नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय आसमान में उस वक्त भारी तनाव फैल गया जब एक ही दिन में देश की दो बड़ी विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सुरक्षा संबंधी गंभीर धमकियां मिलीं। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान को अचानक बम और हाईजैक की संदिग्ध सूचना मिली। इस खतरनाक सूचना के मिलते ही देश के विमानन सुरक्षा तंत्र में तुरंत लाल अलर्ट जारी कर दिया गया। पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क साधा और उड़ान को फौरन नजदीकी सुरक्षित एयरपोर्ट की तरफ मोड़ने का फैसला किया। जमीन पर बैठे सुरक्षा अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं क्योंकि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।
इस बीच, दूसरी बड़ी घटना कुवैत से दिल्ली आ रही इंडिगो की एक अन्य फ्लाइट के साथ घटी। इस विमान को भी हवा में ही बम से उड़ाने और हाईजैक करने की धमकी मिली, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर की सांसें अटक गईं। आनन-फानन में दोनों विमानों के पायलटों ने आपातकालीन प्रोटोकॉल का पूरी तत्परता से पालन किया। एयर इंडिया के विमान को राजस्थान के जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया, जबकि इंडिगो के विमान को गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। दोनों ही मामलों में विमानों के जमीन पर सुरक्षित उतरते ही राहत की सांस ली गई और यात्रियों में मची अफरातफरी को शांत करने का प्रयास शुरू हुआ।
जयपुर और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा घेरा
विमानों के जमीन पर उतरते ही स्थानीय पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वाड, सीआईएसएफ और खुफिया एजेंसियों के जवान हरकत में आ गए। जयपुर और अहमदाबाद के दोनों हवाई अड्डों पर युद्धस्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। यात्रियों को एक-एक करके बेहद सावधानी से विमान से नीचे उतारा गया और उनके सामान की गहन जांच की गई। सुरक्षा बलों ने दोनों विमानों को आइसोलेशन बे में खड़ा कर दिया था ताकि किसी भी संभावित खतरे को तुरंत बेअसर किया जा सके। एयरपोर्ट परिसरों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और मीडिया तथा आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। हर एक यात्री के चेहरे पर लंबी उड़ान के बाद अचानक आए इस संकट का खौफ साफ झलक रहा था।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि ये सभी धमकियां सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए फैलाई गई अफवाहें या फिर शरारती तत्वों द्वारा भेजी गई फर्जी सूचनाएं हो सकती हैं। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह का जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं थीं। इसी वजह से मानक संचालन प्रक्रिया के तहत हर एक यात्री और उसके सामान की दो-तीन स्तरों पर कड़ी तलाशी ली गई। जांच टीमों ने विमानों के चप्पे-चप्पे की मेटल डिटेक्टर और खोजी कुत्तों की मदद से बारीकी से पड़ताल की। गनीमत यह रही कि घंटों चली इस गहन तलाशी के बाद दोनों ही विमानों में कोई भी संदिग्ध या खतरनाक वस्तु नहीं मिली, जिससे यह साफ हो गया कि यह सिर्फ एक डरावनी अफवाह थी।
पिछले कुछ महीनों में फर्जी धमकियों के मामलों में आया भारी उछाल
पिछले कुछ हफ्तों से देश के अलग-अलग विमानों और एयरपोर्ट्स को इस तरह की फर्जी धमकियां मिलने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कभी सोशल मीडिया के जरिए तो कभी ईमेल के माध्यम से अज्ञात लोगों द्वारा विमानों में बम होने या उन्हें हाईजैक किए जाने का दावा किया जाता है। हालांकि जांच के अंत में ज्यादातर मामलों में ये धमकियां झूठी साबित होती हैं, लेकिन इनसे एयरलाइंस को करोड़ों रुपए का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, हजारों यात्रियों को घंटों तक मानसिक प्रताड़ना और भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। देश के विमानन सुरक्षा नियामक अब इन फर्जी धमकियों के पीछे छिपे असामाजिक तत्वों और साइबर अपराधियों की पहचान करने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अब भारतीय एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा के नए और अत्याधुनिक प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं। खुफिया विभाग उन सभी डिजिटल स्रोतों और आईपी एड्रेस को खंगाल रहा है जहां से इस तरह की झूठी सूचनाएं फैलाई जाती हैं। एयरलाइंस कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी हर सूचना को गंभीरता से लें लेकिन साथ ही अफवाहों से बचने के लिए तुरंत सही जानकारी साझा करें। फिलहाल जयपुर और अहमदाबाद में सुरक्षित उतारे गए दोनों विमानों की तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
यात्रियों के अनुभव और एयरलाइंस की आगे की बड़ी रणनीति
जयपुर और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों ने मीडिया से बात करते हुए अपने डरावने अनुभवों को साझा किया। यात्रियों ने बताया कि जब उन्हें बीच हवा में पायलट द्वारा खतरे की सूचना दी गई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई थी। कई यात्री अपनों से फोन पर बात करते हुए रो पड़े थे क्योंकि उन्हें लगा था कि शायद वे अब जिंदा वापस नहीं लौट पाएंगे। हालांकि, सुरक्षाबलों और एयरलाइंस के कर्मचारियों ने बाद में स्थिति को बहुत ही संयम और समझदारी से संभाला। यात्रियों को समय पर पानी, खाना और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था की जानकारी दी गई ताकि उनका मानसिक तनाव कुछ कम किया जा सके।
नागरिक उड्डयन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन लगातार मिल रही धमकियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। सरकार ने संसद में भी यह स्पष्ट किया है कि विमानों को बम से उड़ाने या हाईजैक करने की झूठी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आरोपियों को नो-फ्लैंड लिस्ट में डालने के साथ-साथ लंबी जेल की सजा का प्रावधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी रिपोर्ट से यह साफ होता है कि देश का सुरक्षा तंत्र हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है, लेकिन शरारती तत्वों की ऐसी हरकतों पर लगाम कसने के लिए कड़े कानूनी शिकंजे की सख्त जरूरत है।




