आईआईटी बॉम्बे छात्र की आत्महत्या मामले में पुलिस की ताबड़तोड़ जांच
देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाने के लिए लगातार नए सबूत तलाश रही है। जांच अधिकारियों ने अब तक संस्थान के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों समेत 20 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर वह कौन सी परिस्थितियां थीं, जिनके चलते एक होनहार छात्र को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जांच दल उन सभी लोगों से पूछताछ कर रहा है जो घटना वाले दिन साहिल के संपर्क में थे। इनमें वे छात्र भी शामिल हैं जो परीक्षा हॉल में उसके साथ मौजूद थे और परीक्षा की निगरानी कर रहे शिक्षक भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा के दौरान या उसके तुरंत बाद ऐसा क्या हुआ था जिससे साहिल मानसिक तनाव में आ गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन बयानों से घटना की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद मिलेगी।
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आईफोन और लैपटॉप के डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी निगाहें
इस हाई-प्रोफाइल मामले में तकनीकी साक्ष्य जुटाना जांच एजेंसी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्र के पास आईफोन का एक आधुनिक मॉडल था, जिसे अनलॉक करना और उसका डेटा निकालना आसान नहीं है। सुरक्षा फीचर्स मजबूत होने के कारण फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को डिवाइस से कॉल लॉग, चैट्स और अन्य जानकारियां निकालने में तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, फोन की स्क्रीन पर कई मिस्ड कॉल के नोटिफिकेशन्स दिखाई दिए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि कोई उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहा था।
आईफोन के अलावा पुलिस ने साहिल का लैपटॉप भी कब्जे में ले लिया है और उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिया गया है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि लैपटॉप और मोबाइल फोन के डिजिटल फुटप्रिंट्स से इस बात का खुलासा हो सकेगा कि वह आखिरी वक्त में किससे बात कर रहा था और उसके दिमाग में क्या चल रहा था। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मिलान करके सच तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
घटना से पहले के 47 मिनट का रहस्य
क्राइम ब्रांच की जांच का मुख्य फोकस उस समय अंतराल पर है जब साहिल परीक्षा हॉल से बाहर निकला और हॉस्टल के कमरे तक पहुंचा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, साहिल 18 सितंबर को दोपहर करीब 12:38 बजे परीक्षा हॉल से बाहर आया था और लगभग 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा। इन करीब 47 मिनटों के बीच वह कहां गया, किससे मिला या उसने क्या किया, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
इस पहेली को सुलझाने के लिए पुलिस संस्थान परिसर, परीक्षा हॉल और हॉस्टल के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फुटेज में साहिल की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि उन 47 मिनटों में उसके साथ क्या हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डेटा के विश्लेषण के बाद ही मौत की असली वजह का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।
परिजनों का गंभीर आरोप और केंद्रीय मंत्री का दौरा
साहिल की मौत के बाद से उसका परिवार सदमे में है और लगातार न्याय की मांग कर रहा है। परिजनों ने आईआईटी बॉम्बे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि साहिल को संस्थान में जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया, जिसके चलते पुलिस और परिजनों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। परिवार का साफ कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हाल ही में आईआईटी बॉम्बे का दौरा किया और इस पूरी घटना की गहराई से जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि देश के इतने बड़े संस्थान में पढ़ने वाले युवा देश का भविष्य होते हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं के पीछे की सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।
"आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र देश का गौरव होते हैं। साहिल की मौत के मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।" — रामदास आठवले, केंद्रीय मंत्री
निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई
साहिल वाकोड़े आत्महत्या मामले की जांच अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है। क्राइम ब्रांच तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है। जैसे-जैसे फोरेंसिक रिपोर्ट्स सामने आएंगी, वैसे-वैसे इस दुखद घटना के पीछे छिपे सच से पर्दा उठेगा। देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यह मामला एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।







