मानसून के जाते-जाते फिर बदलेगा मिजाज, मौसम विभाग का नया अलर्ट
देश के सबसे बड़े सूबे राजस्थान में एक बार फिर मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ राज्य के पश्चिमी छोर पर चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने एक बड़े बदलाव की भविष्यवाणी कर दी है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए एक नए चक्रवाती सिस्टम ने मौसम के जानकारों की नींद उड़ा दी है। इस मौसमी उथल-पुथल का सीधा असर रेगिस्तानी इलाकों से लेकर मैदानी जिलों तक साफ तौर पर दिखाई देने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस चक्रवात के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी अपनी ताकत दिखा रहा है। इन दोनों शक्तिशाली मौसमी तंत्रों के मिलने से बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। खासकर पूर्वी राजस्थान के कई संभागों में अगले कुछ दिनों के भीतर झमाझम फुहारें गिरने के आसार हैं। इस अचानक आए बदलाव से किसानों के चेहरों पर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि कटी हुई फसल या पकने की कगार पर खड़ी फसलों के लिए यह बारिश नुकसानदेह भी साबित हो सकती है।
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इन 10 जिलों में मंडरा रहे हैं बादल, गरज-चमक के साथ होगी बौछारें
मौसम विज्ञान केंद्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी 29 सितंबर तक राज्य के लगभग 10 प्रमुख जिलों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मुख्य रूप से जयपुर और भरतपुर संभाग के जिलों में इसका असर सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। यहां आसमान में घने बादल छाए रहने के साथ-साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और कुछ स्थानों पर गर्जना के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी इस स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्थानीय निवासियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस मिजाज को देखते हुए यात्राओं की योजना बनाएं। पिछले कुछ दिनों से जिन इलाकों में उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा था, वहां इन बादलों के बरसने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
तापमान में भारी उतार-चढ़ाव: कहीं राहत तो कहीं अब भी तप रहा पारा
पिछले चौबी스 घंटों के दौरान राज्य के तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारी अंतर देखने को मिलता है। पूर्वी अंचल के जिलों जैसे अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली में बादलों की लुकाछिपी के चलते अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अकेले अलवर जिले में पारे ने लगभग पांच डिग्री सेल्सियस तक की गोताखोरी लगाई है, जिससे वहां के निवासियों को सुहाना अहसास हुआ है। इसके उलट, पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सितंबर के आखिरी दिनों में भी प्रचंड गर्मी और तीखी धूप का प्रकोप कम नहीं हुआ है।
जोधपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में पारा अभी भी सामान्य से काफी ऊपर यानी 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। दिन के समय चलने वाली गर्म हवाएं और उमस लोगों के पसीने छुड़ा रही हैं। मौसम विभाग का मानना है कि जैसे-जैसे चक्रवात का असर आगे बढ़ेगा, पश्चिमी जिलों के तापमान में भी क्रमिक गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे पूरे प्रदेश को गर्मी से राहत का एक समान अनुभव होगा।
प्रमुख शहरों का हाल: जयपुर से लेकर उदयपुर तक कैसा है मौसम
राजधानी जयपुर में पिछले कुछ दिनों से आसमान साफ और धूप खिली हुई थी, लेकिन ठंडी हवाओं के चलने से सीधी चुभन से राहत मिली है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जयपुर में भी अगले कुछ घंटों में बादलों का डेरा लग सकता है और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, उदयपुर और अजमेर जैसे संभागों में पिछले कुछ दिनों में तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे दोपहर के समय लोगों को हल्की गर्मी और बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है।
सीकर और कोटा जैसे इलाकों में भी इस मानसून सीजन के दौरान बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है, जिसके कारण उमसभरी गर्मी का असर लगातार बना हुआ है। कोटा में इस सीजन में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है, और तेज धूप के चलते लोग मानसून की विदाई से पहले एक और अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि वातावरण में ठंडक घुल सके।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
कुल मिलाकर, राजस्थान का मौसम इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। जहां एक तरफ चक्रवाती तूफान और पश्चिमी विक्षोभ का यह मेल किसानों और आम आदमी के लिए राहत की बूंदें लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ तापमान के उतार-चढ़ाव ने सेहत को लेकर भी सतर्क रहने का संदेश दिया है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और विभागों द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियों पर लगातार ध्यान देते रहें।
"राज्य के पूर्वी और मध्य भागों में सक्रिय हो रहे नए मौसमी तंत्र के कारण आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। तापमान में गिरावट से लोगों को उमस से निजात मिलने की पूरी संभावना है।" — मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर





