सिनेमाघरों में शानदार सफर तय कर रही है फिल्म 'हनुमान अंश'
भारतीय सिनेमा जगत में कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी सफलता बड़े-बड़े दिग्गजों को भी हैरान कर देती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा ही जादुई प्रदर्शन किया है। कम बजट की फिल्मों के इतिहास में इस फिल्म ने कमाई के मामले में नए आयाम गढ़े हैं। फिल्म का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है और रिलीज के इतने हफ्तों बाद भी सिनेमाघरों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
पारंपरिक मसाला फिल्मों और भारी-भरकम बजट वाली कहानियों से अलग हटकर बनी यह फिल्म आध्यात्मिक और सच्ची घटनाओं पर आधारित है। यही वजह है कि दर्शक इसे परिवार के साथ देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं। ट्रेड एनालिस्ट भी इस फिल्म के आंकड़ों को देखकर अचंभित हैं क्योंकि इसने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं अधिक शानदार प्रदर्शन किया है।
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महज दो करोड़ की लागत और 400 करोड़ पार का जादुई कारोबार
किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना अमूल्य तौर पर उसके बजट और मुनाफे से लगाया जाता है। फिल्म 'हनुमान अंश' के मामले में यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्म निर्माताओं के मुताबिक, इस फिल्म को बनाने में दो करोड़ रुपये से भी कम की लागत आई थी। लेकिन इसके रिटर्न ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है।
प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक तरन आदर्श और कोमल नहाटा के आंकड़ों के अनुसार, इस फिल्म ने दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी धरती पर भी इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। कम लागत में इतना बड़ा मुनाफा कमाकर इस फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों को अच्छी और सच्ची कहानी हमेशा पसंद आती है, भले ही उसमें महंगे कलाकारों का तामझाम न हो।
नीब करौरी बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित है पूरी कहानी
यह फिल्म महान संत 'नीब करौरी बाबा' के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित है। फिल्म की पटकथा एक बुजुर्ग व्यक्ति और उसके पोते के संवाद से शुरू होती है, जो आगे चलकर बाबा के शुरुआती जीवन और उनके अध्यात्मिक सफर से जुड़ जाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक आम इंसान अपनी मां की मृत्यु के बाद भगवान की तलाश में निकलता है और फिर भूखों को खाना खिलाने तथा लोगों की सेवा करने को ही अपना सबसे बड़ा धर्म मान लेता है।
फिल्म में नीब करौरी बाबा का मुख्य किरदार अभिनेता शोभिनव सत्या ने निभाया है, जिन्हें उनके बेहतरीन अभिनय के लिए काफी सराहना मिल रही है। उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों और उस दौर की पृष्ठभूमि ने फिल्म के दृश्यों को बेहद प्रभावशाली बना दिया है, जो दर्शकों को एक अलग ही मानसिक शांति और जुड़ाव का अहसास कराता है।
52वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर बरसे नोट, टूटा पुराना रिकॉर्ड
आमतौर पर रिलीज के कुछ हफ्तों बाद फिल्मों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और सिनेमाघरों से उतरने लगती हैं। लेकिन 'हनुमान अंश' ने इस नियम को पूरी तरह झुठला दिया है। फिल्म ने अपने रिलीज के 52वें दिन यानी रविवार को रिकॉर्ड 9 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की। यह इस बात का प्रमाण है कि वीकेंड पर भी दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
इस अद्भुत प्रदर्शन के दम पर फिल्म ने साल की कई बड़ी फिल्मों को पछाड़ दिया है। धुरंधर और धुरंधर 2 जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद यह फिल्म साल की दूसरी ऐसी भारतीय फिल्म बन गई है, जिसने 300 करोड़ से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा और रिटर्न हासिल किया है। फिल्म का कुल रिटर्न प्रतिशत भी इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दो राज्यों में टैक्स फ्री हुई फिल्म, आयुष्मान खुराना ने की सराहना
फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता और उसके सामाजिक संदेश को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने भी इसे समर्थन दिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म देखने के बाद इसकी पूरी टीम की सराहना की और इसे राज्य में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाया, जिससे फिल्म देखने वाले दर्शकों की संख्या में और इजाफा हुआ।
फिल्म की इस अप्रत्याशित सफलता पर बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पीटीआई से बातचीत करते हुए कहा कि 'हनुमान अंश' जैसी कम बजट की फिल्मों का सफल होना इस बात का संकेत है कि इंडस्ट्री को ऐसी सार्थक और जमीन से जुड़ी कहानियां बनाने की और अधिक आवश्यकता है।
"ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर यह साबित करती हैं कि दर्शकों को केवल भारी-भरकम बजट या स्पेशल इफेक्ट्स नहीं, बल्कि एक अच्छी और सच्ची कहानी चाहिए जो सीधे दिल को छू जाए। हमें इस तरह की और फिल्में बनाने की जरूरत है।" — आयुष्मान खुराना, अभिनेता
निष्कर्ष
फिल्म 'हनुमान अंश' की यह सफलता केवल एक फिल्मी आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि यदि नीयत साफ हो और कहानी में दम हो, तो न्यूनतम संसाधनों के साथ भी इतिहास रचा जा सकता है। नीब करौरी बाबा के संदेशों को घर-घर तक पहुंचाने वाली यह फिल्म आने वाले समय में भी सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर बनी रहेगी।








