प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर ठगी का काला खेल
देशभर में गरीबों और जरूरतमंदों को छत मुहैया कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना अब शातिर ठगों के निशाने पर आ गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना की लोकप्रियता और लोगों के अपने आशियाने के सपने का फायदा उठाकर ठग नए-नए तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक अकाउंटेंट को सरकारी योजना में आसानी से फ्लैट निकलवाने का झांसा दिया गया और उससे भारी-भरकम रकम ऐंठ ली गई। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ठगी करने वाले लोग अब अपनों और पुरानी जान-पहचान का इस्तेमाल करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित प्रवीन पाल पिछले करीब 16 वर्षों से अकाउंटेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपने दैनिक और दफ्तर के जरूरी दस्तावेजों, टाइपिंग तथा शपथ-पत्र आदि के सिलसिले में उनका नवयुग मार्केट स्थित एक टाइपिंग ऑपरेटर के यहां आना-जाना था। यहीं उनकी मुलाकात गौरव वर्मा नामक व्यक्ति से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच व्यापारिक और सामान्य बोलचाल का संबंध प्रगाढ़ हो गया। लंबी जान-पहचान होने की वजह से प्रवीन पाल को गौरव पर पूरा भरोसा हो गया था, और यही भरोसा उनके लिए भारी साबित हुआ।
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पुरानी जान-पहचान और भरोसे का उठाया गया फायदा
अपराध की दुनिया में यह बात अक्सर सच साबित होती है कि सबसे बड़े धोखे वे ही लोग देते हैं जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा होता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। वर्ष 2024 के दौरान प्रवीन पाल और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने मिलकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट के लिए आधिकारिक रूप से आवेदन किया था। जब बातचीत का दौर चल रहा था, तब प्रवीन ने अनजाने में यह बात गौरव वर्मा को भी बता दी। गौरव ने इस बात का फायदा उठाने की सोची और खुद को सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के करीब बताते हुए आसानी से फ्लैट पास करवा देने का दावा किया।
आरोपी गौरव ने प्रवीन पाल को विश्वास में लेते हुए कहा कि उसकी पहुंच ऊपर तक है और वह मामूली प्रक्रिया के जरिए उनके पूरे परिवार का आवेदन पास करवा देगा। पीड़ित परिवार अपने सिर पर पक्की छत और सरकारी योजना का लाभ पाने की उम्मीद में उसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ गया। आरोपी ने योजना के नाम पर पहले कुछ पैसों की मांग की, जिसे पीड़ित ने धीरे-धीरे करके चुका दिया। आरोपी के झांसे में आकर प्रवीन पाल ने केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी पैसे दे दिए।
परिवार के पांच सदस्यों से हड़पी गई बड़ी रकम
ठगी का यह दायरा सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि शातिर आरोपी ने सुनियोजित तरीके से पूरे परिवार को अपनी जालसाजी में फंसाया। पीड़ित प्रवीन पाल के मुताबिक, आरोपी ने उनके भाई सुनील पाल, सुनील की पत्नी प्रियंका, रमेश पाल और नितिन से भी फ्लैट दिलाने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे वसूले। इस प्रकार कुल मिलाकर 1.90 लाख रुपये की नकदी आरोपी को सौंपी गई। सभी सदस्यों को यह उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक शानदार आशियाना मिल जाएगा, लेकिन उन्हें यह अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि वे किसी बड़े फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं।
पैसे देने के काफी समय बीत जाने के बाद भी जब फ्लैट आवंटन को लेकर कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं आई, तो पीड़ित परिवार की चिंता बढ़ने लगी। प्रवीन पाल ने जब गौरव वर्मा से संपर्क करके फ्लैट के संबंध में जानकारी मांगी, तो आरोपी ने हर बार टालमटोल करना शुरू कर दिया। कभी कागजी प्रक्रिया में देरी होने का बहाना बनाया गया, तो कभी फाइल आगे बढ़ने की झूठी कहानियां सुनाई गईं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया, तो पीड़ितों को समझ आ गया कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।
रकम मांगने पर घर से गायब मिला मुख्य आरोपी
जब पीड़ितों ने अपने खून-पसीने की कमाई वापस मांगने के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी गौरव वर्मा और उसके परिवार के तेवर पूरी तरह बदल गए। प्रवीन पाल जब पैसे वापस लेने के लिए उसके ठिकाने पर पहुंचे या उससे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, तो आरोपी के घरवाले तरह-तरह के बहाने बनाने लगे। परिजनों की तरफ से यह कहकर बात टाल दी जाती थी कि गौरव घर पर नहीं है और कहीं बाहर गया हुआ है। बार-बार संपर्क करने के बावजूद जब आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया, तब जाकर पीड़ित ने कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
"प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बैंक खातों और पैसों के लेनदेन के साक्ष्यों की जांच के बाद नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" — प्रियाश्री पाल, एसीपी वेव सिटी
पुलिस की जांच और आम जनता के लिए बड़ी सीख
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित प्रवीन पाल की लिखित शिकायत के आधार पर 20 सितंबर को ही आरोपी गौरव वर्मा के खिलाफ क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने और लोगों को इस तरह के फर्जीवाड़े का शिकार बनाया है। इसके साथ ही, पैसों के लेनदेन के डिजिटल या अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत सबूत पेश किए जा सकें।
यह घटना देश के तमाम आम नागरिकों के लिए एक बड़ा सबक है। सरकारी योजनाओं का लाभ हमेशा निर्धारित आधिकारिक पोर्टलों, बैंकों या सरकारी दफ्तरों के माध्यम से ही लिया जाना चाहिए। किसी भी बिचौलिए, एजेंट या निजी व्यक्ति के झांसे में आकर कभी भी नगद भुगतान नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजना के नाम पर पैसे की मांग करता है, तो इसकी तुरंत सूचना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या पुलिस को देनी चाहिए ताकि ऐसे ठगों पर समय रहते लगाम लगाई जा सके। सतर्कता ही इस प्रकार के फ्रॉड से बचने का एकमात्र अचूक उपाय है।







