नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के चुनावी मैदान में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कुल 17 राज्यों में वोटर लिस्ट को नए सिरे से अपडेट करने का बड़ा फरमान जारी कर दिया है। आयोग के इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से एसआईआर और वोटर लिस्ट की शुचिता को लेकर राजनीतिक गलियारों में जो चर्चाएं चल रही थीं, उनके बीच यह नया आदेश सामने आया है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह पक्का करना है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो और कोई भी फर्जी वोट सूची में न बचा रहे।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस बार चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन यानी एसएसआर पर पूरा जोर दिया है। जिन राज्यों में यह अभियान चलाया जाना है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और बिहार जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं। आयोग के इस फैसले से जिला स्तर के प्रशासनिक अमले में भी काम तेजी से शुरू हो गया है। ब्लॉक स्तर पर बीएलओ यानी बूथ लेवल अफसरों को घर-घर जाकर सर्वे करने और सूचियों की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। पिछले चुनावों में कई जगहों पर नाम कटने की शिकायतें सामने आई थीं, जिन्हें इस बार प्राथमिकता से ठीक किया जाएगा।
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का सुनहरा मौका
इस पूरी कवायद के तहत आम जनता को भी अपनी वोटर लिस्ट जांचने का सीधा मौका मिलेगा। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि सूची के प्रकाशन के बाद लोगों को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा समय दिया जाएगा। अगर किसी युवा की उम्र 18 साल पूरी हो चुकी है या फिर कोई परिवार किसी नए इलाके में शिफ्ट हुआ है, तो वे अपना नाम आसानी से जुड़वा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ स्थानीय मतदान केंद्र पर भी फॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए, क्योंकि जरा सी चूक से अंतिम मतदाता सूची प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक दलों की बात करें तो इस ताजा फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ दलों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हैं, जिन्हें ठीक करना बेहद जरूरी था। वहीं, कुछ क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नेताओं के बीच बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। जानकारों का मानना है कि पारदर्शी चुनाव कराने के लिए वोटर लिस्ट का पूरी तरह शुद्ध होना सबसे पहली शर्त है। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने समय रहते इस बड़े प्रशासनिक कदम को उठाने का फैसला किया है ताकि मतदान के दिन किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों की क्या है तैयारी
पंजाब और अन्य राज्यों में जहां हाल ही में फाइनल वोटर लिस्ट के आंकड़े सामने आए हैं, वहां भी इस नए आदेश के बाद एक बार फिर समीक्षा का दौर शुरू हो गया है। जिन 17 राज्यों में यह अभियान चलना है, वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समयसीमा के भीतर ही सभी काम पूरा करें। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना और दोहरी प्रविष्टियों को खत्म करना सबसे बड़ा काम होगा। पिछले दिनों कुछ राज्यों में इसको लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी चर्चा गरमाई थी, जिसके बाद अब यह ठोस दिशा-निर्देश ज़मीन पर उतारे जा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ज़मीनी पड़ताल यह बताती है कि अगले कुछ हफ्तों में हर पोलिंग बूथ पर बीएलओ की सक्रियता बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए। प्रशासन की यह कोशिश है कि इस बार की वोटर लिस्ट पूरी तरह त्रुटिहीन हो। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, इस प्रक्रिया की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। आम नागरिक होने के नाते यह आपकी भी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपनी सूची में अपना नाम समय रहते जांच लें।
प्रशासनिक अमले की चौकसी और आगे की राह
जिला मुख्यालयों से लेकर राज्य के निर्वाचन कार्यालय तक इस अभियान को सफल बनाने के लिए कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं। डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके इस बार डुप्लीकेट नामों को तुरंत पकड़ा जा रहा है। आयोग की यह सख्ती उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो गलत तरीके से वोटर लिस्ट में नाम बनाए रखते हैं। आने वाले दिनों में हर जिले से इस प्रक्रिया की साप्ताहिक रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाएगी। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि आपको हर एक अपडेट सबसे पहले और सटीक रूप में मिलती रहे।







