यूरोप के डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे पर मंडराते खतरों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फ्रांस के एक बड़े सुपरमार्केट में साइबर हैकिंग की वजह से गंभीर तकनीकी संकट खड़ा हो गया। इस हमले के बाद वहां के कूलिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो गए। फ्रिज लगातार पचास डिग्री तापमान पर चलते रहे और स्टोर में रखा सारा खाना सड़ गया।
इस बड़ी घटना के बाद यूरोपीय देशों में सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है। फ्रांस के बाद अब पूरे यूरोप में चाइनीज बसों और उनकी तकनीकी प्रणालियों की गहरी जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को डर है कि इन गाड़ियों में लगे डिजिटल उपकरण और सॉफ्टवेयर सुरक्षा में बड़ी सेंध लगा सकते हैं। परिवहन नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
सुपरमार्केट में हैकिंग से कैसे बिगड़े हालात?
फ्रांस की इस घटना ने साफ कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और स्मार्ट सिस्टम कितने संवेदनशील हैं। हैकर्स ने सुपरमार्केट के सर्वर पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद स्टोर के तापमान नियंत्रण यानी फ्रिज के सिस्टम पर किसी का नियंत्रण नहीं रहा। बाहर और अंदर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ने से खाने-पीने की सभी चीजें पलभर में खराब हो गईं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि हमलावरों ने रिमोट एक्सेस के जरिए पूरे सिस्टम को हाईजैक किया था। सुपरमार्केट प्रबंधन को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है। इस घटना के बाद से商業 प्रतिष्ठान अपनी साइबर सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं।
यूरोप में चाइनीज बसों की क्यों हो रही है जांच?
सुपरमार्केट की इस घटना के ठीक बाद यूरोप के कई देशों ने सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाली चाइनीज बसों की जांच शुरू कर दी है। इन बसों में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नेविगेशन सिस्टम लगे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुपरमार्केट के फ्रिज हैक हो सकते हैं, तो ये बसें भी साइबर हमलों का आसान शिकार बन सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन वाहनों के सॉफ्टवेयर में ऐसे बैकडोर हो सकते हैं जो बाहर से ऑपरेट किए जा सकें। इसी आशंका के चलते जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में परिवहन निगमों ने इन बसों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जांच तेज कर दी है। नीति निर्माता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि देश की आंतरिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
स्मार्ट तकनीक और डिजिटल सुरक्षा के नए खतरे
आज के दौर में हर चीज इंटरनेट से जुड़ी हुई है, जिसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहा जाता है। चाहे वह सुपरमार्केट का फ्रिज हो या शहर की सड़कों पर दौड़ने वाली इलेक्ट्रिक बसें, सब कुछ सर्वर के इशारे पर चलता है। लेकिन यह सुविधा अब जी का जंजाल बनती जा रही है। एक छोटी सी तकनीकी चूक या हैकर्स की चाल पूरे सिस्टम को ठप कर सकती है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ होता है कि यूरोप में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में सरकारें विदेशी तकनीकी उत्पादों और सॉफ्टवेयर पर और सख्त नियम लागू कर सकती हैं। आम जनता के लिए भी यह एक चेतावनी है कि डिजिटल होती दुनिया में सुरक्षा और गोपनीयता सबसे बड़े सवाल बनकर उभर रहे हैं।







