रसोई गैस उपभोक्ताओं की बढ़ेगी मुश्किल, लौटने वाला है पुराना नियम
देशभर के करोड़ों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अगर आपने अभी तक अपने एलपीजी कनेक्शन का सत्यापन पूरा नहीं कराया है, तो अब आपको तगड़ा झटका लग सकता है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने एक दशक पुराने नियम को दोबारा धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। इस व्यवस्था के तहत गैस वितरण प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से सुस्त पड़ी इस प्रक्रिया को अब बेहद सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है। इसका मकसद फर्जी और निष्क्रिय कनेक्शनों पर लगाम लगाना है, ताकि केवल पात्र और असली उपभोक्ताओं तक ही सरकारी सहायता का पैसा पहुंच सके। लेकिन इसके फेर में आम और जागरूक नागरिकों को भी कुछ जरूरी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा करना बेहद आवश्यक हो गया है, वरना उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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क्या है 10 साल पुरानी दोहरी कीमत व्यवस्था और इसका असर
तेल कंपनियों द्वारा लाई जा रही इस दोहरी कीमत प्रणाली के अंतर्गत अब बाजार में गैस सिलेंडरों के दो अलग-अलग दाम तय होंगे। जो उपभोक्ता नियमों का पालन करते हुए अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, उन्हें हमेशा की तरह सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा। वहीं दूसरी श्रेणी उन लोगों की होगी जिन्होंने किन्हीं कारणों से अभी तक अपने दस्तावेज या बायोमेट्रिक अपडेट नहीं करवाए हैं।
इन लापरवाह या छूटे हुए उपभोक्ताओं को अब सब्सिडी वाला सिलेंडर मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा। उन्हें हर बार सिलेंडर खरीदते समय फुल मार्केट रेट या कमर्शियल मूल्य चुकाना होगा। वर्तमान में सब्सिडी और बाजार मूल्य के बीच का अंतर काफी बड़ा है, ऐसे में यह बदलाव सीधे तौर पर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के मासिक खर्च का बजट बिगाड़ने का काम करेगा। तेल कंपनियों ने इस बाबत अपने सभी क्षेत्रीय वितरकों और गैस एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
किन लोगों को उठाना पड़ेगा सबसे बड़ा नुकसान
इस नई व्यवस्था की मार सबसे ज्यादा उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगी जिन्होंने अपने गैस कनेक्शन तो ले रखे हैं, लेकिन वे या तो लंबे समय से उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या फिर कागजी कार्रवाई से दूर भागते रहे हैं। इसके अलावा, उज्ज्वला योजना और सामान्य घरेलू कनेक्शन धारक, जो कागजी प्रक्रिया को टालते आ रहे हैं, उन्हें भी आने वाले दिनों में बिना सब्सिडी के महंगे दाम पर ईंधन खरीदना पड़ेगा।
कंपनियों का साफ कहना है कि डेटाबेस को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। कई बार एक ही नाम पर कई कनेक्शन चलने या मृत व्यक्तियों के नाम पर सब्सिडी ट्रांसफर होने जैसी अनियमितताएं सामने आती रही हैं। इस दोहरी नीति के जरिए सरकार और तेल कंपनियां ऐसी तमाम खामियों को जड़ से खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
"पारदर्शी वितरण प्रणाली और सही हकदार तक सब्सिडी पहुंचाने के लिए डिजिटल सत्यापन अनिवार्य है। जो उपभोक्ता तय समयसीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगे, उन्हें बाजार दरों पर ही सिलेंडर लेना होगा।"— वरिष्ठ ऊर्जा विशेषज्ञ, नई दिल्ली
घर बैठे या एजेंसी जाकर ऐसे पूरी करें ई-केवाईसी की प्रक्रिया
यदि आप चाहते हैं कि आपके घर आने वाले एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी बंद न हो, तो आपको तुरंत अपनी ई-केवाईसी पूरी कर लेनी चाहिए। यह प्रक्रिया बेहद आसान है और इसके लिए आपको बहुत ज्यादा भागदौड़ करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप चाहें तो सीधे अपनी संबंधित गैस एजेंसी या वितरक के पास जाकर बायोमेट्रिक मशीन के जरिए अपना सत्यापन तुरंत पूरा करवा सकते हैं।
इसके अलावा, तकनीकी रूप से उन्नत विकल्प के तौर पर आप अपने स्मार्टफोन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन पर आधार फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा दी जा रही है। इस तकनीक के जरिए आप बिना एजेंसी जाए, अपने घर बैठे ही अपने चेहरे को स्कैन कर के ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं। यह तरीका उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जिनके पास समय का अभाव रहता है।
निष्कर्ष और आगे की योजना
कुल मिलाकर बात यह है कि अब नियमों के प्रति ढिलाई बरतने का समय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। सरकार और तेल कंपनियां मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता लाना चाहती हैं। ऐसे में हर उपभोक्ता की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे बिना किसी देरी के अपने गैस कनेक्शन से जुड़े सभी दस्तावेज और ई-केवाईसी के काम को पूरा कर लें। थोड़ी सी सक्रियता दिखाकर आप अपनी गाढ़ी कमाई को फालतू खर्च होने से बचा सकते हैं और बिना किसी रुकावट के सब्सिडी का लाभ पा सकते हैं।







