नई दिल्ली/इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया के आसमान में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदल रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम को मिले इनपुट और विमानन क्षेत्र से जुड़े उच्चावत्र सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल पर लगातार बढ़ाई जा रही पाबंदियों और मनमाने प्रतिबंधों का तोड़ भारत ने निकाल लिया है। भारतीय विमानन कंपनियों, विशेष तौर पर टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने पश्चिमी देशों और मध्य एशिया के लिए उड़ानें संचालित करने हेतु एक वैकल्पिक और सुरक्षित रूट की तलाश तेज कर दी है। अब भारतीय विमानों को पाकिस्तान के एयरस्पेस की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए चीन के आसमान का रुख करने का नया प्लान तैयार किया गया है।
पाकिस्तान की पाबंदियों और लंबी उड़ानों का बढ़ता आर्थिक बोझ
बीते कुछ महीनों से पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों और विशेष उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर असहयोगात्मक रुख अपनाया जाता रहा है। पाकिस्तान द्वारा बार-बार पाबंदियां बढ़ाए जाने के कारण भारतीय एयरलाइंस को मजबूरन लंबे और महंगे हवाई मार्गों से उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे न केवल विमानों का सफर का समय (Flight Duration) बढ़ रहा है, बल्कि ईंधन की खपत में भी भारी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर एयरलाइंस के ऑपरेशनल खर्च और यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह जिद उसके अपने आर्थिक हितों के खिलाफ जा रही है, क्योंकि ओवरफ्लाइंग चार्जेस के रूप में उसे जो राजस्व मिलता था, वह अब भारत के इस नए रणनीतिक कदम से प्रभावित होना तय है।
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चीन के 'होतान' आसमान पर टकटकी: क्या है नया प्लान?
सामने आ रही रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय विमानन कंपनियों ने चीन के पश्चिमी क्षेत्र स्थित 'होतान' (Hotan) के ऊपर से गुजरने वाले एयररूट्स पर विचार करना शुरू कर दिया है। चीन का यह क्षेत्र मध्य एशिया और यूरोप जाने वाले विमानों के लिए एक भौगोलिक रूप से सुगम विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि, भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सीमाई तनाव लंबे समय से बने हुए हैं, लेकिन नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के स्तर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के माध्यम से इस तरह के गलियारों का उपयोग वैश्विक स्तर पर आम है। अगर यह नया प्लान पूरी तरह धरातल पर उतरता है, तो भारतीय विमानों को पाकिस्तान के आसमान की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ेगी।
PoK में चीन-पाकिस्तान की जुगलबंदी और भारत की रणनीतिक काट
यह पूरा घटनाक्रम केवल नागरिक उड्डयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके भू-राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सिंधु नदी पर पाकिस्तान और चीन द्वारा एक विशाल बांध के निर्माण को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह साझा परियोजना न केवल क्षेत्र की बौद्ध विरासत और पर्यावरण को नष्ट करने की साजिश है, बल्कि यह 'भारत विरोध' की उनकी साझा धुरी का एक और हिस्सा है। ऐसे में, जब बीजिंग और इस्लामाबाद मिलकर भारत के सामरिक हितों को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, तब भारत द्वारा चीन के ही एयरस्पेस का व्यावसायिक उपयोग करने का विकल्प खोजना कूटनीतिक रूप से एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
यात्रियों और एविएशन सेक्टर पर दूरगामी प्रभाव
इस पूरी कवायद के केंद्र में अंततः यात्री सुरक्षा, समय की बचत और किफायती यात्रा है। यदि टाटा की एयर इंडिया और अन्य भारतीय विमानन कंपनियां चीन के रास्ते पश्चिमी देशों के लिए नया और सुगम हवाई गलियारा स्थापित करने में सफल हो जाती हैं, तो यह भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और व्यावसायिक जीत होगी। 'द फ्रीलान्स' की इस खोजी रिपोर्ट के निष्कर्ष स्पष्ट करते हैं कि भारत अब क्षेत्रीय ब्लैकमेलिंग और मनमाने प्रतिबंधों के आगे झुकने के बजाय, अत्याधुनिक कूटनीति और वैकल्पिक अर्थशास्त्र के जरिए अपनी राह खुद बनाने में पूरी तरह सक्षम है। आने वाले हफ्तों में इस मार्ग पर तकनीकी मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय विमानन प्राधिकरणों की बैठकों पर देश की पैनी नजर रहेगी।









