भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने बड़े बजट और भारी-भरकम स्टारकास्ट के बिना ही बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कोहराम मचाया कि बड़े-बड़े दिग्गजों के होश उड़ गए। इसी फेहरिस्त में अब फिल्म 'हनुमान अंश' का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। महज दो करोड़ रुपये की मामूली लागत से तैयार की गई इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कार दिखाया है कि इंडस्ट्री के विशेषज्ञ भी हैरान हैं। सिनेमाघरों में अपने पचास दिन सफलतापूर्वक पूरे करने के बाद भी इस फिल्म की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'दृश्यम 3' के सिनेमाघरों में दस्तक देने के बावजूद 'हनुमान अंश' के तेवर जरा भी ढीले नहीं पड़े हैं और यह लगातार बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
कमाई के मामले में रचा नया इतिहास, 400 करोड़ के पार पहुंची फिल्म
दर्शकों के बीच भगवान हनुमान और सनातन संस्कृति की इस अद्भुत गाथा ने ऐसा जादू चलाया है कि बॉक्स ऑफिस के पुराने सारे समीकरण धरे के धरे रह गए हैं। शुरुआती हफ्तों में सीमित स्क्रीन्स पर रिलीज होने के बाद यह फिल्म वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी के दम पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, रिलीज के 57 दिन बीत जाने के बाद भी इस फिल्म ने दुनियाभर में 414 करोड़ रुपये से अधिक का शानदार कारोबार कर लिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि छोटे बजट की किसी फिल्म के लिए यह मुकाम हासिल करना अभूतपूर्व है। फिल्म की इस अपार सफलता ने साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट में दम हो और कहानी दर्शकों की जड़ों से जुड़ी हो, तो बजट का आंकड़ा ज्यादा मायने नहीं रखता है।
फिल्म की सफलता पर बात करते हुए अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने भी एक इंटरव्यू में इसकी सराहना की है। उनका कहना है कि आज का दर्शक अपनी संस्कृति और जड़ों के बारे में गहराई से जानना चाहता है। सनातन संस्कृति की अच्छाइयों और विज्ञान के मेल को जिस खूबसूरती से इस कहानी में पिरोया गया है, वही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। तमन्ना ने अपनी एक अनौपचारिक मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे वे इसकी महिला प्रोड्यूसर से मिली थीं और उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी थीं।
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सीक्वल को लेकर मेकर्स का स्पष्ट रुख: अंधाधुंध पैसा बहाने के मूड में नहीं
किसी भी फिल्म के सुपरहिट होने के बाद सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या उसका अगला यानी सीक्वल आएगा और उसका बजट कितना बड़ा होगा। 'हनुमान अंश' की ऐतिहासिक सफलता के बाद इसके निर्माताओं से भी जब यही सवाल पूछा गया, तो उन्होंने एक बहुत ही परिपक्व और चौंकाने वाला जवाब दिया। फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि वे सीक्वल पर पानी की तरह पैसा बहाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनका मानना है कि सिर्फ बजट बढ़ा देने या दस-बीस करोड़ रुपये झोंक देने भर से कोई फिल्म बेहतर नहीं हो जाती।
अनुप्रिया ने आगे कहा कि बड़े बजट के नाम पर गैर-जरूरी वीएफएक्स या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने से कहानी की मूल प्रामाणिकता और उसकी रूह खत्म हो सकती है। उनकी प्राथमिकता हमेशा से यह रही है कि जिस दौर की कहानी को पर्दे पर उतारा जा रहा है, उसका माहौल, संस्कृति और उस कालखंड की सच्चाई पूरी ईमानदारी के साथ दर्शकों तक पहुंचे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सीक्वल की मांग के हिसाब से भारी-भरकम फंड की जरूरत पड़ी, तो मेकर्स पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन फिजूलखर्च से पूरी तरह बचा जाएगा।
"मेरी सोच बहुत साफ है। मेरा मानना है कि दूसरी फिल्म भी पहली फिल्म के आसपास के बजट में बननी चाहिए। सिर्फ 10 या 20 करोड़ रुपये लगा देने से फिल्म बेहतर नहीं हो जाएगी। इससे गैरजरूरी वीएफएक्स या एआई का इस्तेमाल हो सकता है, जिसकी कहानी को जरूरत ही न हो और इससे फिल्म की प्रामाणिकता प्रभावित हो सकती है।" — अनुप्रिया नागर, प्रोड्यूसर ('हनुमान अंश')
'दृश्यम 3' की चुनौती के बीच नया दांव और तेलुगु में रिलीज का मास्टरप्लान
सिनेमाघरों में बॉक्स ऑफिस की जंग इन दिनों काफी दिलचस्प हो चुकी है। एक तरफ जहाँ अजय देवगन अभिनीत थ्रिलर ड्रामा 'दृश्यम 3' ने दस्तक दी है और माना जा रहा था कि इससे अन्य फिल्मों की कमाई पर ब्रेक लग जाएगा, वहीं 'हनुमान अंश' के मेकर्स ने एक ऐसा मास्टरप्लान चला है जिससे विरोधी खेमे की रणनीतियां भी फीकी पड़ गई हैं। फिल्म के प्रस्तुतकर्ता 'स्वयंभू मीडिया नेटवर्क' और पैन-इंडिया स्तर पर इसे मजबूत आधार देने वाले 'होम्बले फिल्म्स' ने अब इस भक्तिमय सफर को दक्षिण भारत के दर्शकों तक पहुंचाने का बड़ा फैसला लिया है।
आगामी रणनीति के तहत, मेकर्स ने इस फिल्म को दुनियाभर के तेलुगु दर्शकों के लिए विशेष रूप से रिलीज करने की तैयारी पूरी कर ली है। श्री नीब करौरी बाबा के जीवन दर्शन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस आध्यात्मिक कहानी को अब तेलुगु भाषा में भी बड़े पैमाने पर भुनाया जाएगा। 'डिवाइन डिटूर' नामक किताब पर आधारित इस पटकथा को विशाल चतुर्वेदी ने बेहद करीने से लिखा और निर्देशित किया है। हिंदी पट्टी के बाद अब दक्षिण भारत के बॉक्स ऑफिस पर भी इस फिल्म का तहलका देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष: कंटेंट की ताकत ने फिर साबित की अपनी बादशाहत
कुल मिलाकर देखा जाए तो 'हनुमान अंश' की यह यात्रा भारतीय सिनेमा जगत के लिए एक बड़ा सबक और प्रेरणा है। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो यह मानते हैं कि बिना सौ-दो सौ करोड़ के बजट और बड़े सितारों के कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं सकती। पचास दिनों से अधिक का समय बीत जाने और कई नई बड़ी फिल्मों की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म का सिनेमाघरों में टिके रहना इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अब लीक से हटकर कुछ सार्थक और आत्मीय देखना चाहते हैं। आने वाले दिनों में जब इसका सीक्वल और तेलुगु संस्करण मैदान में उतरेगा, तो देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म और कौन-कौन से नए रिकॉर्ड अपने नाम करती है।








