स्कूली शिक्षा के बाद की उधेड़बुन और सही दिशा की तलाश
कक्षा 12वीं की दहलीज पार करते ही हर छात्र के मन में एक ही सवाल सबसे बड़ा होता है—अब आगे क्या? बोर्ड परीक्षाओं के तनाव से बाहर आते ही उच्च शिक्षा (यूजी पाठ्यक्रम) और अपने भविष्य के करियर को लेकर एक अनजान सा डर और उत्सुकता दोनों साथ-साथ चलते हैं। इसी महत्वपूर्ण पड़ाव पर सही मार्गदर्शन मिलने से न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वे अपने लिए सही और सटीक रास्ता चुन पाते हैं। हाल ही में ग्रिजली विद्यालय के विद्यार्थी सेवा प्रकोष्ठ ने इसी उद्देश्य के साथ एक खास पहल की, जहां 12वीं के विज्ञान और वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों के लिए एक व्यापक करियर काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया गया।
इस विशेष शैक्षणिक सत्र का मुख्य विषय 'अपनी यूजी यात्रा को जानें: पाठ्यक्रम, छात्रवृत्ति व प्रवेश' रखा गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर उम्र के विद्यार्थियों को बदलते दौर की शिक्षा प्रणाली, प्रवेश प्रक्रियाओं और स्कॉलरशिप के तमाम अवसरों से परिचित कराना था। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल पारंपरिक डिग्रियां ही काफी नहीं हैं, बल्कि यह जानना भी बेहद जरूरी है कि किस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं सबसे अधिक हैं और कौन सा कोर्स छात्र की निजी क्षमताओं के अनुकूल बैठेगा।
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विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और अरका जैन विश्वविद्यालय की सहभागिता
इस शैक्षणिक और प्रेरणादायक सत्र में जमशेदपुर स्थित अरका जैन यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित करियर काउंसलर सुजीत कुमार और एडमिशन मैनेजर सुमित कुमार बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उन्हें करियर की दुनिया के अनछुए पहलुओं से रूबरू कराया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि छात्र किसी के दबाव में आकर या भेड़चाल का हिस्सा बनकर अपने विषय न चुनें, बल्कि अपनी स्वाभाविक रुचि, कौशल और व्यक्तिगत क्षमता को परखकर ही आगे बढ़ें।
विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि आज का दौर केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे में युवाओं को लीक से हटकर सोचने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि यदि वे अपनी मेहनत और सही योजना के साथ आगे बढ़ेंगे, तो देश और दुनिया के बाजार में अवसरों की कोई कमी नहीं है। इस दौरान विद्यार्थियों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी जिज्ञासाओं से जुड़े कई सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका उन्होंने संतोषजनक उत्तर दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के अत्याधुनिक और उभरते विकल्प
आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर और तकनीकी क्षेत्र का बोलबाला है। काउंसलिंग सत्र के दौरान कंप्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़े पाठ्यक्रमों पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया। छात्रों को बीसीए, बीएससी आईटी के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे अत्याधुनिक और हाई-पेइंग कोर्सेज के बारे में विस्तार से समझाया गया।
तकनीकी शिक्षा के पारंपरिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल के साथ-साथ मेकाट्रॉनिक्स, एयरोनॉटिकल और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे आधुनिक विकल्पों की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन क्षेत्रों में आने वाले समय में रोजगार के अपार द्वार खुलने वाले हैं, बशर्ते छात्र तकनीकी रूप से खुद को पूरी तरह तैयार रखें।
फार्मेसी, मैनेजमेंट और क्रिएटिव फील्ड्स में संभावनाओं का पिटारा
केवल तकनीकी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि मेडिकल, पैरामेडिकल, बिजनेस मैनेजमेंट और क्रिएटिव आर्ट्स के क्षेत्र में भी करियर की अनगिनत संभावनाएं मौजूद हैं। सत्र के दौरान फार्मेसी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग और मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी जैसे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कोर्सों की उपयोगिता समझाई गई। इसके अलावा बीबीए, बीकॉम, बिजनेस एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग और बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में कॉरपोरेट जगत की मांगों पर रोशनी डाली गई।
क्रिएटिव माइंड वाले छात्रों के लिए कानून (लॉ), होटल प्रबंधन, पर्यटन, पत्रकारिता, मीडिया, फिल्म निर्माण, फोटोग्राफी, एनिमेशन और डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध सुनहरे अवसरों से भी अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि आज की दुनिया में क्रिएटिविटी और कम्यूनिकेशन स्किल्स की बहुत बड़ी मांग है, और यदि किसी छात्र की रुचि कला या मीडिया में है, तो वह इन क्षेत्रों में भी आसमान छू सकता है।
"करियर का चुनाव कभी भी दूसरों की देखा-देखी या दबाव में आकर नहीं करना चाहिए। छात्र हमेशा अपनी आंतरिक रुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को परखकर ही अपने उच्च शिक्षा के मार्ग का चयन करें। आज के दौर में पारंपरिक डिग्रियों के साथ-साथ विशेष स्किल्स का होना भी उतना ही आवश्यक है।" — सुजीत कुमार, करियर काउंसलर
कार्यक्रम का समापन और भविष्य की उम्मीदें
यह पूरा काउंसलिंग सत्र न सिर्फ ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसने विद्यार्थियों के मन में उठ रहे तमाम संशयों को भी दूर किया। कार्यक्रम की शुरुआत सहायक व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक सुमित के. सिन्हा के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। सत्र के अंत में विद्यार्थी सेवा प्रकोष्ठ के प्रभारी सुधांशु कुमार ने आए हुए सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और अंत में सुमित के. सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस तरह का आयोजन निश्चित रूप से स्कूली बच्चों के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होता है।







