गोंडा में रसोई गैस उपभोक्ताओं की लापरवाही पर प्रशासन सख्त
देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर कई निर्देश जारी किए जाते हैं। इसी कड़ी में रसोई गैस कनेक्शनधारकों के लिए ई-केवाईसी यानी इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जहां तमाम चेतावनियों के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने इस महत्वपूर्ण काम को अब तक नजरअंदाज किया है। प्रशासनिक और विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में लगभग 70 हजार ऐसे घरेलू गैस उपभोक्ता हैं जिन्होंने तय समय सीमा बीतने के करीब आने के बावजूद अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं कराई है।
इस स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम कंपनियों और जिला प्रशासन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और सार्वजनिक सूचना देने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं द्वारा औपचारिकता पूरी न करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इन उपभोक्ताओं के लिए अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि यदि समय रहते डेटा अपडेट नहीं किया गया, तो उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
विभागीय जानकारों का मानना है कि कई उपभोक्ता इस प्रक्रिया को या तो जरूरी नहीं समझ रहे हैं या फिर उन्हें इसके नियमों की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि, अब स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और किसी भी तरह की ढिलाई के लिए प्रशासन की तरफ से कोई अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद नहीं है।
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30 सितंबर की डेडलाइन: 1 अक्टूबर से ब्लॉक हो जाएंगे गैस कनेक्शन
पेट्रोलियम कंपनियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाई है, उनके लिए 30 सितंबर आखिरी तारीख है। यदि कोई भी उपभोक्ता इस तय सीमा के भीतर अपना प्रमाणीकरण नहीं कराता है, तो 1 अक्टूबर से उसका रसोई गैस कनेक्शन पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया जाएगा। कनेक्शन ब्लॉक होते ही संबंधित उपभोक्ता को घरेलू गैस सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा, जिससे उनकी रसोई का बजट और व्यवस्था सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
गैस कनेक्शन बंद होने के साथ ही उपभोक्ताओं को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ भी मिलना बंद हो जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए ई-केवाईसी का होना अनिवार्य शर्त बना दिया गया है। ऐसे में, यदि किसी उपभोक्ता का खाता या कनेक्शन इस प्रक्रिया से वंचित रह जाता है, तो उसे बाजार मूल्य पर महंगा सिलेंडर खरीदने की मजबूरी उठानी पड़ सकती है.
स्थानीय स्तर पर इस चेतावनी के बाद हजारों उपभोक्ताओं में हड़कंप मच गया है। लोग अंतिम समय की भीड़भाड़ से बचने के लिए अब आनन-फानन में अपनी गैस एजेंसियों का रुख कर रहे हैं और दस्तावेजों को दुरुस्त कराने में जुट गए हैं ताकि उनका कनेक्शन सुरक्षित रह सके।
घर बैठे मोबाइल ऐप से भी पूरी की जा सकती है प्रक्रिया
प्रशासन और गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि हर किसी को अपनी एजेंसी के चक्कर काटने की कोई अनिवार्यता नहीं है। यदि किसी कारणवश उपभोक्ता के लिए एजेंसी जाना संभव नहीं है, तो वे बेहद आसान डिजिटल तरीकों का सहारा ले सकते हैं। सभी प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप्स प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं, जिनके जरिए घर बैठे कुछ ही मिनटों में ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है।
जिला पूर्ति अधिकारी कुमार दिनेश प्रताप सिंह ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जिन घरेलू गैस कनेक्शनधारकों का प्रमाणीकरण अभी तक लंबित है, वे तत्काल प्रभाव से अपनी संबंधित एजेंसी से संपर्क करें या मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए यह अंतिम अवसर प्रदान किया गया है, और त्योहारों के दिनों में किसी भी प्रकार की रुकावट से बचने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है।
"जिले के सभी घरेलू गैस उपभोक्ताओं से अपील की जाती है कि वे किसी भी अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना तुरंत अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करा लें। ऐसा न करने पर 1 अक्टूबर से गैस आपूर्ति बाधित हो सकती है और आपको सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो जाएगा।" — कुमार दिनेश प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी, गोंडा
त्योहारी सीजन से पहले मची खलबली, एजेंसियों पर उमड़ी भीड़
जैसे-जैसे 30 सितंबर की तारीख नजदीक आ रही है, गोंडा जिले की विभिन्न गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग सुबह से ही अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं ताकि उनका कनेक्शन रद्द होने से बच जाए। कई लोग तकनीकी जानकारी के अभाव में एजेंसी के कर्मचारियों की मदद ले रहे हैं, जबकि युवा वर्ग अपने स्मार्टफोन के जरिए दूसरों की भी सहायता कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की डिजिटल प्रक्रियाएं उपभोक्ताओं की सुरक्षा और फर्जी कनेक्शनों को रोकने के लिए बेहद आवश्यक हैं। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण अक्सर ग्रामीण इलाकों के लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन ने भी विभिन्न माध्यमों से अपील की है कि लोग पैनिक न हों बल्कि समझदारी दिखाते हुए समय रहते इस औपचारिकता को पूरा कर लें।
निष्कर्ष और आगे की राह
गोंडा जिले में 70 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की अधूरी ई-केवाईसी एक बड़ा प्रशासनिक और उपभोक्ता हित का मुद्दा बन गया है। पेट्रोलियम कंपनियों और जिला पूर्ति विभाग की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि नियमों के पालन में अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए यही समझदारी होगी कि वे अंतिम क्षणों का इंतजार किए बिना आज ही अपने गैस कनेक्शन का प्रमाणीकरण सुनिश्चित करें, ताकि आने वाले त्योहारों के दिनों में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी रसोई का चूल्हा बिना किसी बाधा के जलता रहे।



