20 अक्टूबर से लागू होगा ऐतिहासिक भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
भारत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब आगामी 20 अक्टूबर से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया है कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करना, भारतीय उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बड़ा बाजार खोलना और विदेशी निवेश को नई रफ्तार देना है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद इस समझौते के धरातल पर उतरने से दोनों देशों के कारोबारियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जब व्यापारिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं और कई देश एक-दूसरे के सामानों पर कड़े टैरिफ लगा रहे हैं, तब भारत और न्यूजीलैंड का यह समझौता एक सकारात्मक पहल है। इस समझौते के जरिए दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक अपने आपसी व्यापार को दोगुना करने का बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। जून 2026 तक समाप्त हुए 12 महीनों के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 2.3 अरब डॉलर का कुल व्यापार दर्ज किया गया था, जिसे अब इस एफटीए के सहारे एक नई छलांग मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
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95 फीसदी सामानों पर गिरेगी कीमतें, सस्ती होगी विदेशी शराब और कीवी
इस व्यापार समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लागू होने के बाद न्यूजीलैंड से भारत आने वाले लगभग 95 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) या तो पूरी तरह खत्म हो जाएगी या फिर उसमें भारी कमी की जाएगी। इस फेरबदल के बाद बाजार में न्यूजीलैंड के कई प्रसिद्ध उत्पाद काफी सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। इनमें न्यूजीलैंड की मशहूर वाइन, लोकप्रिय कीवी और प्रीमियम किस्म के सेब जैसे कृषि उत्पाद मुख्य रूप से शामिल हैं। आम भारतीय उपभोक्ताओं और विशेषकर विदेशी उत्पादों के शौकीनों के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत साबित होने जा रही है।
दूसरी तरफ, भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले सभी उत्पादों को भी पूरी तरह ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच हासिल होगी। इसका मतलब साफ है कि भारतीय कंपनियों और मैन्युफैक्चरर्स के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में अपने माल की बिक्री करना बेहद आसान हो जाएगा और उन्हें किसी भी तरह के भारी-भरकम करों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह व्यवस्था भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा में टिके रहने और वहां अपनी पैठ मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर लेकर आई है।
भारतीय छात्रों और कामगारों के लिए आसान होगी राह
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल वस्तुओं के आयात और निर्यात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा क्षेत्र और मानव संसाधन की आवाजाही को भी सुगम बनाता है। समझौते के प्रावधानों के तहत आने वाले समय में भारतीय छात्रों और कामगारों की न्यूजीलैंड में आवाजाही से जुड़े कड़े नियमों को काफी हद तक आसान बनाया जाएगा। इससे वहां शिक्षा ग्रहण करने जाने वाले भारतीय युवाओं और नौकरी की तलाश में जाने वाले प्रोफेशनल्स के लिए रास्ते और अधिक सुगम हो जाएंगे।
इसके साथ ही, न्यूजीलैंड की ओर से भारत में बड़े पैमाने पर आर्थिक भागीदारी का भी ऐलान किया गया है। न्यूजीलैंड ने आने वाले अगले 15 वर्षों के भीतर भारत के विभिन्न सेक्टरों में कुल 20 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से देश में बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलने की पूरी संभावना है, जिससे भारत की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।
बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की बड़ी आर्थिक कूटनीति
भारत और न्यूजीलैंड का यह महत्वपूर्ण समझौता ऐसे संवेदनशील समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव कुछ हद तक बढ़ा हुआ है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाला कानून पारित किया गया है। चूंकि अमेरिका वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए भारत सरकार किसी एक देश पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लगातार दुनिया के अन्य देशों में अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाश रही है।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापार समझौतों की श्रृंखला में न्यूजीलैंड के साथ हुआ यह एफटीए भी इसी बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। पिछले दिनों भारत ने रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका द्वारा उठाये गए कदमों पर अपना सख्त रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि इस तरह की नीतियों से द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ सकता है। इन तमाम भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करने में बेहद मददगार साबित होगा।
"ऐसी समय में जब दुनिया भर में व्यापार को लेकर अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं और कई देशों में टैरिफ बढ़ाए जा रहे हैं, भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐसा ऐतिहासिक समझौता किया है जो दोनों देशों के कारोबार के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।" — टॉड मैक्ले, व्यापार मंत्री, न्यूजीलैंड
निष्कर्ष और आगे की राह
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट देश के व्यापारिक और आर्थिक भविष्य के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। एक तरफ जहां उपभोक्ताओं को कीवी, सेब और वाइन जैसे उत्पाद सस्ते दामों पर मिल सकेंगे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी धरती पर नए रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा, छात्रों और कामगारों के लिए वीजा व आवाजाही के नियमों में ढील मिलना और अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक पटल पर तेजी से अपने पैर पसार रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस समझौते का जमीनी स्तर पर भारतीय बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ता है।







