'द फ्रीलान्स' के लिए ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार और नेपाल की सीमा पर स्थित गंडक नदी एक बार फिर अपने विकराल रूप में है। पिछले कुछ घंटों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश ने उत्तर बिहार के मैदानी इलाकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वाल्मीकि नगर गंडक बराज और आसपास के इलाकों से मिल रही जमीनी रिपोर्ट बताती है कि हालात तेजी से गंभीर हो रहे हैं, और प्रशासन की सांसे अटकी हुई हैं।
वाल्मीकि नगर बराज और डिस्चार्ज के आंकड़े
नदी के जलस्तर पर पैनी नजर रख रहे जल संसाधन विभाग के अनुसार, स्थिति लगातार बदल रही है। शुरुआती आंकड़ों में वाल्मीकि नगर गंडक बराज पर अपस्ट्रीम डिस्चार्ज 1,91,200 क्यूसेक दर्ज किया गया, वहीं नेपाल के देवघाट (Devghat) से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण डिस्चार्ज बढ़कर 2,19,677 क्यूसेक तक पहुंच गया। कुछ इलाकों में तो जलप्रवाह तीन लाख क्यूसेक के पार जाने की सूचना है, जिससे निचले इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल है।
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पश्चिम चंपारण और बगहा में टूटे तटबंध
हमारी फील्ड टीम ने जब पश्चिम चंपारण के बगहा और तटीय इलाकों का दौरा किया, तो तबाही के निशान साफ दिखाई दिए। नेपाल से अचानक छोड़े गए पानी के दबाव को चंपारण तटबंध झेल नहीं पाया और वह क्षतिग्रस्त हो गया। तटबंध टूटने से गंडक का सैलाब सीधे रिहायशी इलाकों और बस्तियों में प्रवेश कर गया है। किसानों की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
गोपालगंज तक पहुंचा उफान का असर
गंडक के इस आक्रामक तेवर का असर सिर्फ पश्चिम चंपारण तक सीमित नहीं है, बल्कि downstream में स्थित गोपालगंज जिले में भी नदी उफान पर है। यहाँ कम से कम 7 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चेतावनी के बावजूद समय पर पुख्ता इंतजामात न होने के कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। संपर्क मार्ग कट चुके हैं और प्रशासनिक मदद का इंतजार किया जा रहा है।
प्रशासनिक तैयारी और भविष्य का संकट
"स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील तटबंधों पर इंजीनियरों की टीम को तैनात कर दिया गया है और प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने का काम प्राथमिकता पर है।" - स्थानीय प्रशासनिक सूत्र
हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर होने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। यदि नेपाल की ओर से पानी का डिस्चार्ज और बढ़ता है, तो गोपालगंज, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर तक के निचले इलाकों में तबाही का दायरा और विस्तृत हो सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस आपदा पर लगातार ग्राउंड जीरो से अपडेट देता रहेगा।








