हरिपुर धाम को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर चमकाने की कवायद तेज
उत्तराखंड के प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध ऐतिहासिक हरिपुर धाम को अब एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयास लगातार जोर पकड़ रहे हैं। इस दिशा में हाल ही में देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में जौनसार-बावर जनजाति कल्याण समिति और लोक पंचायत के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शिरकत की और धाम के दूसरे चरण के विकास कार्यों की रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया।
आयोजित इस संयुक्त बैठक का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और पर्यटकों के लिए इसे एक आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करना था। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हरिपुर केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं है, बल्कि यह जौनसार-बावर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर चल रहे इन प्रयासों से स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। समिति के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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प्रथम चरण का काम पूरा, मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
हरिपुर धाम के विकास की यात्रा का पहला पड़ाव सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। लोक पंचायत के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यहां घाटों के पहले चरण का निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ संपन्न हो चुका है। इस आधुनिक और भव्य विकास का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थापित मां यमुना की 21 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा है, जिसका भव्य अनावरण पहले ही किया जा चुका है।
यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन चुकी है, बल्कि यह दूर-दूर से आने वाले सैलानियों के लिए भी मुख्य आकर्षण का बिंदु बन गई है। नदी के तट पर बने इन नए घाटों के कारण अब यहां आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन करने में काफी सहूलियत मिलती है। पहले यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन चरणबद्ध विकास ने इस पूरे इलाके की सूरत ही बदल दी है।
स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से इस क्षेत्र की प्राचीन महत्ता एक बार फिर से स्थापित हो रही है। नदी के तट पर सुबह और शाम होने वाले आयोजनों में अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों की भी अच्छी खासी भीड़ जुटने लगी है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान तेजी से उभर रहा है।
दूसरे चरण में जमुना कृष्ण मंदिर और भव्य धर्मशालाओं का होगा निर्माण
विकास कार्यों के अगले चरण यानी दूसरे चरण की योजना का खाका तैयार किया जा चुका है। आगामी प्रोजेक्ट्स के तहत जमुना कृष्ण धाम परिसर में घाटों के विस्तार के साथ-साथ एक भव्य जमुना कृष्ण मंदिर के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त धर्मशालाओं का निर्माण भी प्रस्तावित है।
धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई गई है कि हरिपुर धाम में प्रत्येक शुक्रवार को नियमित रूप से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिससे यहां आने वाले किसी भी गरीब या जरूरतमंद या तीर्थयात्री को भोजन की चिंता न करनी पड़े। इन तमाम सुविधाओं के जुड़ने से यह स्थल देश के बड़े तीर्थ स्थलों की सूची में शामिल होने की राह पर अग्रसर है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इन सभी निर्माण कार्यों के लिए इंजीनियरों और वास्तुकारों की सलाह ली जा रही है ताकि निर्माण कार्य पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सुरक्षा मानकों का बेहतरीन मिश्रण हो। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि आने वाले दशकों तक ये संरचनाएं सुरक्षित और सुंदर बनी रहें।
सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संस्कृत महाविद्यालय और महासू प्रवेश द्वार की योजना
केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के तहत हरिपुर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक भव्य 'महासू प्रवेश द्वार' का निर्माण किया जाएगा, जो इस क्षेत्र की लोक संस्कृति और मान्यताओं की अनूठी छाप छोड़ेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में शिक्षा और वैदिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना का भी गंभीर प्रस्ताव रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत महाविद्यालय खुलने से स्थानीय युवाओं को अपनी प्राचीन भाषा, साहित्य और संस्कारों से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा। साथ ही, यह क्षेत्र शिक्षा के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकेगा। जौनसार-बावर की प्राचीन लोक कला, संगीत और खान-पान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
"हरिपुर धाम का यह विकास केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह हमारी उस महान सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार है जो पीढ़ियों से हमारी पहचान रही है। जब यहां यमुनोत्री यात्रा का आरंभ और संस्कृत शिक्षा की नींव मजबूत होगी, तो यह क्षेत्र देश के आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नया अध्याय लिखेगा।" — श्रीचंद शर्मा, वरिष्ठ सदस्य, लोक पंचायत
यमुनोत्री यात्रा के मार्ग से जुड़ेगा हरिपुर, बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन
बैठक में एक और सबसे दूरगामी और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह है यमुनोत्री धाम की यात्रा की शुरुआत हरिपुर से किए जाने का विषय। यदि इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाया जाता है, तो चार धाम यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह एक नया और सुगम मार्ग बन जाएगा। तीर्थयात्री यमुनोत्री जाने से पहले हरिपुर धाम में रुककर मां यमुना के दर्शन करेंगे और यहां के पवित्र घाटों पर अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
इस नई व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा होंगे। होमस्टे, होटल, परिवहन, और हस्तशिल्प व्यापार से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। जौनसार-बावर की लोक संस्कृति और पर्यटन का यह अनूठा संगम देश भर के यात्रियों को अपनी ओर खींचेगा।
बैठक में रमेश चंद्र जोशी, सुल्तान सिंह तोमर, श्याम सिंह तोमर, नितेश राठौर, रघुबीर चौहान, अशोक नेगी, खजाना दत्त शर्मा, रविंद्र राणा, तारा दत्त जोशी, भारत चौहान, गंभीर सिंह चौहान, प्रीतम चौहान, चमन नेगी और अनिल सिंह तोमर समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस बात का संकल्प लिया कि वे इस ऐतिहासिक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तन्मयता से प्रयास करेंगे।








