नई दिल्ली से द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बैंकिंग सेक्टर में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मेगा डील पर मुहर लग गई है। सरकार इस बैंक में अपनी 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। इस पूरी बिक्री से सरकार को करीब 52,878 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
सामने आ रही जानकारी के अनुसार, इस बैंक को खरीदने के लिए एक कनाडाई कंपनी आगे आई है। एअर इंडिया के बाद सरकार के द्वारा उठाया गया यह सबसे बड़ा विनिवेश कदम माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से इस डील को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आ गई है। बैंक के कर्मचारियों और ग्राहकों के मन में भी इस बड़े बदलाव को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
कनाडाई कंपनी खरीदेगी बैंक में बहुसंख्यक हिस्सेदारी
इस पूरी सौदेबाजी के तहत आईडीबीआई बैंक के नियंत्रण में बड़ा बदलाव होगा। खरीदार के रूप में एक बड़ी कनाडाई कंपनी का नाम सामने आ रहा है जो बैंक के 60.72 प्रतिशत शेयर खरीदेगी। सरकार लंबे समय से सरकारी कंपनियों और बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में आईडीबीआई बैंक का नाम सबसे ऊपर चल रहा था क्योंकि इसमें पहले से ही भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी और सरकार की मिली-जुली हिस्सेदारी है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस डील के पूरा होने से बैंक की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। निजी हाथों में जाने के बाद बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि, सरकारी बैंक का दर्जा खत्म होने को लेकर यूनियनों की तरफ से कुछ चिंताएं भी जताई गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। बैंक के ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
एअर इंडिया के बाद सरकार का दूसरा सबसे बड़ा कदम
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब देश की अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुछ साल पहले सरकार ने घाटे में चल रही एयरलाइन एअर इंडिया को टाटा समूह को सौंपा था। अब बैंकिंग सेक्टर में आईडीबीआई बैंक की यह मेगा डील उसी दिशा में उठाया गया एक और बहुत बड़ा कदम है। 52,878 करोड़ रुपये की यह डील भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी डीलों में से एक बनने जा रही है।
द फ्रीलान्स की टीम ने पाया है कि आने वाले दिनों में इस डील से जुड़े और भी कई आधिकारिक खुलासे किए जाएंगे। बैंक प्रबंधन और खरीदार कंपनी के बीच कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम शुरू हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी मिलने के बाद यह सौदा पूरी तरह से जमीन पर उतरेगा। आम लोगों और निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस बदलाव का बैंक के रोजमर्रा के कामकाज पर क्या असर पड़ेगा।
कर्मचारियों और ग्राहकों के भविष्य पर क्या होगा असर
किसी भी बैंक के बिकने पर सबसे बड़ा सवाल वहां काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी को लेकर होता है। आईडीबीआई बैंक के मामले में भी कर्मचारी संगठनों ने अपनी कुछ मांगें और चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं। सरकार की तरफ से यह भरोसा दिया गया है कि कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बैंक के ग्राहकों को भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और खातों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
द फ्रीलान्स इस पूरी खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस डील से जुड़ी कोई और नई जानकारी सामने आएगी, हम सबसे पहले अपने पाठकों तक पहुंचाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडाई कंपनी के आने के बाद आईडीबीआई बैंक देश के बाकी निजी बैंकों को कितनी कड़ी टक्कर दे पाता है। फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस मेगा डील का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है और बाजार में इसकी चर्चा सबसे तेज है।



