सेना की वर्दी से लेकर कपड़ों के ब्रांड तक का सफर
भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा बनना और देश की रक्षा के लिए वर्दी पहनना किसी भी युवा के लिए एक गौरवशाली सपना होता है। इस मुकाम को हासिल करने के लिए लोग वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं और दिन-रात एक कर देते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति चौदह साल तक वायुसेना जैसी प्रतिष्ठित सेवा में अधिकारी रहने के बाद अचानक नौकरी छोड़ दे और कपड़ों का व्यापार करने लगे, तो लोगों का चकित होना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला सामने आया है जहाँ एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने अपने जीवन की एक बिल्कुल नई राह चुनी है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वाली ऐश्वर्या ने कुछ ऐसा ही साहसिक और अनोखा कदम उठाया है। कभी आसमान की बुलंदियों और सुरक्षा तंत्र का हिस्सा रहीं ऐश्वर्या आज अपने खुद के कपड़ों के ब्रांड को सफलतापूर्वक चला रही हैं। जब उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहक उन्हें देखते हैं, तो उनके मन में अक्सर एक ही जिज्ञासा जागती है कि आखिर उन्होंने एयरफोर्स की शानदार नौकरी को क्यों छोड़ दिया। लगातार पूछे जाने वाले इन सवालों के बाद अब उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे वाकये पर चुप्पी तोड़ी है और अपने इस बड़े फैसले के पीछे की असली कहानी साझा की है।
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शॉर्ट सर्विस कमीशन के नियमों के तहत पूरी हुई सेवा
इंस्टाग्राम पर अपने सफर को साझा करते हुए ऐश्वर्या ने बताया कि उनकी यह कहानी किसी सामान्य व्यावसायिक शुरुआत जैसी नहीं है। सबसे पहले उन्होंने उस सवाल का समाधान दिया जो उनसे सबसे अधिक बार पूछा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायुसेना छोड़ने का निर्णय पूरी तरह से उनकी अपनी इच्छा से नहीं था, बल्कि वह एक शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी थीं। सेना के नियमों के मुताबिक चौदह साल की निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद उन्हें अपनी नौकरी से मुक्त होना पड़ा।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह बचपन से ही कोई बहुत बड़ी बिजनेसवुमन बनने का सपना लेकर नहीं चली थीं। उनके मन में कभी ऐसा कोई विचार नहीं आया था कि वह भविष्य में अपनी खुद की दुकान खोलेंगी या फैशन की दुनिया में ही अपना करियर बनाएँगी। उनके लिए यह सफर परिस्थितियों और समय के साथ बदलती प्राथमिकताओं का एक स्वाभाविक परिणाम था, जहाँ उन्हें सेना से सेवानिवृत्ति के बाद अपने जीवन की नई दिशा तय करनी थी।
परिवार और बच्चों के करीब रहने की चाहत
नौकरी पूरी होने के बाद आगे क्या करना है, इसका जवाब उन्हें किसी बड़े कॉर्पोरेट प्लान या भारी-भरकम बिजनेस स्ट्रेटजी से नहीं मिला। उनके लिए उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने परिवार के नजदीक रहना था। ऐश्वर्या अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहती थीं, जो उनके जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही, उनके माता-पिता की उम्र भी अब बढ़ रही है और वह इस दौर में अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए भी पूरी तरह उपलब्ध रहना चाहती थीं।
जिंदगी की भागदौड़ से थोड़ा विराम लेकर अपनों के बीच समय बिताना उनकी सबसे बड़ी चाहत बन गई थी। सेना की अनुशासित और व्यस्त जीवनशैली के बाद वह अपने परिवार को प्राथमिकता देना चाहती थीं, ताकि वह अपने बच्चों के बचपन के हर पल की साक्षी बन सकें और परिवार की देखभाल कर सकें।
घर से सिर्फ सौ मीटर की दूरी पर शुरू किया काम
अपने व्यवसाय के स्थान के चयन को लेकर भी उन्होंने बहुत जटिल योजना नहीं बनाई। उनकी यह नई दुकान उनके अपने घर से महज सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। उन्होंने सोचा कि यदि उन्हें जीवन में कुछ नया और रचनात्मक शुरू करना ही है, तो क्यों न इसे अपने घर के बिल्कुल करीब किया जाए। इस तरह उन्हें ऐसा रोजगार मिल गया जिसे वह अपने परिवार की देखभाल करते हुए भी आसानी से संभाल सकती थीं।
इस काम में उनकी थोड़ी बहुत रचनात्मकता भी काम आ गई और उन्हें यह मध्यम मार्ग अपने लिए सबसे उपयुक्त लगा। परिवार के साथ रहने का सुख और काम की स्वतंत्रता, दोनों चीजें उन्हें एक ही जगह पर मिल गईं।
करियर बदलने के पीछे कोई बड़ा दिखावा नहीं
ऐश्वर्या ने अपने पूरे सफर को बहुत ही सादगी के साथ लोगों के सामने रखा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि हर बड़े करियर बदलाव के पीछे कोई बहुत बड़ी फिल्मी कहानी या असाधारण महत्वाकांक्षा होना जरूरी नहीं है। कई बार इंसान केवल अपने परिजनों, बच्चों और सुकून भरी जिंदगी के लिए अपनी प्राथमिकताओं को बदल देता है।
"मैं बस अपने बच्चों के पास रहना चाहती थी और अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए समय निकालना चाहती थी। जिंदगी की रफ्तार को थोड़ा थामकर अपनों के करीब रहना ही मेरा मुख्य उद्देश्य था।" — ऐश्वर्या, पूर्व वायुसेना अधिकारी एवं उद्यमी
भारतीय वायुसेना में चौदह वर्षों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद, ऐश्वर्या अब अपने गृहनगर देहरादून में इस नए उद्यम के साथ अपनी जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत कर चुकी हैं। उनकी यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि सफलता केवल बड़े पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने परिवार और आंतरिक शांति के साथ जीना भी एक बड़ी उपलब्धि है।







