पद्मश्री डॉ. टीके लहरी मामला: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ 53 सेकंड का वीडियो
देशभर में अपनी चिकित्सा सेवाओं और पद्मश्री सम्मान के लिए विख्यात डॉ. टीके लहरी से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग के आईसीयू में भर्ती पद्मश्री डॉ. टीके लहरी को थप्पड़ मारने के गंभीर आरोपों की जांच अभी चल ही रही थी कि इस बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक नए वीडियो ने पूरे मामले को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। यह वीडियो महज 53 सेकंड का है, लेकिन इसने अस्पताल प्रशासन और आरोपी डॉक्टरों के दावों की हवा निकाल दी है।
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति साफ तौर पर यह कहते हुए नजर आ रहा है कि जो कुछ भी हुआ, वह उसकी अपनी आंखों के सामने हुआ था। इसके बावजूद कुछ लोग अब यह सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं कि डॉ. टीके लहरी खुद असंतुलित होकर गिर गए थे। तीमारदार ने वीडियो में हाथों के इशारे से बताया कि कैसे चेहरे पर वार किया गया था, जिससे साफ जाहिर होता है कि मामला महज गिरने का नहीं, बल्कि मारपीट का है। इस खुलासे के बाद से ही चिकित्सा जगत और आम जनता में भारी रोष व्याप्त है.
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तीमारदार की जुबानी: जानिए क्या थी उस दिन की असली घटना
वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने बड़ी बेबाकी से उस दिन की पूरी घटना का आंखों देखा हाल बयां किया है। उसने बताया कि जब आईसीयू के भीतर वह वाकया हुआ, तो वहां प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे। तीमारदार के अनुसार, जब किसी को थप्पड़ मारा जाता है या चेहरे पर बलप्रयोग किया जाता है, तो चेहरे और आंखों के आसपास के हिस्से लाल हो जाते हैं। ठीक ऐसा ही डॉ. लहरी के साथ हुआ था। वीडियो में वह व्यक्ति अपने चेहरे पर हाथ रखकर यह समझा रहा है कि किस प्रकार बलपूर्वक हाथ डॉ. लहरी के चेहरे पर चलाया गया था।
घटना के समय की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमले के बाद डॉ. लहरी अपने बेड पर ही गिर पड़े थे। गनीमत यह रही कि पीछे मौजूद अन्य लोगों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया, वरना उन्हें और गंभीर चोट लग सकती थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रो. ओमशंकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए बीएचयू प्रशासन से मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य में शामिल सभी दोषियों को जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए और उनके खिलाफ कठोर से कठोर प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों की चुप्पी और सवालों के घेरे में बीएचयू प्रशासन
इस संवेदनशील मामले में जब मीडिया ने सच्चाई जानने की कोशिश की, तो जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया बेहद निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना रहा। आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार और बीएचयू अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) से संपर्क करने के लिए कई बार फोन कॉल किए गए, लेकिन किसी ने भी फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए व्हाट्सएप पर विस्तृत संदेश भी भेजे गए, मगर खबर लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया।
अधिकारियों की इस लंबी चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष है, तो वह मीडिया और जनता के सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा है? क्या प्रशासन किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश कर रहा है? ऐसे कई अनुत्तरित सवाल अब बीएचयू की कार्यप्रणाली पर बड़ा दाग लगा रहे हैं, जिससे संस्थान की साख को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
15 दिन बीतने के बाद भी चेहरे के निशान और सच्चाई पर पर्दा
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के आईसीयू में बेड नंबर 2 पर भर्ती पद्मश्री डॉ. टीके लहरी को उन्हीं के विभाग के एक डॉक्टर द्वारा थप्पड़ मारने की गंभीर शिकायत उनके परिजनों ने की थी। परिजनों ने 1 सितंबर को ईमेल के माध्यम से विश्वविद्यालय के कुलपति, आईएमएस निदेशक, एमएस और अन्य उच्चाधिकारियों को इस घटना की लिखित शिकायत भेजी थी। इस संगीन मामले को सबसे पहले प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, जिसके बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका है कि डॉ. लहरी के चेहरे पर जो निशान थे, वे आखिर किस वजह से आए थे। शुरुआती लीपापोती के प्रयासों के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा, तो राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी हरकत में आए। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव के अलावा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कई कद्दावर नेता बीएचयू पहुंचे और उन्होंने डॉ. लहरी की सेहत का हालचाल जाना।
राजनीतिक दखल और निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल के कड़े निर्देशों के बाद ही इस पूरे प्रकरण की प्रशासनिक जांच 7 सितंबर से शुरू की गई थी। हालांकि, जांच की गति और उसकी पारदर्शिता को लेकर अभी भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों और शुभचिंतकों का साफ कहना है कि जब तक वीडियो में दिख रहे तथ्यों को आधार बनाकर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय की उम्मीद करना बेमानी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक पद्मश्री से सम्मानित और उम्रदराज डॉक्टर के साथ इस तरह का सलूक न केवल चिकित्सीय नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि मानवता को भी शर्मसार करने वाला है। इस पूरे प्रकरण में अब देखना यह होगा कि बीएचयू प्रशासन वायरल वीडियो और तीमारदार के बयानों के आधार पर क्या कदम उठाता है, या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की पुरानी परंपरा ही दोहराई जाती है।
"जो घटना हुई, वह मेरी आंखों के सामने हुई थी। लोग अब सफाई दे रहे हैं कि डॉ. लहरी खुद गिर गए थे, लेकिन सच यह है कि उनके चेहरे पर हाथ मारा गया था जिससे वे बेड पर गिर पड़े थे।" — प्रत्यक्षदर्शी तीमारदार








