माइग्रेन के मरीजों के लिए क्यों खतरनाक है गलत खानपान
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और तनावपूर्ण माहौल के बीच सिरदर्द आम समस्या बन चुका है। हालांकि, जब यह दर्द माइग्रेन का रूप ले लेता है, तो मरीज का जीना मुहाल हो जाता है। माइग्रेन से पीड़ित लोग तेज रोशनी, आवाज और गंध के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इन सब के बीच, हमारा खानपान भी एक ऐसा पहलू है जिस पर बहुत कम लोग ध्यान देते हैं, लेकिन यह माइग्रेन के हमलों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। कई बार रसोई में रखी या रोजाना खाई जाने वाली कुछ खास चीजें इस गंभीर दर्द को अचानक ट्रिगर कर देती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन के ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। जो चीज एक इंसान के लिए बिल्कुल सामान्य है, वही किसी दूसरे व्यक्ति के सिर में असहनीय दर्द का कारण बन सकती है। इसलिए यह समझना बेहद आवश्यक है कि आपकी थाली में क्या परोसा जा रहा है और उसका आपके मस्तिष्क पर क्या असर पड़ रहा है। यदि आप भी बार-बार उठने वाले सिरदर्द से परेशान हैं, तो आपको अपनी डाइट की गहराई से समीक्षा करने की जरूरत है ताकि छिपे हुए दुश्मनों की पहचान की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान में थोड़ी सी समझदारी बरतकर माइग्रेन के हमलों की आवृत्ति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए किसी भी खाद्य पदार्थ को आंख मूंदकर छोड़ने के बजाय वैज्ञानिक और सुनियोजित तरीका अपनाना चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं उन प्रमुख खाद्य पदार्थों के बारे में जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ावा देते हैं और जिनसे दूरी बनाना ही समझदारी है।
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प्रोसेस्ड मीट और एज्ड चीज़ बढ़ाते हैं मुश्किलें
बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड मीट जैसे कि सॉसेज, सलामी, बेकन और हैम खाने में भले ही स्वादिष्ट लगें, लेकिन वे सेहत के लिए कई मायनों में हानिकारक हो सकते हैं। इन उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नाइट्रेट और नाइट्राइट जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ये रसायन शरीर के भीतर पहुंचते ही रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करते हैं और संवेदनशील लोगों में अचानक तेज सिरदर्द का कारण बन जाते हैं।
इसके अलावा, पुरानी यानी एज्ड चीज़ जैसे चेडर, परमेसन और ब्लू चीज़ में 'टायरामाइन' नामक एक प्राकृतिक कंपाउंड पाया जाता है। जैसे-जैसे चीज़ पुरानी होती जाती है, टायरामाइन की मात्रा बढ़ती जाती है। यह तत्व मस्तिष्क की नसों को उत्तेजित करता है, जिसके परिणामस्वरूप माइग्रेन का गंभीर हमला हो सकता है। यदि आपको भी चीज़ खाने के बाद सिर भारी लगने की शिकायत रहती है, तो इनसे किनारा कर लेना ही बेहतर विकल्प है।
"प्रोसेस्ड मीट और पुरानी चीज़ में मौजूद रसायन व कंपाउंड संवेदनशील तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे माइग्रेन का ट्रिगर होना बहुत आम बात है।" — डॉ. अदिति प्रसाद, क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट
चॉकलेट और आर्टिफिशियल स्वीटनर का छिपा हुआ खतरा
चॉकलेट का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, और कई लोग तनाव दूर करने के लिए इसका सहारा लेते हैं। हालांकि, माइग्रेन के मरीजों के लिए यह खुशी का सौदा साबित नहीं होता। चॉकलेट में कैफीन और बीटा-फेनिलथिलामाइन जैसे तत्व होते हैं, जो सिरदर्द को ट्रिगर कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार माइग्रेन का दौरा शुरू होने से ठीक पहले शरीर को चॉकलेट की अत्यधिक क्रेविंग होती है, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि चॉकलेट ने दर्द को बढ़ाया या दर्द के कारण उसकी इच्छा हुई।
शक्कर के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर, विशेषकर एस्पार्टेम, भी सिरदर्द के मरीजों के लिए अच्छे नहीं माने जाते। ये कृत्रिम मिठास तंत्रिका तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसके अलावा, रेस्टोरेंट के खानपान या पैक्ड फूड्स में स्वाद बढ़ाने के लिए डाला जाने वाला मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी एमएसजी (MSG) भी कई लोगों में माइग्रेन के गंभीर हमलों की मुख्य वजह बनता है।
अल्कोहल और कैफीन का असंतुलन
शराब का सेवन वैसे भी सेहत के लिए हानिकारक है, लेकिन माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए यह किसी जहर से कम नहीं है। विशेष रूप से रेड वाइन, बीयर और अन्य मादक पेय शरीर में डिहाइड्रेशन पैदा करते हैं और मस्तिष्क में ब्लड फ्लो को बदल देते हैं, जिससे कुछ ही घंटों में तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। शरीर में पानी की कमी और अल्कोहल का यह मेल माइग्रेन के मरीजों को बिस्तर पकड़ने के लिए मजबूर कर सकता है।
कैफीन को लेकर स्थिति थोड़ी पेचीदगियों से भरी है। सीमित मात्रा में ली गई कॉफी या चाय कई बार सिरदर्द से राहत दिला सकती है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन या अचानक से इसका नियमित इंटेक बंद कर देना सिरदर्द को न्यौता देता है। जब शरीर को रोजाना मिलने वाली कैफीन अचानक नहीं मिलती, तो विड्रॉल सिम्पटम्स के रूप में भयंकर माइग्रेन का हमला हो सकता है। इसलिए कैफीन को अचानक छोड़ने के बजाय एक तय मात्रा में उसका संतुलन बनाए रखना ज्यादा समझदारी है।
फूड डायरी बनाकर करें व्यक्तिगत ट्रिगर्स की पहचान
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर माइग्रेन पीड़ित को ऊपर बताए गए सभी खाद्य पदार्थों से भागने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने से न केवल आपका खानपान सीमित हो जाएगा, बल्कि शरीर में पोषण की कमी भी हो सकती है। हर इंसान का शरीर अलग होता है और उसके ट्रिगर्स भी भिन्न होते हैं। इसलिए सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप कुछ हफ़्तों तक एक 'हेल्थ और फूड डायरी' तैयार करें।
इस डायरी में आप रोजाना जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसे नोट करें। इसके साथ ही अपनी नींद के घंटे, पानी पीने की मात्रा, तनाव का स्तर और सिरदर्द होने का सटीक समय भी दर्ज करें। कुछ हफ्तों के रिकॉर्ड के बाद आपको एक पैटर्न समझ में आने लगेगा कि कौन सी खास चीज खाने के बाद आपको सिरदर्द हुआ था। इस वैज्ञानिक तरीके से आप बिना किसी डर के अपनी डाइट को मैनेज कर सकते हैं और अनावश्यक चीजों को अपनी थाली से बाहर कर सकते हैं।
खानपान के अलावा इन बातों का भी रखें खास ख्याल
यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि केवल भोजन ही माइग्रेन का इकलौता कारण नहीं है। कई बार अनिमयति जीवनशैली, समय पर खाना न खाना, शरीर में पानी की कमी होना, पूरी नींद न लेना, अत्यधिक मानसिक तनाव, हार्मोनल बदलाव और लगातार कंप्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन के सामने बैठे रहना भी इस बीमारी को बुलावा देता है। यदि सिरदर्द बार-बार होता है, उसकी तीव्रता बहुत अधिक है, या इसके साथ चक्कर आना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, ठीक से बोल न पाना जैसी समस्याएं जुड़ी हैं, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करना बेहद आवश्यक है।








