शादी की खुशियों के बीच छाया मातम, अलमारी में टंग रह गई दूल्हे की शेरवानी
जिस घर में कुछ ही हफ्तों बाद शहनाइयां गूंजने वाली थीं और मेहमानों का तांता लगने वाला था, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है। खुशियों का माहौल अचानक उस वक्त गम में बदल गया जब परिवार को पता चला कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। मामला गुरुग्राम का है, जहां 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की लाश एक नाले से बरामद की गई।
युवराज के घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। कुछ दिन पहले ही परिवार ने दिल्ली के लाजपत नगर जाकर युवराज के लिए दूल्हे की शेरवानी फाइनल की थी। माता-पिता और बहनें इस बात से बेहद खुश थे कि घर का लाडला जल्द ही दूल्हा बनने वाला है। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस शेरवानी को पहनकर युवराज अपनी दुल्हन के सामने जाने वाला था, वह सिर्फ अलमारी में टंगी रह जाएगी और उसका शरीर कफन में लिपटकर आएगा।
इस घटना ने न सिर्फ युवराज के परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। लोगों की आंखें इस बात को सोचकर नम हो जा रही हैं कि कैसे एक हंसता-खेलता परिवार चंद दिनों में उजड़ गया। शादी की तारीखें अब पुलिस थानों के चक्कर काटने और कोर्ट-कचहरी की तारीखों में बदल चुकी हैं।
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6 सितंबर की शाम को हुई थी आखिरी बात, मीटिंग के बहाने बुलाया गया था गुरुग्राम
घटना की शुरुआत 6 सितंबर की शाम को हुई। युवराज अदानी रियल्टी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उस दिन उनका पूरा परिवार उनके साथ शादी की शॉपिंग करने गया था। खरीदारी के बाद जब सब घर लौटे तो युवराज ने अपनी बहन और परिजनों को बताया कि उन्हें अपनी एक पूर्व महिला सहकर्मी के साथ एक जरूरी मीटिंग के सिलसिले में बाहर जाना है। उन्होंने अपनी मंगेतर और अपने बॉस को भी इस मीटिंग की जानकारी दी थी।
परिजनों के मुताबिक, 6 सितंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे उनकी युवराज से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया या फिर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। परिवार को शुरुआत में लगा कि वह किसी काम में व्यस्त होंगे, लेकिन जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला तो चिंता बढ़ने लगी। परिवार ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की और पुलिस से संपर्क किया।
"उस दिन हम सब बहुत खुश थे। हमने लाजपत नगर जाकर शादी के लिए शेरवानी फाइनल की थी। किसी ने नहीं सोचा था कि वो खुशियां हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा गम बन जाएंगी। भैया ने कहा था कि वो मीटिंग खत्म करके जल्दी लौट आएंगे, लेकिन वो कभी वापस नहीं आए।" — करिश्मा, युवराज की बहन
जांच में यह बात सामने आई है कि युवराज अपनी कार से गुरुग्राम पहुंचे थे। वहां पहले से तय योजना के मुताबिक आरोपी महिला और उसके साथियों से उनकी मुलाकात हुई। मीटिंग के दौरान ही आपसी बातचीत विवाद में बदल गई और युवराज को मौत के घाट उतार दिया गया। परिवार का कहना है कि अगर उन्हें समय पर सही जानकारी मिल जाती तो शायद उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी।
करोड़ों के लेन-देन और ठगी का खेल बना युवराज की हत्या की मुख्य वजह
इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद कई चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं। पुलिस जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि इस पूरी वारदात के पीछे पैसों का भारी लेन-देन और वित्तीय विवाद मुख्य वजह था। हत्या के आरोप में मुख्य आरोपी अन्या वत्स नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया है, जिसका पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अन्या वत्स पहले भी दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों में संदिग्ध रही है। वह खुद को कभी बड़ा सरकारी अफसर बताकर लोगों पर धौंस जमाती थी और उनके अटके हुए काम करवाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठती थी। कई लोगों ने उसकी ठगी का शिकार होने के बाद उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं।
युवराज और इस महिला के बीच किसी बड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को लेकर विवाद चल रहा था। पूछताछ के दौरान अन्या वत्स ने पुलिस के सामने यह कबूल किया है कि उसी ने युवराज को फोन करके गुरुग्राम बुलाया था। वहां उसके दोस्तों के साथ युवराज की तीखी बहस हुई और उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, बिना बताए अंतिम संस्कार का आरोप
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। युवराज के परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस को उनके बेटे का शव 10 सितंबर को ही मिल गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिजनों को इसकी सूचना समय पर नहीं दी। परिवार का दावा है कि पुलिस ने बिना उनकी सहमति या जानकारी के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे उनके अंदर गहरा रोष है।
परिजनों का कहना है कि जब उनका बेटा लापता था, तब वह लगातार थानों के चक्कर काट रहे थे। पुलिस चाहती तो तुरंत कार्रवाई कर सकती थी। लेकिन लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए न सिर्फ जांच में ढिलाई बरती गई, बल्कि परिवार को उनके अपने बेटे का आखिरी बार चेहरा देखने तक का मौका नहीं दिया गया। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी गुस्सा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी महिला अन्या वत्स और उसके सहयोगियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हत्याकांड में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस का दावा है कि सबूतों के आधार पर सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
कॉरपोरेट जगत में शोक की लहर, सहकर्मी से लेकर रिश्तेदार तक सन्न
युवराज सिंह मनचंदा के इस तरह अचानक और दर्दनाक अंत से पूरे कॉरपोरेट जगत और उनके जानने वालों में गहरा शोक व्याप्त है। अदानी रियल्टी में एक जिम्मेदार पद पर काम करने वाले युवराज को उनके सहकर्मी एक मेहनतकश और मृदुभाषी इंसान के रूप में याद करते हैं। किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि उनके साथ ऐसा हादसा हो सकता है।
उनके दोस्त और रिश्तेदार सदमे में हैं। जो लोग कुछ हफ्ते बाद उनकी बारात में शामिल होने और नाचने-गाने की तैयारी कर रहे थे, वे आज उनके घर सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि उनके बेटे ने ऐसा क्या गुनाह किया था जिसकी इतनी भयानक सजा उसे दी गई।
यह घटना एक बार फिर समाज में बढ़ते लालच, पैसों के विवाद और खौफनाक होती वारदातों की पोल खोलती है। एक तरफ जहां एक परिवार ने अपना कमाऊ और प्यारा बेटा खो दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस ठगी और हत्या के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन युवराज के घर में जो सूनापन आ गया है, उसे कभी नहीं भरा जा सकता।






