नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय डेस्क ('द फ्रीलान्स'): मध्य पूर्व में सुलग रही बारूद की आग अब दुनिया की आर्थिक धमनियों यानी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सीधे तौर पर झुलसाने लगी है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा टकराव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। हमारे सामरिक स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका के सामने सात कड़ी शर्तें रख दी हैं, जिनके पूरा होने तक इस सामरिक जलमार्ग के कपाट पूरी तरह बंद रखने का ऐलान किया गया है।
होर्मुज की नाकेबंदी और गोलियों की गूंज
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का मुख्य द्वार है। पिछले कुछ घंटों में इस क्षेत्र से जो खबरें आ रही हैं, वे किसी बड़े युद्ध की आहट जैसी हैं। सामरिक जल सीमा में एक तेल टैंकर पर गोलीबारी की घटना ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी शर्तों को वैश्विक महाशक्तियों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक इस मार्ग से किसी भी वाणिज्यिक जहाज़ की आवाजाही को सुरक्षित नहीं माना जाएगा।
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ईरान की वे '7 शर्तें' और अमेरिका की सामरिक दुविधा
विश्व राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बनी ईरान की ये सात शर्तें मुख्य रूप से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य दखलअंदाजी को सीमित करने, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और क्षेत्रीय संप्रभुता के सम्मान से जुड़ी हैं। वाशिंगटन के लिए इन शर्तों के आगे झुकना जहां राजनीतिक रूप से असंभव सा प्रतीत होता है, वहीं होर्मुज की लगातार नाकेबंदी अमेरिकी नेतृत्व पर भारी दबाव बना रही है। पश्चिमी एशिया में तैनात अमेरिकी नौसेना के बेड़े हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन जलडमरूमध्य के भीतर बढ़ते खतरे ने पेंटागन की रणनीतिक नींद उड़ा दी है।
लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक फैलता युद्ध
तनाव केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है। लाल सागर के मुहाने पर भी भू-राजनीतिक संघर्ष अपने चरम पर पहुंच चुका है। सऊदी अरब और यमन के संयुक्त गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा पलटवार शुरू कर दिया है। लाल सागर पर सामरिक नियंत्रण पाने के लिए यह जंग अब एक पूर्ण क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुकी है। हूती बलों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों और उसके जवाब में हो रहे हवाई हमलों ने समुद्री व्यापार के इस वैकल्पिक मार्ग को भी अत्यधिक जोखिम भरा बना दिया है।
तेल बाजार में भूचाल: WTI क्रूड 82 डॉलर के पार
इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सबसे तात्कालिक और गंभीर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है। ऊर्जा अर्थशास्त्रियों के अनुसार, होर्मुज संकट गहराते ही कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। बेंचमार्क WTI क्रूड (West Texas Intermediate) 82 डॉलर प्रति बैरल के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है। यदि यह नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में भारत समेत दुनिया भर के देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर महंगाई और वैश्विक विकास दर पर पड़ेगा।
निष्कर्ष और भविष्य की आशंकाएं
'द फ्रीलान्स' के विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व का यह मौजूदा संकट केवल क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आधिपत्य और ऊर्जा सुरक्षा का एक बहुत बड़ा इम्तिहान है। जब तक कूटनीतिक स्तर पर कोई ठोस मध्यस्थता सामने नहीं आती, तब तक होर्मुज की लहरों पर तैरता यह तनाव दुनिया को एक और बड़े आर्थिक और सैन्य संकट की ओर धकेलता रहेगा।







