देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शुमार आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की कथित खुदकुशी के बाद संस्थान प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश का ध्यान कैंपस के माहौल और छात्रों पर पढ़ाई के बढ़ते दबाव की ओर खींचा है। परिसर में छात्रों के तीखे विरोध और गुस्से को देखते हुए प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से कई बड़े प्रशासनिक और बुनियादी बदलाव करने का फैसला किया है। इनमें सबसे प्रमुख फैसला हॉस्टल के सभी कमरों से पारंपरिक सीलिंग फैन (छत के पंखे) हटाना है। प्रबंधन ने इसके स्थान पर वॉल-माउंटेड यानी दीवार पर लगने वाले विशेष पंखे लगाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
साहिल वाकोडे ने हॉस्टल नंबर 4 के अपने कमरे में सीलिंग फैन के सहारे फांसी लगाकर जान दी थी। इस दुखद वाकये के बाद साथी छात्रों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और फैकल्टी के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए थे। छात्रों की मांग थी कि कैंपस में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए जाएं ताकि इस तरह के जानलेवा कदमों को किसी भी तरह रोका जा सके। इसी कड़ी में अब हॉस्टल के कमरों से छत के पंखों को हमेशा के लिए अलविदा कहा जा रहा है, ताकि कोई छात्र आवेश में आकर ऐसा घातक कदम न उठा सके।
परीक्षा हॉल से कमरे तक: सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए साहिल के आखिरी पल
साहिल की संदिग्ध मौत की पड़ताल कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के हाथ अब बेहद महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज लगे हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह फुटेज घटना की कड़ियों को जोड़ने में सबसे निर्णायक सबूत साबित हो सकता है। क्राइम ब्रांच की तकनीकी टीम ने परीक्षा हॉल, मुख्य शैक्षणिक कॉरिडोर, कैंपस के रास्तों और हॉस्टल की गलियारों में लगे दर्जनों कैमरों की रिकॉर्डिंग को बारीकी से खंगाला है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन दोपहर लगभग 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच परीक्षा हॉल में साहिल की हर गतिविधि कैमरे में स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हुई है। उस वक्त परीक्षा खत्म होने में महज 15 मिनट का समय बाकी था। फुटेज में देखा गया कि साहिल अपनी जेब में रखी किसी वस्तु को देखने के लिए थोड़ा नीचे की ओर झुकता है। इसी दौरान हॉल में मौजूद प्रोफेसर और इनविजिलेटर की नजर उस पर पड़ती है और वे सीधे साहिल के पास पहुंच जाते हैं।
रिकॉर्डिंग के अनुसार, संबंधित प्रोफेसर साहिल से कुछ कड़े सवाल पूछते हैं और फिर उसे परीक्षा कक्ष में बैठे अन्य विद्यार्थियों से अलग ले जाकर पूछताछ करते हैं। इसके कुछ ही देर बाद साहिल परीक्षा हॉल से बाहर निकलता दिखाई देता है। उसके चेहरे पर गहरा तनाव साफ महसूस किया जा रहा था। वह भारी कदमों से कैंपस के रास्ते से होते हुए दोपहर करीब 1:25 बजे अपने हॉस्टल पहुंचा और सीधे अपने कमरे के भीतर चला गया। सीसीटीवी कैमरों के अनुसार, इसके बाद साहिल कभी उस कमरे से बाहर नहीं निकला और कुछ घंटों बाद उसकी मौत की हृदयविदारक खबर सामने आई।
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छात्रों के आक्रोश के आगे झुका प्रबंधन, डीन पद से हटाए गए प्रोफेसर
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने परिसर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। सैकड़ों छात्र प्रशासनिक भवन के बाहर जमा हो गए और उन्होंने परीक्षा के दौरान छात्रों के साथ किए जाने वाले व्यवहार और मानसिक दबाव के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। साहिल के परिजनों ने भी आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान प्रोफेसर के अत्यधिक दबाव और सार्वजनिक तौर पर अपमानित किए जाने के चलते उनके बेटे ने यह कदम उठाया।
"संस्थान में पढ़ने वाला हर छात्र हमारे परिवार का हिस्सा है। हम छात्रों की सुरक्षा और उनकी मानसिक सेहत को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और निष्पक्ष जांच में पुलिस का पूरा सहयोग किया जा रहा है।" — प्रशासनिक अधिकारी, आईआईटी बॉम्बे
छात्रों के बढ़ते आक्रोश और साहिल के पिता की औपचारिक शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली। दबाव बढ़ता देख संस्थान प्रशासन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स (DoSA) के बेहद अहम पद से तत्काल हटा दिया। छात्रों का कहना था कि जिस पद पर छात्रों के कल्याण और उनकी चिंताओं को समझने की जिम्मेदारी होती है, उसी पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की संवेदनहीनता अस्वीकार्य है।
वॉल माउंटेड पंखों की शुरुआत: क्या बुनियादी बदलावों से रुकेगा मानसिक तनाव?
हॉस्टलों में सीलिंग फैन की जगह दीवार पर लगने वाले पंखे लगाने की मुहिम शुरू तो हो चुकी है, लेकिन शिक्षाविद् और समाजशास्त्री इसे महज एक अस्थायी और बाहरी उपाय मान रहे हैं। आईआईटी जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति और उनके ऊपर परिजनों तथा समाज की उम्मीदों का जो भारी बोझ होता है, वह एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पंखे बदल देने से या कमरों की बनावट में बदलाव कर देने से छात्रों की खुदकुशी की मूल वजहें खत्म नहीं हो सकतीं। जब तक शिक्षण व्यवस्था में छात्रों के साथ संवाद, सहानुभूति और मानसिक संबल देने वाले मजबूत ढांचे का निर्माण नहीं होगा, तब तक इस तरह के दबाव से पार पाना मुश्किल होगा। परीक्षा हॉल में नकल के शक या किसी भी उल्लंघन की स्थिति में छात्र के साथ गरिमापूर्ण और संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि उसे अन्य सहपाठियों के सामने मानसिक रूप से तोड़ दिया जाए।
पुलिस जांच की अगली दिशा: क्राइम ब्रांच जोड़ रही है हर कड़ी
फिलहाल मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम साहिल के मोबाइल फोन, उसके लैपटॉप, रूममेट्स के बयानों और अंतिम घंटों में हुई बातचीत का डिजिटल डेटा जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की तह तक जाना चाहते हैं कि परीक्षा हॉल में प्रोफेसर और साहिल के बीच वास्तव में क्या बातचीत हुई थी और क्या वहां कोई ऐसी बात कही गई जिसने छात्र को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
प्रशासन की ओर से छात्रों की मुख्य मांगें स्वीकार कर लिए जाने के बाद फिलहाल परिसर में स्थिति शांत है और आईआईटी के निदेशक के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विरोध थोड़ा धीमा पड़ा है। बहरहाल, साहिल वाकोडे का यह मामला एक बार फिर देश भर के शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों और नीति निर्माताओं को यह सोचने पर विवश कर गया है कि आख़िर हमारे देश के सबसे मेधावी युवा किस अनकहे मानसिक बोझ तले दबकर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।




