सबसे खूबसूरत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों में शुमार राजस्थान की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाली दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने हाल ही में अपने जीवन के उन सपनों का जिक्र किया, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दिल की बात साझा करते हुए बताया कि यदि वह सक्रिय राजनीति के मैदान में नहीं होतीं, तो उनका रुझान किस दिशा में होता। उनकी यह अनूठी स्वीकारोक्ति सोशल मीडिया और पर्यटन जगत में खासी चर्चा का विषय बन गई है।
कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यदि उनका करियर राजनेता के तौर पर नहीं संवरता, तो आज वह दुनिया भर की सैर करते हुए एक पेशेवर ट्रैवल ब्लॉगर की भूमिका निभा रही होतीं। डिजिटल दौर की इस आधुनिक विधा के प्रति उनका आकर्षण इस बात का गवाह है कि वह युवाओं की पसंद और बदलते दौर के रुझानों से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं।
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बचपन के सपने: अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से लेकर कानून की किताबों तक
हर इंसान के जीवन में बचपन के सपने बहुत अनमोल होते हैं। दीया कुमारी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके अरमान वक्त के साथ कैसे बदलते रहे। कम उम्र में हर बच्चे की तरह उनके मन में भी आसमान छूने की इच्छा थी। वह अंतरिक्ष की गहराइयों को टटोलने के लिए एक एस्ट्रोनॉट बनना चाहती थीं।
समय के साथ जैसे-जैसे उनका दायरा बढ़ा, उनके गोल्स भी बदलते चले गए। अंतरिक्ष की सैर के बाद उनके मन में न्याय प्रणाली और कानून के क्षेत्र में उतरने की इच्छा जगी। उन्होंने वकील बनने का सपना देखा ताकि समाज में चल रही व्यवस्था को गहराई से समझ सकें। हालांकि, किस्मत उन्हें जनसेवा और राजनीतिक सफर के रास्ते पर ले आई, जहां आज वह राज्य के विकास में अहम योगदान दे रही हैं।
सोशल मीडिया कंटेंट और क्रिएटर्स से प्रभावित
राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भव्य 'राजस्थान क्रिएटर्स कॉन्क्लेव-2026' में देश भर से आए सैकड़ों डिजिटल रचनाकारों, ट्रैवल ब्लॉगर्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने शिरकत की। इस मंच पर जब दीया कुमारी ने कंटेंट क्रिएटर्स के काम की सराहना की, तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में डिजिटल क्रिएटर्स से मुखातिब होते हुए कहा कि वे उनके काम से इतना ज्यादा प्रभावित हैं कि अब वह खुद उनकी नौकरी यानी ट्रैवल ब्लॉगिंग का जिम्मा संभालना चाहती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी जगह की खूबसूरती, वहां के खानपान और स्थानीय संस्कृति को जिस अनूठे ढंग से पेश किया जाता है, उसने उन्हें पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया है।
"ट्रैवल ब्लॉगर्स जिस तरह किसी जगह, संस्कृति और खानपान को सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करते हैं, वह वाकई अद्भुत है। कई बार मुझे भी हैरानी होती है कि ये लोग इतनी रोचकता से किसी स्थान की कहानी कैसे बयां करते हैं।" — दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री, राजस्थान
राजस्थान की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का जादू
राज्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए पर्यटन मंत्री ने कहा कि राजस्थान जैसा विविधतापूर्ण परिदृश्य शायद ही कहीं और देखने को मिले। एक ही राज्य की सीमाओं के भीतर पर्यटकों को अनगिनत अनुभव एक साथ मिल जाते हैं। जयपुर की ऐतिहासिक विरासत, जोधपुर की नीली बस्तियां, बीकानेर के पारंपरिक जायके और स्थापत्य, जैसलमेर के सुनहरे धोर और विशाल किले, उदयपुर की मनमोहक झीलें और सवाई माधोपुर के वन्य जीव अभ्यारण्य पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं।
उन्होंने जयपुर के प्राचीन परकोटे की खासियत बताते हुए कहा कि यहां की तंग गलियों में छिपे पारंपरिक बाजार और अलग-अलग कारोबार शहर को एक खास पहचान देते हैं। सरकार का पूरा जोर अब इन पारंपरिक धरोहरों के साथ-साथ नए पर्यटन स्थलों को भी देश-दुनिया के नक्शे पर उभारने का है।
बदलती पर्यटन शैली और ग्रामीण संस्कृति की ओर बढ़ता रुझान
पर्यटन के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज का पर्यटक केवल ऐतिहासिक स्मारकों की तस्वीरें खींचकर लौटने तक सीमित नहीं रहना चाहता। अब लोग गहराई से अनुभव करना चाहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में आम जीवन कैसे चलता है, वहां के लोग क्या खाते हैं और उनकी संस्कृति तथा रहन-सहन का तरीका क्या है।
होमस्टे और विलेज टूरिज्म इसी सोच का परिणाम है। पर्यटक अब केवल बाहरी सुंदरता देखने के बजाय स्थानीय उत्सवों का हिस्सा बनकर वहां की मिट्टी की खुशबू महसूस करना चाहते हैं। नाइट टूरिज्म और नए डेवलेपमेंट के जरिए सरकार इस अनुभव को और ज्यादा समृद्ध बनाने का लगातार प्रयास कर रही है।
भविष्य की नीतियां और कला जगत की हस्तियों का सम्मान
सरकार अकेले दम पर पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर नहीं पहुंचा सकती, इसके लिए निजी क्षेत्र और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। पर्यटन नीति के तहत नए आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस शानदार कॉन्क्लेव के दौरान कला, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाली कई जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित भी किया गया। प्रसिद्ध चित्रकार रामू रामदेव, देवांग अग्रवाल, कुलदीप चंदेला, अभिमन्यु सिंह और श्याम सुंदर पालीवाल जैसे दिग्गजों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए मंच पर प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
निष्कर्ष
दीया कुमारी के इन विचारों से स्पष्ट है कि राजनीति की व्यस्तताओं के बीच भी उनके भीतर एक ऐसा मुसाफिर जिंदा है जो दुनिया को करीब से देखने और उसकी खूबसूरती को कैमरे में कैद करने की चाह रखता है। राजस्थान में पर्यटन को नए आयाम देने के लिए जिस तरह की आधुनिक सोच और डिजिटल क्रिएटर्स के साथ संवाद की पहल की जा रही है, उससे आने वाले समय में राज्य के पर्यटन उद्योग को एक अभूतपूर्व गति मिलने की पूरी उम्मीद है।






