सिनेमाघरों में 'हनुमान अंश' के दो महीने पूरे, मंडे टेस्ट में डिवोशनल फिल्म ने किया चौंकाने वाला कलेक्शन
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने अपने छोटे बजट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि बड़े-बड़े मेगास्टार्स की फिल्में भी पीछे छूट गईं। इन दिनों निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की डिवोशनल फिल्म 'हनुमान अंश' कुछ ऐसा ही करिश्मा दिखा रही है। इस फिल्म ने सिनेमाघरों में अपने 60 दिन यानी दो महीने पूरे कर लिए हैं और इसके बावजूद दर्शकों के बीच इसका जबरदस्त क्रेज कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वीकडेज और मंडे के दिन अमूमन फिल्मों की कमाई में भारी गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन इस फिल्म ने सोमवार को भी अच्छी कमाई कर सभी को हैरान कर दिया है।
ट्रेड एनालिस्ट्स और बॉक्स ऑफिस ट्रैकर्स के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के पहले दिन महज 10 लाख रुपये के साथ बेहद साधारण शुरुआत की थी। शुरुआती दो हफ्तों तक स्क्रीन्स की कमी और धीमी रफ्तार के कारण मेकर्स की चिंताएं थोड़ी बढ़ी थीं, लेकिन तीसरे हफ्ते से इस फिल्म की कमाई ने जो रफ्तार पकड़ी उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। बीते रविवार यानी 59वें दिन इस फिल्म ने लगभग 3 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस किया था। वहीं, इसके अगले दिन यानी सोमवार को कमाई के आंकड़ों में गिरावट के बावजूद फिल्म ने करीब 65 लाख रुपये की उल्लेखनीय कमाई दर्ज की।
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महज 2 करोड़ के बजट वाली फिल्म ने वर्ल्डवाइड कमाए 400 करोड़ रुपये से ज्यादा
किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना उसके बजट और उससे मिलने वाले मुनाफे से तय होता है। इस मामले में 'हनुमान अंश' ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन दर्शन और उनकी महिमा पर आधारित इस फिल्म को महज 2 करोड़ रुपये की छोटी लागत में तैयार किया गया था। लेकिन जब यह पर्दे पर उतरी तो इसने बॉक्स ऑफिस पर पैसों की ऐसी बारिश की कि वर्ल्डवाइड कलेक्शन 400 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। बॉलीवुड गलियारों में इस फिल्म की सफलता की चर्चा हर तरफ हो रही है और इसे इस साल की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में गिना जा रहा है।
फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता पर बात करते हुए हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि मौजूदा समय में धार्मिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्में दर्शकों के बीच बेहद सुरक्षित और पसंदीदा विकल्प बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कहानियों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी होती है, जिसके चलते दर्शक सिनेमाघरों तक जरूर पहुंचते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारतीय सिनेमा को यदि दीर्घकालिक रूप से मजबूत करना है तो अच्छी पटकथा और लेखकों को उचित महत्व देना होगा ताकि हर जॉनर की बेहतरीन फिल्में दर्शकों को मिल सकें।
कैंची धाम में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने की खास अपील
इस फिल्म की बंपर सफलता के बाद उत्तराखंड स्थित बाबा नीब करौरी महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम आश्रम में श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। स्थिति यह हो गई है कि लॉन्ग वीकेंड और छुट्टियों के दौरान आश्रम के आसपास भारी जाम लग रहा है और भारी भीड़ के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर एक खास वीडियो जारी किया है। उन्होंने अपने इस वीडियो संदेश में श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कैंची धाम जाने से पहले वहां के हालात की पूरी जानकारी जरूर जुटा लें।
"अगर कैंची धाम में बहुत ज्यादा भीड़ है और आपको वहां जाने में असुविधा हो रही है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। महाराज जी के कई अन्य पवित्र स्थान भी हैं जहां आप दर्शन के लिए जा सकते हैं, जैसे कापड़ी घाट, हनुमानगढ़ मंदिर, अकबरपुर जो उनका जन्म स्थान है, और वृंदावन या नीकर गांव। महाराज जी हर जगह और आपके दिलों में भी व्याप्त हैं।"— डॉ. विशाल चतुर्वेदी, निर्देशक
निर्देशक की इस संवेदनशील अपील की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। फैंस का कहना है कि एक फिल्मकार होने के नाते उन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। फिल्म की टीम के सदस्यों जैसे अभिनेता शोभिनव सत्या ने भी हाल ही में कैंची धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन किए हैं, जिसके बाद से इस धार्मिक स्थल और फिल्म दोनों को लेकर लोगों की उत्सुकता और अधिक बढ़ गई है।
साउथ में भी रिलीज होने जा रही है 'हनुमान अंश', फैंस के बीच बना हुआ है भारी उत्साह
हिंदी बेल्ट और उत्तर भारत में अभूतपूर्व सफलता हासिल करने के बाद अब यह फिल्म दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी धमाल मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मेकर्स ने हाल ही में इस फिल्म का तेलुगू ट्रेलर रिलीज किया था, जिसे साउथ के दर्शकों की तरफ से भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म के मेकर्स का मानना है कि चूंकि बाबा नीब करौरी के अनुयायी देश के कोने-कोने में मौजूद हैं, इसलिए साउथ के सिनेमाघरों में भी यह फिल्म दर्शकों को अपनी ओर खींचने में कामयाब रहेगी।
साल 2026 के इस दौर में जहां कई बड़ी बजट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी हैं, वहीं छोटे बजट की इस डिवोशनल फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि यदि कंटेंट में सच्चाई हो और दर्शकों की भावनाओं से जुड़ाव हो, तो कोई भी फिल्म इतिहास रच सकती है। फिलहाल 60 दिनों के लंबे सफर के बाद भी सिनेमाघरों में इसका टिके रहना इस बात का गवाह है कि दर्शक साफ-सुथरी और प्रेरणादायक कहानियों को देखने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।






