गोल्ड लोन के नाम पर बैंक को करोड़ों का चूना लगाने की बड़ी साजिश
देशभर के बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा और नियमों को ताक पर रखकर किस तरह से धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है, इसका एक ताजा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे का फायदा उठाकर कुछ शातिर दिमाग लोग किस हद तक जालसाजी कर सकते हैं, इसकी बानगी देखने को मिली है। बैंक से लोन लेने के लिए अमूमन लोग अपनी बहुमूल्य संपत्ति या सोने को गिरवी रखते हैं, लेकिन जब वही सोना नकली निकल जाए और बैंक अधिकारियों को इसकी भनक तक न लगे, तो यह किसी बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। हाल ही में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जिसने वित्तीय संस्थानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फेडरल बैंक की एक प्रमुख शाखा में सोने के आभूषणों के एवज में भारी-भरकम लोन हासिल करने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया। आरोपियों ने न केवल नकली सोने को उच्च गुणवत्ता वाला असली सोना बताकर गिरवी रखा, बल्कि बैंक के मूल्यांकनकर्ताओं और बिचौलियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की इस राशि को आसानी से अपने खातों में ट्रांसफर भी करवा लिया। जब तक बैंक प्रबंधन को इस जालसाजी की भनक लगती, तब तक आरोपी एक बड़ी रकम लेकर चंपत हो चुके थे। हालांकि, समय रहते बरती गई सतर्कता और एक छोटी सी चूक ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।
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ऐसे खुला राज: जब बैंक अधिकारियों के शक ने खोल दी पोल
इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत तब हुई जब एक स्थानीय व्यक्ति कुछ आभूषण लेकर बैंक शाखा पहुंचा और गोल्ड लोन की मांग की। उसके साथ फिनटेक कंपनी का एक प्रतिनिधि भी मौजूद था। बैंक के पैनल में शामिल अधिकृत वैल्यूअर ने उन आभूषणों की जांच कर उन्हें पूरी तरह असली प्रमाणित कर दिया। आम तौर पर वैल्यूअर की रिपोर्ट पर भरोसा कर लिया जाता है, लेकिन बैंक अधिकारियों को उस व्यक्ति और उसके साथ आए एजेंट के हाव-भाव और गतिविधियों पर कुछ संदेह हुआ। अधिकारियों ने बिना समय गंवाए उन आभूषणों का दोबारा और गहनता से सत्यापन करवाने का निर्णय लिया।
जब उन आभूषणों की उच्चस्तरीय और तकनीकी जांच की गई, तो बैंक अधिकारियों के होश उड़ गए। कागजों पर खरा और शुद्ध बताया जाने वाला सोना अंदर से पूरी तरह नकली निकला। बैंक कर्मचारियों ने तुरंत सतर्क होते हुए संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे चालाकी से वहां से निकलने में कामयाब रहे। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने केवल उसी एक मामले तक सीमित न रहकर, हाल के दिनों में स्वीकृत किए गए अन्य गोल्ड लोन खातों की भी आंतरिक ऑडिट करवाने का कड़ा फैसला लिया। इस ऑडिट के जो नतीजे सामने आए, उन्होंने बैंक के उच्च अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
एक या दो नहीं, बल्कि 20 खातों में निकला नकली सोना
प्रारंभिक संदेह के आधार पर जब बैंक ने पिछले कुछ महीनों में खोले गए गोल्ड लोन खातों की फाइलें खंगालनी शुरू कीं, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में यह बात सामने आई कि यह कोई इक्का-दुक्का गलती नहीं थी, बल्कि एक सुव्यवस्थित ठगी का प्लान था। कुल 20 ऐसे लोन खाते पाए गए, जिनमें गिरवी रखा गया सोना पूरी तरह नकली था। इन खातों के जरिए बैंक से कुल 1.46 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बतौर लोन निकाली जा चुकी थी।
जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से अधिकांश खाते एक खास फिनटेक चैनल के माध्यम से रेफर किए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि इन सभी संदिग्ध मामलों में आभूषणों का मूल्यांकन करने वाला वैल्यूअर भी एक ही व्यक्ति था। छह लोगों ने तो एक से अधिक यानी दो-दो खातों के जरिए गोल्ड लोन ले रखा था। एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम भी इन फर्जी लोन खातों में शामिल मिले, जिससे यह साफ हो गया कि यह सब सुनियोजित तरीके से पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया था।
वैल्यूअर और फिनटेक कंपनियों की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे प्रकरण ने वित्तीय संस्थानों के साथ काम करने वाले थर्ड-पार्टी वेंडर्स, फिनटेक प्लेटफॉर्म्स और अधिकृत वैल्यूअर्स की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बैंक हमेशा अपने अधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, क्योंकि वे सोने की शुद्धता जांचने के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लेकिन इस मामले में वैल्यूअर की संदिग्ध भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि कैसे कुछ भ्रष्ट लोग अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करके आपराधिक षड्यंत्र में शामिल हो जाते हैं।
बैंक की ओर से दी गई आधिकारिक शिकायत में साफ आरोप लगाया गया है कि फिनटेक कंपनियों के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में ऐसे संदिग्ध और फर्जी खातों को बैंक तक पहुंचाया और लोन पास करवाने में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, वैल्यूअर ने अपनी पेशेवर जिम्मेदारी को दरकिनार करते हुए नकली सोने को भी असली प्रमाणित कर दिया। बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या बैंक के भीतर का कोई कर्मचारी भी इस साजिश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मददगार रहा है।
"बैंक के नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर जिस तरह से सुनियोजित तरीके से नकली आभूषणों के एवज में करोड़ों रुपये का ऋण हासिल किया गया है, वह गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। हमने सभी संदिग्ध खातों और संलिप्त लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस में मामला दर्ज कराया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।" — बैंक प्रबंधन, आधिकारिक बयान
18 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज, पुलिस जांच में खुलेंगे कई और राज
बैंक की वरिष्ठ प्रबंधक द्वारा दी गई विस्तृत शिकायत के आधार पर स्थानीय पुलिस थाने में कुल 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस लंबी फेहरिस्त में लोन लेने वाले मुख्य व्यक्ति, उनके परिवार के सदस्य, फिनटेक कंपनियों के प्रतिनिधि और अधिकृत वैल्यूअर समेत कई नाम शामिल हैं। पुलिस अब सभी आरोपियों की तलाश में जुट गई है और उनकी कॉल डिटेल तथा बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।
यह मामला इस बात का भी एक बड़ा उदाहरण है कि कैसे तकनीकी और डिजिटल माध्यमों के दौर में धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बैंकों को अपनी आंतरिक सुरक्षा और ऑडिट प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करना होगा। साथ ही, थर्ड-पार्टी एजेंसियों और वैल्यूअर्स की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े नियम बनाने होंगे ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई और वित्तीय संस्थानों के धन को इस प्रकार सुरक्षित रखा जा सके। पुलिस की यह जांच आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकती है।







